UT wordmark
College of Liberal Arts wordmark

Ethics & Culture

Ayurveda Ethics and Diagnosis

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Doctor

डॉक्टर

 

 

छिकले

 

Physician

वैद्य

 

 

टो ले जाओ

 

Will take care of it

संभालैगा

संभालेगा

Cheap treatment

सस्ता ईलाज

सस्ता इलाज

Grasses

घास-फूस

 

Expensive

कीमती

 

Herbs

जडी-बूटी

 

Wood from the jungle/forest

जंगल की ही लकड़ी

 

Cost

कीमत

 

Cough

खांसी

 

Pinch of ash

राख की चुकटी

 

Burn gold and eat it

सोना फूक के खवा ले

 

Fate

किस्मत

 

Native medicine

देसी दवाई

 

Testing for disease

रोग की जांच

 

Cure, remedy, treatment

इलाज

 

 

शर्तिया

 

Identifying a disease

रोग को पहचानना

 

 

पहले रोग को जांचो

 

 

फिर रोग की परीक्षा करो

 

 

मौसम की परीक्षा करो

 

Cough of the summer season

गरमी की खांस्सी

 

It is written, cough is of 5 kinds

खांस्सी जैसे पांच किसम की लिक्खी है

 

Identifying a disease

रोग की पहचान

 

First test for the disease

पहले रोग की परीक्षा करो

 

When you treat

जब इलाज करो

 

transcription (hindi): 

म्हारे पास तो जब आवैं हैं जी जब सारे नू कह दे हैं ना डॉक्टर, छिकले हैं, आकै भई इब किसी वैद्य ने टो ले जाओ, वो सारे लूट-लाट, लो कहोगे आप बुराई करै हैं, जब सारे खाल्ली हो ले हैं ना, जब करीब-करीब, जब कहैं हैं ना हम कती लुट-पिट लिये, ईब जा वैद्य संभालैगा तनै, जिब वैद्य के पास जा हैं... और के कहैं? क्यूं सस्ता ईलाज है ये... सस्ता इलाज है... और कई ऐसे भी जा हैं, कि वैद्य जी हमारे पास तो कुछ भी ना... ना है तो भई ले जा तू... हो जा तै दे दिये नहीं तो टाल मारिये हम तै... नू कह दे हैं तुम तै घास-फूस पाड़ लाओ हो... भई घास-फूस भी बहुत कीमती है... घास-फूस भी वैसे थोड़ा आवै है... तै जड़ी-बूटी है, लकड़ी है सारी जंगल की ही लकड़ी है... पर इनकी कीमत भी, देखो जी, बात ये है (खांसी) लाग्गै जब राख की चुकटी लाग जा, ना लगै तै सोना फूक के खवा ले... लगै किस्मत की भी है... हैं जी... वैसे दवाई हैं जो देसी दवाई, हां, रोग के अनुसार, रोग की जांच होने के बाद में इलाज किया जाये तो वो शर्तिया होगा... अगर सब्जी में नमक की कमी है, नमक सै ही मिटैगी, घी से नहीं मिटै... हैं जी... रोग को पहचानना चाहिये... हमनै जरूत तो है नमक की और हम उसको सोना फूंक कै खुवावैं हैं, ये गलत बात है... तो बात ये है जी कि पहले रोग और फिर जा कै, मेरे पिताजी कहा करते

 

(संस्कृत श्लोक)

 

पहले रोग को जांचो और फिर रोग की परीक्षा करो, मौसम की परीक्षा करो, कै भई इसकै गरमी है, गरमी की खाँस्सी है, खाँस्सी जैसे पांच किसम की लिक्खी है... अगर पित की खाँसी है, किसी ने कह दिया, यार इसके खाँसी है, ठंड की खाँस्सी है, सूंट पीस कै चटा दो खाँस्सी ठीक हो जावैगी... होगी ठीक... अब उसनै सोच्ची, हां कै भई मैं तो खाँस्सी नुस्खा जान गया... अब उसनै पता चल गया कि मैं खाँस्सी की दवाई दूं हूं... किसी को थी पित की खाँसी, उसतै भी सूंट चटा दी... तै दुगनी होगी... रोग की पहचान तो नहीं करी ना... तो बात ये है जी कि पहले रोग की परीक्षा करो, जब इलाज करो, जब इलाज होया करै है...

exercise (hindi): 

वैद्य के पास मरीज़ कब आते हैं?

1 जब मरीज़ और सब दवाएँ ले लेते हैं और कोई फ़ायदा नहीं होता है

2 जब दवाओं पर बहुत पैसे खर्च कर लेते हैं

3 सब

4 जब सब किस्मत पर छोड़ देते हैं

वैद्य जी के अनुसार दवा कब फ़ायदा करती है?

1 जब रोग की जाँच ठीक तरह से हो

2 जब रोग की परीक्षा ठीक तरह से हो

3 सब

4 जब मौसम की परीक्षा हो