UT wordmark
College of Liberal Arts wordmark

Ayurvedic Practice

Ayurveda Diagnosis Method

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Pulse

नाडी

Body

शरीर

Three ailments (according to Ayurveda)

तीन दोष

Air

वायु

Bile

पित

Phlegm

कफ

Diagnosis

रोग का अंदाजा

Sacred glimpse

दर्शन

To touch

परशन

Patient

मरीज

Test

परख

Nails turn yellow

नाखून पीले होगे

Blood loss

खून की कमी

Eyes turn yellow

आंख पीली हो गई

Jaundice

पीलिया

Blistering

फफोले हो रे हैं

 

दाफड पड रे हैं

To test

परखन

Cough

खांस्सी

Pitta ailment due to cold

शीत पित

Will make a wheezing sound

खुर-खुर करेगा

Voice will be raspy

आवाज घरावैगी

Felt cold

ठंड लगी

Identifying a disease

रोग की पहचान

Air, bile, and kapha (three doshas of Ayurveda)

वायु, पित और कफ

How to check the pulse

नाडी कैसे देखते हैं

Have distinct movement

अलग-अलग चाल

 

कर

Hand

हाथ

Thumb

अंगुष्ठ

Base of thumb

अंगूठे की जड

Artery

धमनी

Life

जीव

Joy and sorrow

सुख-दुख

One who forecasts jow and sorrow

सुख-दुख बताने वाली

Ailments of air are of 80 kinds

वात रोग आस्सी किसम का है

Bile ailments are of 40 kinds

पित रोग चालीस किसम का है

Kapha ailments are of 20 kinds

कफ के रोग बीस हैं

Problem, difficulty

जंजाल

Produce

उत्पत्ति

How will the disease get better

रोग कैसे ठीक होगा

If air is dominant, reduce it.

वायु बढ़ी हुई है, उसको घटा दें

If bile is too high, reduce it.

पित बढ़ा हुआ है, उसको घटा दो

If bile is too low, raise it.

पित जो नीचे दबा हुआ है, उसको उभार दो

Cold

ठंडा

Hot

गरम

Summon, notice

समन

Bookkeeping

हिसाब-किताब

Caretaking

देखभाल

Proper treatment

ठीक ढंग से इलाज

Solution

समाधान

Avoid

परहेज

transcription (hindi): 

नाड़ी देखने से पता चलता है जी... शरीर में तीन दोष होते हैं - वायु, पित और कफ... हम इससे रोग का अंदाजा लगाते हैं... वैद्य लोग कहते हैं नाड़ी रोग जानने का, कुछ दर्शन से और कुछ परशन से, कुछ मरीज का परशन सुनने से हम परख ले हैं और कुछ उसके दर्शन... जैसे नाखून पीले होगे तो खून की कमी होगी... आंख पीली हो गई, पीलिया हो गया... हैं जी... और फफोले हो रे हैं शरीर पे, दाफड पड रे हैं, शीत पित हो गया... ये तो हो गया दर्शन से... और परखन से, खांस्सी, खुर-खुर करेगा, बोलती हांणा आवाज घरावैगी तो इसको भई ठंड लगी हुई है... तो ये, इस तरह रोग की पहचान हो जा है... और वायु, पित और कफ, ये तीनों, नाणी, हम जो ये देखते हैं, इनके नीचे अलग-अलग चाल है... अलग चाल है ये... एक बोला कैसे चाल है ये... एक बोला नाडी कैसे देखते हैं? मैंने कहा उससे, भई नाड़ी देखो, संस्कृत मैं मेरे पिताजी ने बताया था... (संस्कृत श्लोक) ये वायु, पित और कफ तीन दोष हैं... कर नाम है हाथ का, अंगुष्ठ मूले, अंगूठे की जड में, ये जो म्हारी धमनी, नाडी है, ये जीव की साक्षडी है, जीव को, जीव का सुख-दुख, शरीर का सुख-दुख बताने वाली है... वात रोग आस्सी किसम का है, पित रोग चालीस किसम का है और कफ के रोग बीस हैं... इसी से सारा जंजाल फैल जा है... वायु के साथ पित, पित के साथ कफ, कफ के साथ पित, ऐसे ये रोगों की, वो, रोगों की वो, हो जाती है, उत्पत्ति... तो फिर इसके हिसाब से हम इलाज करते हैं... हां, मेरे पिताजी कहा करते, मैंने ये सवाल करा अपने पिताजी से, रोग कैसे ठीक होगा? यार, रोग का भी क्या ठीक करना... कैसे? वायु बढ री है, वायु बढ़ी हुई है, उसको घटा दें, इलाज हो गया... पित बढ़ा हुआ है, उसको घटा दो, पित जो नीचे दबा हुआ है, उसको उभार दो... ज्यादा तो शरीर का हम ठंडा और गरम देखे हैं... तो वायु बढ़ गी, तो उसको समन कर दिया जाये और पिता बढ़ गया उसको समन कर दे, पित नीचे, वायु और कफ बढ़ गे... और पित दब गया, पित को उभार दो और वायु को समन कर दो, हो गया इलाज... तो इस तरह इलाज करने का हिसाब-किताब भी ये होया करै है जी, आ के, अपणा देखभाल कै रोगी को, उसका ठीक ढंग से इलाज किया जाये तो सारा उसका समाधान हो सकता है... और जो, जो परहेज नहीं रखते, उनकै ज्यादा टाईम लग जा है फेर...

translation (hindi): 

   

exercise (hindi): 

शरीर के क्या अंग देखने से पता लगता है कि मरीज़ को क्या रोग है?

1 आँखें

2 नाखून

3 त्वचा

4 सब

वायु, पित्त और कफ़ के रोगों को कैसे ठीक किया जाता है?

1 अगर पित्त बढ़ी हो तो उसे घटा कर

2 पित्त जो नीचे दबा है, उसे उभार कर

3 वायु बढ़ी हो तो उसे घटा कर

ऊपर दिये गए सब से

vocabulary (urdu): 

Pulse

ناڑی

Body

شریر

Three ailments (according to Ayurveda)

تین دوش

Air

وایو

Bile

پت

Phlegm

کف

Diagnosis

روگ کا اندازہ

Sacred glimpse

درشن

To touch

پرشن

Patient

مریض

Test

پرکھ

Nails turn yellow

ناخون پیلے ہوگے

Blood loss

خون کی کمی

Eyes turn yellow

آنک پیلی ہو گئی

Jaundice

پیلیا

Blistering

ففولے ہو رے ہیں

 

دافر پڑ رے ہیں

To test

پرکھن

Cough

کھانسی

Pitta ailment due to cold

شیت پت

Will make a wheezing sound

کھر کھر کریگا

Voice will be raspy

آواز گھراویگی

Felt cold

ٹھنڈ لگی

Identifying a disease

روگ کی پہچان

Air, bile, and kapha (three doshas of Ayurveda)

وایو، پت، اور کف

How to check the pulse

ناڑی کیسے دیکھتے ہیں

Have distinct movement

الگ الگ چال

 

کر

Hand

ہاتھ

Thumb

انگشٹھ

Base of thumb

انگوٹھے کی جڑ

Artery

دھمنی

Life

جیوہ

Joy and sorrow

سکھ دکھ

One who forecasts jow and sorrow

سکھ دکھ بتانے والی

Ailments of air are of 80 kinds

وات روگ اسّی قسم کا ہے

Bile ailments are of 40 kinds

پت روگ چالیس قسم کا ہے

Kapha ailments are of 20 kinds

کف کے روگ بیس ہیں

Problem, difficulty

جنجال

Produce

اتپرتہ

How will the disease get better

روگ کیسے ٹھیک ہوگا

If air is dominant, reduce it.

وایو بڑی ہوئی ہے، اس کو گھٹنا ہے

If bile is too high, reduce it.

پٹ بڑی ہوئی ہے، اس کو گھٹنا ہے

If bile is too low, raise it.

پت جو نیچے دبا ہوا ہے، اس کو ابھار دو

Cold

ٹھنڈا

Hot

گرم

Summon, notice

سمن

Bookkeeping

حساب کتاب

Caretaking

دیکھ بھال

Proper treatment

ٹھیک ڈھنگ سے علاج

Solution

سمادھان

Avoid

پرہیز

transcription (urdu): 

ناڑی دیکھنے سے پتہ چلتا ہے جی۔۔۔ شریر میں تین دوش ہوتے ہیں۔۔ وایو، پت اور کف۔۔۔ ہم اس سے روگ کا اندازہ لگاتے ہیں۔۔۔ ویدیہ لوگ کہتے ہیں ناڑی روگ جاننے کا، کچھ درشن سے, کچھ پرشن سے، کچھ مریض کا پرشن سننے سے ہم پرکھ لے ہیں اور کچھ اس کے درشن۔۔۔ جیسے ناخون پیلے ہوگئے تو خون کی کمی ہوگئی۔۔۔ آنک پیلی ہو گئی، پیلیا ہو گیا۔۔۔ ہیں جی۔۔۔ اور ففولے ہو رے ہیں شریر پہ، دافڑ پڑ رے ہیں، شیت پت ہو گیا۔۔۔ یہ تو ہو گیا درشن سے۔۔۔ اور پرشن سے، کھانسی، کھر کھر کریگا، بولتی ہانا آواز گھراویگی تو اس کو بھئی ٹھنڈ لگی ہوئی ہے۔۔۔ تو یہ، اس طرح روگ کی پہچان ہو جا ہے۔۔۔ اور وایو، پت اور کف، یہ تینوں، ناڑی، ہم جو یہ دیکھتے ہیں، ان کے نیچے الگ الگ چال ہے۔۔۔ الگ چال ہے یہ۔۔۔ ایک بولا کیسے چال ہے یہ۔۔۔ ایک بولا ناڑی کیسے دیکھتے ہیں؟ میں نے کہا اس سے، بھئی ناڑی دیکھو، سنسکرت میں میرے پتا جی نے بتا تھا۔۔۔ (سنسکرت بلاک) یہ وایو، پت اور کف تین دوش ہیں۔۔۔ کر نام ہے ہاتھ کا، انگشٹھ مولے، انگوٹھے کی جڑ میں، یہ جو ہماری دھمنی، ناڑی ہے، یہ جیوہ کی ساچھڑی ہے، جیوہ کو، جیوہ کا سکھ دکھ، شریر کا سکھ دکھ بتانے والی ہے۔۔۔ وات روگ اسّی قسم کا ہے، پت روگ چالیس قسم کا ہے اور کف کے روگ بیس ہیں۔۔۔ اسی سے سارا جنجال پھیل جا ہے۔۔۔ وایو کے ساتھ پت، پت کے ساتھ کف، کف کے ساتھ پت، ایسے یہ روگوں کی، وہ، روگوں کی وہ، ہو جاتی ہے، اتپرتی۔۔ تو پھر اس کے حساب سے ہم علاج کرتے ہیں۔۔۔ ہاں، میرے پتا جی کہا کرتے، میں نے یہ سوال کرا اپنے پتا جی سے، روگ کیسے ٹھیک ہوگا؟ یار، روگ کا بھی کیا ٹھیک کرنا۔۔۔ کیسے؟ وایو بڑھ ری ہے، وایو بڑھی ہوئی ہے، اس کو گھٹا دیں، علاج ہو گیا۔۔۔ پت بڑھا ہوا ہے، اس کو گھٹا دو، پت جو نیچے دبا ہوا ہے، اس کو ابھار دو۔۔۔ زیادہ تو شریر کا ہم ٹھنڈا اور گرم دیکھے ہیں۔۔۔ تو وایو بڑھ گی، تو اس کو سمن کر دیا جائے اور پتا بڑھ گیا اس کو سمن کر دے، پت نیچے، وایوِ اور کف بڑھ گے۔۔۔ اور پت دب گیا، پت کو ابھار دو اور وایو کو سمن کر دو، ہو گیا علاج۔۔۔ تو اس طرح علاج کرنے کا حساب کتاب بھی یہ ہویا کرے ہے جی، آ کے، اپنا دیکھ بھال کے روگی کو، اس کا ٹھیک ڈھنگ سے علاج کیا جائے تو سارا اس کا سماتھان ہو سکتا ہے۔۔۔ اور جو، جو پرہیز نہیں رکھتے، ان کے زیادہ ٹائم لگ جا ہے پھر۔۔۔

exercise (urdu): 

جسم کے کونسے حصّے کو دیکھ کر روگ کی پہچان ہوتی ہے؟

1 آنکھیں

2 ناخون

3 جلد

4 یہ سارے حصّے

وایو، پت، اور کف کے روگ کو کیسے ٹھیک کیا جاتا ہے؟

1 اگر پت بڑی ہو تو اسے گھٹا کر

2 پیت جو نیچے دبا ہے، اسے ابھار کر

3 وایو بڑی ہو تو اسے گھٹا کر

اوپر دئے گئے سب سے