UT wordmark
College of Liberal Arts wordmark

Ayurvedic Practice

Ethics

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

 

तिब्बिया कॉलेज

Ayurveda

आयुर्वेद

 

जनानी बिमारियों

Harmony, consistency, congruence, unison, concordance

सामंजस्य

Unani and ayurveda

यूनानी अौर आयुर्वेद

 

पेड़-पौधे

Two sides of the same coin

एक ही सिक्के के दो पहलू

Difference

फर्क

Cure, remedy, treatment

ईलाज

 

एक हद तक ईलाज

Sure treatment

पूरा पक्का ईलाज

Cannot say

नहीं कह सकते

Claim

दावा

Treatment for the illness

बीमारी का ईलाज

With Ayurvedic medicines

आयुर्वेदिक दवाईयों से

With Unani medicines

यूनानी दवाईयों से

Will work

काम करेगा

Will not work

काम नहीं करेगा

Ayurveda and Unani medicines

आयुर्वेद अौर यूनानी की दवाईयां

 

एंटी अॉक्सीडेंट की तरह से

Works

काम करती हैं

Serve

सेवा करो

 

लाईफ को सिर्फ बढ़ा रहे हैं

Alive

जिंदा

transcription (hindi): 

मेरा नाम डॉक्टर सीमा मुकीम है... मैंने तिब्बिया कॉलेज, करौल बाग, दिल्ली यूनिवर्सिटी से 1993 में पास आउट किया है... और मैं आयुर्वेद में ही प्रैक्टिस करती हूं... जहां तक बात है फील्ड की, मैं बेसिकली इन्फर्टेलिटी पे, मतलब कि जनानी बीमारियों पे ज्यादा एम्फैसाईज़ करती हूं... साथ में हम लोग कैंसर के लिये भी ट्रीटमेंट देते हैं... सैकिंडली, जो आपने पूछा कि जो सामंजस्य वाली बात, यूनानी और आयुर्वेद की, बेसिकली जब हम लोग पढ़ते थे तो हम लोग ये देखते थे कि आमतौर पर हम लोग जो यूज़ कर रहे हैं, जो भी पेड़-पौधे हैं, वो तो सिमिलर हैं, उनकी फॉरमेशन, जो फाइनल प्रोडक्ट है, उसका नाम अगर आप ए या बी दे दीजिये, उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा... तो जहां तक सामंजस्य की बात है वो तो दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं... आप नाम कुछ दे दीजिये, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता... अ... जो आप कहती हैं कि आप कैंसर रिसर्च पर, या कैंसर ट्रीटमेंट पर आप काम कर रही हैं, तो क्या ये ईलाज, क्योंकि कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका ज्यादातर लोग कहते हैं कि एक हद तक ईलाज हो सकता है, उसके बाद आप कुछ नहीं कर सकते... क्या आपको लगता है कि आयुर्वेद में इसका पूरा पक्का ईलाज है? पूरा पक्का ईलाज, तो आप किसी चीज को 100% नहीं कह सकते कि इसका 100% ये ट्रीटमेंट है... अगर कोई ऐसा दावा करता है कि ये 100% हम ट्रीटमेंट कर देंगे, तो वो, मेरे हिसाब से वो सही नहीं है... कोई भी ईलाज करने के लिये अगर हम, सपोज़ कर लीजिये ऐलोपैथिक साईड पर भी जाते हैं, तो सर्जरी कर देते हैं... रेडियो थैरेपी या कीमियो थैरेपी और डिफरैंट टाईप ऑफ ट्रीटमेंट एडाप्ट करते हैं... लेकिन वो भी ये नहीं कह सकते कि हमने सर्जरी कर दी है तो हमने ये कैंसर को ट्रीट कर दिया है... ठीक है ना... उसी तरह से हम लोग 100% दावा कोई भी नहीं कर सकता कि हम इस बीमारी का ईलाज 100% कर देंगे... जहां तक बात है एक्सटैंशन ऑफ लाईफ की, क्योंकि सर्जरी में भी या कीमोथैरेपी से या रेडियो थैरेपी से भी हम एक तरह से लाईफ को एक्सटैंड ही तो कर रहे हैं और हम कुछ नहीं कर रहे... किसी भी ट्रीटमेंट को हम उठायें तो वो सिर्फ एक्सटैंशन ऑफ लाईफ है... हम जब आयुर्वेदिक दवाईयों से या यूनानी दवाईयों से किसी पेशैंट को ट्रीट करते हैं, स्पेशली फॉर कैंसर, तो एक चीज आप, हम उसको बिल्कुल क्लियर करके चलते हैं कि दिस इज़ जस्ट एक्सटैंशन ऑफ लाईफ... ठीक है ना... दूसरी चीज ये है, अगर हमारे पास पेशैंट बिना किसी इन्वैस्टीगेशन के आता है, तो हम लोग पहले कोशिश ये ही करते हैं कि हम लोग कोई उसका एफ.एल.ए.सी. ना करायें... और हम सिर्फ एम.आर.आई., बेसिकली एम.आर.आई. से या सी.टी. या जो भी हों, मतलब नॉन इन्वेसिव प्रोसीज़र से हम लोग उसको डाईग्नोज़ करके उसे ट्रीटमेंट दें... तो मेरे खयाल से अगर किसी पेशैंट की हम पेनलैस लाईफ को एक्सटैंड करते हैं तो वो काफी बड़ा एचीवमेंट हो जाता है... जैसे कैंसर ट्रीटमेंट की बात आती है, उसमें ये कहा जाता है कि जो ट्रीटमेंट होता है, ये पैलियेटिड है, ये क्यूलियेटिव नहीं है... तो क्या आयुर्वेद में भी वो पैलियेटिड है क्यूलियेटिव नहीं? एग्जैक्टली आप किसी चीज को आप टर्मियोनोलॉजी में बांध नहीं सकते, कि ये पर्टिकुलरली ये ट्रीटमेंट है या वो ट्रीटमेंट है... ऐसा भी हमने देखा है कई पेशैंट्स में कि कैंसर ग्रोथ स्टार्ट हुई है, सपोज़ कर लीजिये फर्स्ट स्टेज में है पेशैंट आया, तो वो ग्रोथ रिग्रैस भी हो गई है... तो आप एग्जैक्टली किसी टर्मियोनोलॉजी में आप बांध के नहीं चल सकते कि ये यही काम करेगा और ये काम नहीं करेगा या ये नहीं कर सकता और ये कर सकता है... आप किसी टर्म पे उसको नहीं बांध सकते... एक मिनट, पैन कर लीजिये आप... इसमें थोड़ा सा... एक मिनट... कैसर वाली, उसी प्वाइंट पे, थोड़ा सा ये है कि बेसीकली आयुर्वेद और यूनानी की दवाईयां एंटी ऑक्सीडेंट की तरह से भी काम करती हैं और लाईफ को थोड़ा सा बढ़ाती हैं... हमारी दवाईयों से, जो भी हम दवाईयां यूज़ करते हैं, कैंसर के पेशैंट्स पे, उन दवाईयों से ये देखा गया है कि जो होपलैस पेशैंट्स हैं, जिन्हें ये कह दिया जाता है, मार्डन ट्रीटमेंट लेने के बाद भी, ये हमारे पास बहुत पेशैंट आते हैं... जिन्हें ये कह दिया जाता है कि ये तो बस गया, घर जा के सेवा करो, खिदमत करो, हमने कई बार देखा है, एक पेशैंट तो मेरी अभी, अनर्फाच्यूनेटली, ड्यू टू ओल्ड ऐज, अभी पैंसठ साल की ऐज में डैत्थ हुई है, शास्त्री नगर में रहती थी, चंदा देवी नाम था... मेरे पास उसकी एम.आर.आई. और सी.टी. वगैरह आज भी पड़े हैं, उन्हें एब्डॉमिनल कैंसर था... एब्डॉमिनल कैंसर, उन्हें स्टमक पर काफी बड़ा ग्रोथ था... हमने यूनानी ईलाज उन्हें यही बता के चलाया कि हम आपकी लाईफ को सिर्फ बढ़ा रहे हैं... और वो दस साल तक जिंदा रहीं, जबकि ऑल इंडिया इन्स्ट्रीट्यूट ने उन्हें कह दिया था कि होपलैस है, ले जाओ, कुछ दिन सेवा करो, और चली जायेगी... और उनकी डैत्थ कैंसर की वजह से नहीं हुई, अब वो नैचुरल डैत्थ मरी हैं... और लास्ट में उनके बिल्कुल, ट्रीटमेंट के बार, छः-सात महीने के ट्रीटमेंट के बाद मैंने उन्हें देखा है कि, जब मैंने उनके दुबारा से रीइन्वैस्टीगेट कराया तो टोटल, जितना भी ट्यूमर था, सब डिज़ाल्व हो चुका था... वो 100% क्योर थी... हमारे पास क्योंकि रिसर्च के फैसिलीटीज़ कम हैं, हम पूरी तरह से ये पता नहीं लगा पाते कि हमारी मैडिसन का जो रूट ऑफ वर्क है वो क्या है... क्योंकि यूनानी ट्रीटमेंट को अभी गौरमैंट की तरफ से भी इतनी फैसीलिटी नहीं मिल पाई कि हम लोग अपनी रिसर्चों को कंप्लीट कर सकें... लेकिन ये पता ना होते हुये भी ट्रीटमेंट का जो पार्ट रहा है हमारा ज्यादा सक्सैस्फुल रहा है और हम लोगों के पेशैंट अच्छी तरह से ठीक होते हैं, कैंसर में भी... हम ये नहीं कहते कि 100% क्योर कर दिया है, हमने लाईफ सेव कर दी, लेकिन उनका लाईफ थोड़ी सी बढ़ जरूर जाती है...

translation (hindi): 


 

exercise (hindi): 

डॉक्टर सीमा मुकीम के अनुसार आयुर्वेद और यूनानी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, क्यों?

1 दवाओं के नाम अलग अलग हैं और पेड़ पौधे दवाई बनाने के लिये भी अलग हैं

2 दवाओं के नाम एक हैं और पॆड़, पौधे दवा बनाने के लिये अलग हैं

3 दवाओं के नाम कुछ भी हों पर पेड़, पौधे दवा बनाने के लिये एक ही हैं

4 कुछ कुछ मिलता जुलता है

सीमा जी के अनुसार क्या किसी पैथी में ईलाज पूरा हो सकता है?

1 आयुर्वेद में इलाज पूरा हो सकता है, बाकी पैथियों में नहीं

2 युनानी में इलाज पूरा हो सकता है, बाकी पैथियों में नहीं

3 किसी मॆं भी मरीज़ पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता है पर उसकी ज़िन्दगी और बढ़ सकती है

4 एलोपैथी में सर्जरी से इलाज पूरा ठीक हो जाता है

आयुर्वेद में दवाएँ काम करती हैं, सीमा जी के अनुसार ये क्यों नहीं साबित हो सकता है?

1 दवाएँ मिलती नहीं है

2 दवाएँ दूर दूर से आती हैं

3 रिसर्च फ़ैसिलीतीज़ कम हैं

4 दवाएँ रिसर्च के लायक नहीं है

vocabulary (urdu): 

Tibiya College

طبیہ کالج

Ayurveda

آیوروید

Womens' illnesses

زنانی بیماریاں

Harmony, consistency, congruence, unison, concordance

سامنجسیہ

Unani and ayurveda

یونانی اور آیوروید

Trees and plants

پیڑ پودے

Two sides of the same coin

ایک ہی سکّے کے دو پہلو

Difference

فرق

Cure, remedy, treatment

علاج

Treat to a certain extent

ایک حدّ تک علاج

Sure treatment

پورا پکّا علاج

Cannot say

نہیں کہ سکتے

Claim

دعوی

Treatment for the illness

بیماری کا علاج

With Ayurvedic medicines

آیورویدک دوائیوں سے

With Unani medicines

یونانی دوائیوں سے

Will work

کام کریگا

Will not work

کام نہیں کریگا

Ayurveda and Unani medicines

آیوروید اور یونانی کی دوائیاں

Like an antioxidant

اینٹی۔آکسڈینٹ کی طرح سے

Works

کام کرتی ہیں

Serve

سیوا کرو

Will only extend life

لائف کو صرف بڑھا رہے ہیں

Alive

زندہ

transcription (urdu): 
  • میرا نام ڈاکٹر سیما مقیم ہے۔۔۔ میں نے طبّیہ کالج، کریل باغ، دلّی یونیورسٹی سے بی۔یو۔ایم۔ایس 1993 میں پاس آؤٹ کیا ہے۔۔۔ اور میں آیوروید میں ہی پریکٹس کرتی ہوں۔۔۔ جہاں تک بات ہے فیلڈ کی، میں بیسکلی انفرٹلٹی پہ، مطلب جو۔۔ زنانی بیماریوں کے اوپر زیادہ ایمفسائز کرتی ہوں۔۔۔ ساتھ میں ہم لوگ کینسر کے لئے بھی ٹریٹمینٹ دیتے ہیں۔۔۔ سیکنڈلی، جو آپ نے پوچھا کہ جو سامنجسیہ والی بات، یونانی اور آیروید کی، بیسکلی جب ہم لوگ پڑھتے تھے تو ہم لوگ یہ دیکھتے تھے کہ عام طور پہ جو ہم لوگ یوز کر رہے یہں، جو بھی پیڑ پودے ہیں، وہ تو سملر ہیں، ان کی فارمیشن، جو فائنل پروڈکٹ ہے، اس کا نام اگر آپ اے یا بی دے دیجئیے، اس سے کوئی فرق نہیں پڑیگا۔۔۔ تو جہاں تک سامنجسیہ کی بات ہے وہ تو دونوں ایک ہی سکّے کے دو پہلو ہیں۔۔۔ آپ نام کچھ دے دیجئیے، اس سے کوئی فرق نہیں پڑتا۔۔۔
  •  
  •  جو آپ کہتی ہیں کہ آپ کینسر ریسرچ پر، یا کینسر ٹریٹمینٹ پر آپ کام کر رہی ہیں، تو کیا یہ علاج، کیونکہ کینسر ایک ایسی بیماری ہے جس کا زیادہ تر لوگ کہتے ہیں کہ ایک حد تک علاج ہو سکتا ہے، اس کے بعد آپ کچھ نہیں کر سکتے۔۔۔ کیا آپ کو لگتا ہے کہ آیوروید میں اس کا پورا پکّا علاج ہے؟
  •  
  • پورا پکّا علاج، تو آپ کسی چیز کو آپ ہنڈریڈ پرسینٹ نہیں کہ سکتے کہ اس کا ہنڈریڈ پرسینٹ یہ ٹریٹمینٹ ہے۔۔۔ اگر کوئی ایسا دعوی کرتا ہے کہ یہ ہنڈریڈ پرسینٹ ہم ٹریٹ کردینگے، تو وہ، میرے حساب سے وہ صحیح نہیں ہے۔۔۔ کوئی بھی علاج کرنے کے لئے اگر ہم، سپوز کر لیجئیے ایلوپیتھک سائڈ پر بھی جاتے ہیں، تو وہ سرجری کر دیتے ہیں۔۔۔ ریڈیو تھیرپی یا کیمیو تھوریپی اور ڈفرینٹ ٹائم آف ٹریٹمینٹ اڈاپٹ کرتے ہیں۔۔۔ لیکن وہ بھی یہ نہیں کہ سکتے کہ ہم نے سرجری کر دی ہے تو ہم نے یہ کینسر کو ٹریٹ کر دیا ہے۔۔۔ ٹھیک ہے نا۔۔۔ اسی طرح سے ہم لوگ ہنڈریڈ پرسینٹ دعوی کوئی بھی نہیں کر سکتا کہ ہم اس بیماری کا علاج ہنڈریڈ پرسینٹ کر دینگے۔۔۔ جہاں تک بات ہے اکسٹینشن آف لائف کی، کیونکہ سرجری میں بھی یا کیمیوتھیرپی سے یا ریڈیو تھیرپی سے بھی ہم ایک طرح سے لائف کو اکسٹینڈ ہی تو کر رہے ہیں اور ہم کچھ نہیں کر رہے۔۔۔ کسی بھی ٹریٹمینٹ کو ہم اٹھائیں تو وہ صرف اکسٹینشن آف لائف ہے۔۔۔ہم جب آیورویدک دوائیوں سے یا یونانی دوائیوں سے کسی پیشنٹ کو ٹریٹ کرتے ہیں، اسپیشلی فار کینسر، تو ایک چیز آپ، ہم اس کو بالکل کلیر کر کے چلتے ہیں کہ دس از جسٹ اکسٹینشن آف لائف۔۔۔ ٹھیک ہے نا۔۔۔ دوسری چیز یہ ہے، اگر ہمارے پاس پیشنٹ بنا کسی انویسٹگیشن کے آتا ہے، تو ہم لوگ پہلے کوشش یہ ہی کرتے ہیں کہ ہم لوگ کوئی اس کا ایف۔ ایل۔ اے۔ سی۔ نا کرائیں۔۔۔ اور ہم صرف ایم۔ آر۔ آئی۔، بیسکلی ایم۔ آر۔ آئی۔ سے یا سی۔ ٹی۔ یا جو بھی ہیں، مطلب نان انویسو پروسیجر سے ہم لوگ اس کو ڈائگنوز کر کے اسے ٹریٹمینٹ دیں۔۔۔ تو میرے خیال سے اگر کسی پیشنٹ کی ہم پینلیس لائف کو اکسٹینڈ کرتے ہیں تو وہ کافی بڑا اچیومینٹ ہو جاتا ہے۔۔۔
  •  
  • جیسے کینسر ٹریٹمینٹ کی بات آتی ہے۔۔۔ اس میں یہ کہا جاتا ہے کہ جو ٹریٹمینٹ ہوتا ہے، یہ پیلیٹو ہے، یہ کیوریٹو نہیں ہے۔۔۔ تو کیا آیوروید میں بھی وہ پیلییٹو ہے کیوریٹو نہیں؟
  •  
  • اگزیکٹلی آپ کسی چیز کو آپ ٹرمنولوجی میں باندھ نہیں سکتے، کہ یہ پرٹکیولرلی یہ ٹریٹمینٹ ہے یا وہ ٹریٹمینٹ ہے۔۔۔ ایسا بھی ہم نے دیکھا ہے کئی پیشنٹس میں کہ کینسر گروتھ اسٹارٹ ہوئی ہے، سپوز کر لیجئیے فرسٹ اسٹیج میں پیشنٹ آیا ہے، تو وہ گروتھ ریگریس بھی ہو گئی ہے۔۔۔ تو آپ اگزیکٹلی کسی ٹرمنولوجی میں آپ باندھ کے نہیں چل سکتے کہ یہ یہی کام کریگا اور یہ کام نیہں کریگا یا یہ نہیں کر سکتا اور یہ کر سکتا ہے۔۔۔ آپ کسی ٹرمس پہ اس کو نہیں باندھ سکتے۔۔۔
  •  
  • ایک منٹ، پین کر لیجئیے آپ۔۔۔ اس میں تھوڑا سا۔۔۔ ایک منٹ۔۔۔
  •  
  • اس میں۔۔۔ تھوڑا سا، کینسر والے اسی پوائنٹ پہ تھوڑا سا یہ ہے کہ بیسکلی آیوروید اور یونانی کی دوائیاں اینٹی آکسیڈینٹ کی طرح سے بھی کام کرتی ہیں اور لائف کو تھوڑا سا بڑھاتی ہیں۔۔۔ ہماری دوائیوں سے، جو بھی ہم دوائیاں اپنی یوز کرتے ہیں، کینسر کے پیشینٹس پہ، ان دوائیوں سے یہ دیکھا کیا ہے کہ جو ہوپلیس پیشینٹ ہیں، جنہیں یہ کر دیا جاتا ہے، ماڈرن ٹریٹمینٹ لینے کے بعد بھی، یہ ہمارے پاس بہت پیشینٹ آتے ہیں۔۔۔ جنہیں یہ کہ دیا جاتا ہے کہ یہ تو بس گیا، گھر جا کے سیوا کرو، خدمت کرو، ہم نے یہ کئی بار دیکھا ہے، ایک پیشینٹ تو میری ابھی، انفورچونیٹلی، ان کی۔۔۔ ڈیو ٹو اولڈ ایج، ابھی پینسٹھ سال کی ایج میں ڈیپتھ ہوئی ہے، شاستری نگر میں رہتی تھی، چندا دیوی نام تھا۔۔۔ اور میرے پاس اس کی ایم۔ آر۔ آئی۔ اور سی۔ ٹی۔ وغیرہ آج بھی بھی پڑے ہیں، انہیں ایبڈامنل کینسر تھا۔۔۔ ایبڈامنلی کینسر،  اسٹمک پہ کافی بڑا گروتھ تھا۔۔۔ ہم نے یونانی علاج انہیں یہی بتا کے چلایا کہ ہم آپ کی لائف کو صرف بڑھا رہے ہیں۔۔۔ اور وہ دس سال تک زندہ رہی، جب کہ آل انڈیا انسٹٹوٹ نے انہیں کہ دیا تھا کہ ہوپلیس ہے، لے جاؤِ، کچھ دن سیوا کرو، اور چلی جائیگی۔۔۔ اور ان کی ڈیتھ کینسر کی وجہ سے نہیں ہوئی، اب وہ نیچرل ڈیتھ مری ہیں۔۔۔ اور لاسٹ میں ان کے بالکل، ٹریٹمینٹ کے بعد، چھ سات مہینے کے ٹریٹمینٹ کے بعد میں نے انہیں دیکھا ہے کہ، جب میں نے ان کے دوبارہ سے ری۔انویسٹیگیٹ کرایا تو ٹوٹل، جتنا بھی ٹیومر تھا، سب ڈزالو ہو چکا تھا۔۔۔ وہ ہنڈریڈ پرسینٹ کیور تھی۔۔۔ ہمارے پاس کیونکہ ریسرچ کے فسلٹیز کم ہیں، ہم پوری طرح سے یہ پتہ نہیں لگا پاتے کہ ہماری میڈسن کا جو روٹ آف ورک ہے وہ کیا ہے۔۔۔ کیونکہ یونانی ٹریٹمینٹ کو ابھی گورمینٹ کی طرف سے بھی اتنی فسلٹی نہیں مل پائی کہ ہم لوگ اپنی ریسرچوں کو کمپلیٹ کر سکیں۔۔۔ لیکن یہ پتہ نا ہوتے ہوئے بھی ٹریٹمینٹ کا جو پارٹ رہا ہے ہمارا زیادہ سکسیسفل رہا ہے اور ہم لوگوں کے پیشنٹ اچّھی طرح سے ٹھیک ہوتے ہیں، کینسر میں بھی۔۔۔ ہم یہ نہیں کہتے کہ ہنڈریڈ پرسینٹ کیور کر دیا ہے یا ہم نے لائف سیو کر دی، لیکن ان کی لائف تھوڑی سی بڑھ ضرور جاتی ہے۔۔۔
exercise (urdu): 

ڈاکٹر سیما مقیم کس چیز میں اسپیشلائز کرتی ہیں؟

1 دماغی بیماریوں میں

2 پیٹ کی بیماریوں میں

3 مردانی بیماریوں میں

4 زنانی بیماریوں میں

ڈاکٹر سیما کے مطابق آیوروید اور یونانی ایک ہی سکّے کے دو پہلو ہیں، کیوں؟

1 دواؤں کے نام الگ الگ ہیں اور پیڑ، پودے دوا بنانے کے لئے بھی الگ ہے

2 دواؤں کے نام ایک ہیں اور پیڑ، پودے دوا بنانے کے لئے الگ ہیں

3 دواؤں کے نام کچھ بھی ہوں لیکن پیڑ، پودے دوا بنانے کے لئے ایک ہی ہیں

4 کچھ کچھ ملتے جلتے ہیں

سیما جی کے مطابق کیا کسی پیتھی میں پورا علاج ہو سکتا ہے؟

1 آیوروید میں علاج پورا ہو سکتا ہے، باقی پیتھیوں میں نہیں

2 یونانی میں علاج پورا ہو سکتا ہے، باقی پیتھیوں میں نہیں

3 کسی میں بھی مریض پوری طرح ٹھیک نہیں ہو سکتا، لین اس کی زندگی بڑھ سکتی ہے

4 ایلوپیتھی میں سرجری سے علاج پورا ٹھیک ہوجاتا ہے

آیوروید میں دوائیں کام کرتی ہیں، ڈاکٹر صاحب کے مطابق یہ کیوں نہیں ثابت ہو سکتا ہے؟

1 دوائیں ملتی نہیں ہیں

2 دوائیں دور دور سے آتی ہیں

3 ریسرچ فیسلٹیز کم ہیں

4 دوائیں ریسرچ کے لائق نہیں