UT wordmark
College of Liberal Arts wordmark

Ethics & Culture

Ayurveda Training and Ethics

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Source of inspiration

प्रेरणा स्त्रोत

Hemerrhoids

बवासीर

Cancer

नासूर

Fistula

भगंदर

Ayurveda

आयुर्वेद

Help

सहायता

Bring water

पानी लाना

Enema

अनीमा-फनीमा

Powder

चूरण

Chutney, sauce

चटनी

Which medicine does what

कौन सी दवाई क्या काम आती है

All India Ayurvedic Institute

अखिल भारतीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ

Recognition

मान्यता

Doctor of Ayurveda (degree)

आयुर्वेदाचार्य

Doctor of Ayurveda (degree)

वैद्याचार्य

Vaidya Vishaarad degree

वैद्य विशारद

Ayurveda Rishad degree

आयुर्वेद रिशद

Doctorate

आचार्य

Ayurveda Ratan degree, certificate

आयुर्वेद रतन

Interest

शौक

Student, pupil

चेला

Decades of experience

दशकों का अनुभव

Bittersweet memories

खट्टी-मीठी याद

Experience

अनुभव

Have touched the essence

मर्म को छू गया हो

Sour and sweet

खट्टी-मीठी

Not everything will necessarily be right

जरूरी तो है नहीं के सब सही हो जायेंगे

Medicine could not cure it

दवाई से सही ना हो पाया

Died

मर गया

Objection

आपत्ति

Claim

दावा

Harm

बुराई

transcription (hindi): 

डॉक्टर साहब ये बतायें कि हरेक कार्य में कोई ना कोई प्रेरणा स्त्रोत तो होता है... क्या आपको इस तरफ आने में, कि आपने आयुर्वेद के क्षेत्र को चुना?

हां, जो हमारा जो गांव है वो खुर्जा क्षेत्र में पड़ता है... गांव तो हमारा बृज क्षेत्र में है लेकिन हमारी बहन खुर्जा क्षेत्र में ब्याही थी, थोरा गांव है एक, वो बवासीर, नासूर, भगंदर के स्पेशलिस्ट थे हमारे बहनोई... तो गांव में उन दिनन में स्कूल नहीं थे, चार, चौथी-पांचवीं तक के थे, तो फिर मैं अपनी बहन के यहीं पढ़ा इंटर तक... तो उन, आयुर्वेद के ही वो, से ही करते थे वो बवासीर और इनका ईलाज-पिलाज... तो वहां थोड़ी-थोड़ी मैं वैसे ही सीख गया... वहां रहता तो था ही था उनके पास... तो थोड़ी-घनी मुझसे सहायता भी ले लेते थे... पानी लाना, फलाना कर या पकड़, अनीमा-फनीमा, जैसे वो करते थे... तो आधी-सी तो आयुर्वेद का थोड़ा सा चूरण, चटनी, फटनी लेनी मैं वैसे ही सीख गया, बिना ही, इंटर तक करने से पहले ही सीख गया, कौन सी दवाई क्या काम आती है, लेकिन वो मेरे गुरु भी रहे... वहीं से मैंने प्रैक्टिल-सा करा... फिर मैं कमाने की सी इच्छा पैदा हुई... अखिल भारतीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ पहले दिल्ली में ही थी... अब उसकी मान्यता यहां, कोर्स की नहीं रही, जब से बी..एम.एस. चली है, जब से उसे, उसकी मान्यता ना मिली है... उससे पहले जो भी आयुर्वेदाचार्य, वैद्याचार्य, वैद्य विशारद, आयुर्वेद रिशद, ऐसी कई परीक्षा थीं, जिनकी मान्यता थी, तो इससे मैंने फिर आचार्य कर लिया, साहित्य सम्मेलन से भी कर लिये मैंने पांच-चार कोर्स आयुर्वेद विशारद, आयुर्वेद रतन, पतन, सब मैंने कर रखे हैं... और कुछ दिन में डॉक्टर इनको, ऐसा अभी शौक था मुझे डॉक्टर बनाने का, तो उनसे यहां भी प्रैक्टिस मैं वैसे अपना प्रैक्टिल सा भी सिखा देता था... तो जब साहित्य सम्मेलन की मान्यता थी, अब नहीं है... तो रतन भी करा देता था मैं... मुझ पर सैंटर था... तो करा ही देता था, जैसे भी हो... ऐसे कई, दशों चेला हैं ऐसे, जहां-तहां प्रैक्टिस कर रहे हैं...

आपकी ये जो प्रैक्टिस है, इतने सालों का आपका, दशकों का अनुभव ये रहा है, इसमें कहीं ना कहीं, कोई ना कोई खट्टी-मीठी याद जुड़ी होगी, कुछ अनुभव, कोई अनुभव जुड़ा होगा जो आपको याद आता है, जो आपको कभी मर्म को छू गया हो... तो वो हमारे साथ बताने का कृपा करें?

जैसे खट्टी-मीठी, ऐसी कुछ नहीं... एक-दो बार, एक-दो मरीज, मरे जरूर, पहले-पहले... (हंसते हुये) तो, अब बीमारी में तो, अब अरबन में रोजाना छः, पांच-छः लाश निकलती हैं... तो जब मरीज क्रौनिक केस में आयेगा, तो ये जरूरी तो है नहीं के सब सही हो जायेंगे... तो उनसे हम वैसे कह देते थे कि करके देखते हैं, बात बन जाती है तो सही है, नहीं तो... लेकिन व्यक्ति कोई मर जाता है तो डॉक्टर को हृास तो होती ही है कि अपने में महसूस करता है कि व्यक्ति अपने यहां, अपनी दवाई से सही ना हो पाया, मर गया... तो ये ही खट्टी-मीठी हैं, नहीं तो हमें कोई आपत्ति कुछ नहीं 

exercise (hindi): 

आयुर्वेद की प्रेरणा वैद्य जी को कहाँ से मिली?

1 पिता से

2 दादा से

3 बहनोई से

4 ससुर से

आयुर्वेद के प्रशिक्षणक लिये क्या-क्या किया?

1 आचार्य किया

2 साहित्य सम्मेलन से पाँ छ: कोर्स किये

3 सब किया

4 रतन भी किया