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College of Liberal Arts wordmark

Ethics in Medicine

Demographics, Ethics, Reasons for Feticide

mediaURI: 
transcription (hindi): 

Question

सवाल

Female feticide

कन्या भ्रूण हत्या

How can be killed

किस प्रकार से की जा सकती है हत्या

Outdated thought

दकियानूसी सोच

Girl was born

लड़की पैदा हो गई

Lest something happen to him/her

उसको कुछ हो न जाये

Lest someone kidnap her

उसको कोई उठा न ले

Let no ill behavior befall her

उसके साथ कोई अौर जलत व्यवहार न हो जाये

In ordinary families

साधारण परिवारों में

In soft families

नरम परिवारों में

In poor families

गरीब परिवारों में

Boy

लड़के को

Very strange tension

अजीब सी टैंशन

Very strange psychological pressure

अजीब से मनोवैज्ञानिक प्रैशर

How will the wedding be

कैसे शादी होगी

Pregnancy

गर्भ

Where will the cost come from

खर्च कहां से आयेगा

Please clean

सफाई करा दें

Midwives

दाइयां

In the stomach there is a boy or a girl

पेट में लड़का है या लड़की

Due to curiosity

कौतुहल वश

The first is a girl

पहले एक लड़की हो जाती है

Two babies have been born

दो ही बच्चे पैदा करने हैं

One boy and one girl

एक लड़का और एक लड़की

If it is a boy then he will be born

लड़का हो तो उसको पैदा होने दें

Other girl

दूसरी लड़की

Family name will be Roshan

परिवार का नाम रौशन करेगा

Blood, family

गोत्र

Advantage, benefit, gain, profit, use

फायदा

Deep

गहरे में

Social evil

सामाजिक बुराई

Murder because of dowry

दहेज हत्या

Dowry system

दहेज प्रथा

In wealthy families, in well-to-do families

संपन्न परिवारों में

In middle-class families

वैश्य परिवारों में

Girl's wedding

लड़की की शादी

Marriage

शादी की बात

Customs

रीति-रिवाज़

Ego, pride

अहंकार

The competition is so intense

दौड़ इतनी बढ़ गई है

Realization

अहसास

Malpractice

कुप्रथा

Campaign, drive

अभियान

Through, by means of

माध्यम

Inkling, idea

आभास

Abortion

भ्रूण की सफाई

Killing a living being

जीव की हत्य

A significant murder

अच्छा खासा मर्डर

Think

सोचें

Reflect

चिंतन करें

translation (hindi): 

उ... एक सवाल ये है कि, जो ये कन्या भ्रूण हत्या है, की जा रही है... काफी प्रचलित है, गांव में शायद ज्यादा होती है, शहरों की बनिस्बत, तो आप बेहतर बता पायेंगे... तो आपको क्या लगता है, उसका एक कारण क्या है? और दूसरा, किस प्रकार से की जा जाती है हत्या?

जो कन्या भ्रूण हत्या का जो मेन कारण है, वो है हमारी दकियानूसी सोच... हमारे लोगों ने ये सोच लिया है कि जिसके घर में लड़की पैदा हो गई, उसको बीस साल तक, जब तक वो जवान होके उसकी शादी नहीं हो जाती, तब तक एक टैंशन झेलनी है उसकी... उसको कुछ हो न जाये, उसको कोई उठा न ले, उसके साथ कोई और गलत व्यवहार न हो जाये... क्योंकि हमारे जो सामाजिक ढांचा है, उसके अंदर एक sense of insecurity भी develop हुई है... आजादी के बाद भी हमारे गांव के अंदर, विशेष तौर पे, sense of insecurity साधारण परिवारों में, नरम परिवारों में, गरीब परिवारों में है... लड़के को तो यूं मानते हैं कि ये अपना गुजारा किसी न किसी तरह कर ही लेगा, लेकिन जैसे ही लड़की पैदा होती है परिवार में, तो परिवार, पूरा परिवार ही, एक अजीब सी टैंशन से, अजीब से मनोवैज्ञानिक प्रैशर से गुजरने लगता है कि अब इसको कैसे पढ़ाना है, फिर इसकी अल्टीमेटली कैसे शादी होगी... और उस शादी का जो प्रश्न है, जो बीस साल की बात, पैदा होने से पहले ही, बस ये पता चल जाये के गर्भ में लड़की है, बीस साल बाद की जो टैंशन है वो उसी समय हमारे परिवारों में आ जाती है, के इसकी शादी में इतना खर्च कहां से आयेगा... तो जो साधारण परिवार हैं, गरीब परिवार हैं, वो ये समझते हैं कि इससे अच्छा तो इसकी हम सफाई करा दें, कन्या को, और वो डॉक्टर के पास जाते हैं... डॉक्टरों का जो नैटवर्क है वो उनके कंपाउंडर्स से उनकी नर्स और जो हमारे गांव में दाइयां हैं, जो क्वैक्स हैं, आर.एम.पी. डॉक्टर जिनको बोलते हैं, उनके माध्यम से एक जाल पूरे इंडिया में फैला हुआ है...

तो आपका परिवार में किसी बहू की या किसी सास की ये इच्छा हो के मैं ये चैक कराऊं कि पेट में लड़का है या लड़की है, तो वो अपने दमंतइल डॉक्टर से या जो उसकी ए.एन.एम., नर्स वगैरह आती रहती है रूटीन चैकअप के लिये, उनसे बोलती है, कि मैं पता करना चाहती हूं कि है क्या? कौतुहल वश भी पता कर लेते हैं... जहां तक फस्ट, पहले बच्चे का सवाल है, उसमें ये बात इतनी महत्वपूर्ण नहीं होती, लेकिन जब किसी को पहले एक लड़की हो जाती है तो जरूर, 100% उसमें, हमारे परिवार भी मैं कहूंगा, ऐसे हैं, जो यूं चाहते हैं, के दो ही बच्चे पैदा करने हैं, एक लड़का और एक लड़की, यदि पहले किसी को लड़की हो जाती है, तो दूसरी वो ये चाहता है कि मुझे लड़की ना हो, मैं चैक करा लूं... अगर लड़की है तो उसकी सफाई करा लें, फिर ट्राई करें, चैक करायें, लड़का हो तो उसको पैदा होने दें... तो जो दूसरी लड़की की जो acceptability है, वो बिल्कुल एक किस्म से समाप्त हो गई है... उसमें छोटा परिवार भी आ गया और रिचैस्ट परिवार भी आ गये... तो दूसरी लड़की की जो acceptability समाप्त हुई वो इसलिये कि लोगों की मैंटेलिटी है मेल और फीमेल के हिसाब से, के भई लड़का ही जो है हमारे परिवार का नाम रौशन करेगा, लड़के का ही हमें मिलेगा, लड़की का तो हम ना कुछ खा सकते ना ले सकते... ये तो दूसरे के घर चली ही जायेगी... और उसके साथ-साथ sense of insecurity भी डवलप होती रहती है... और उस पर जो इनवैस्टमैन्ट है उसको कोई और कैश करेगा, जहां वो शादी होके जायेगी, कितनी बड़ी अफसर बन जाये... चाहें वो कितने भी बड़े मुकाम पे पहुंच जाये... उसका तो गोत्र भी वो नहीं रहेगा... आज गोयल खानदान में एक लड़की पैदा हो गई और उसकी शादी गर्ग खानदान में हो गई, तो उसको तो गोत्र भी गर्ग हो जाता है यहां पर तो...

तो हमारे पास तो उसका कुछ नहीं रहा... तो हम उस पर इनवैस्ट ना करके लड़के पे इनवैस्ट करने में ज्यादा अपना फायदा समझते हैं... हमारे एक गहरे में ये एक सोच होती है, अंदर खाते... और जो सामाजिक बुराई है, दहेज हत्या, दहेज प्रथा की, वो भी एक बहुत अच्छा खासा हमारे ऊपर बर्डन होता है... क्योंकि समाज में दहेज प्रथा तो है ही है, साथ में एक दिखावे की होड़ भी है... संपन्न परिवारों में, खासतौर पर वैश्य परिवारों में, के भई कौन अपने, लड़की की शादी में कितने पैसे लगा रहा है... लड़के की जब शादी की बात चलती है तो पहला सवाल ये भी उठता है बजट क्या है? खर्च कितना करवा रहे हो? उसमें टैन्ट पर कितना खर्च होगा, कार्ड कितना... एक कार्ड मैं अभी दिखा सकता हूं, आया हुआ है हमारे पास कल, हमारे ही परिवारों से, करीबन चार सौ रुपये का खर्च है उस एक कार्ड पे... यानि कि उस शादी में कार्ड-कार्ड पर इतना खर्च है जितना, एक, जिसमें, दस गरीब बच्चों की शादी हो सकती है... तो जो ये, इस प्रकार के रीति-रिवाज़, अहंकार के, इतना विस्तार हमारा हो गया है, दौड़ इतनी बढ़ गई है हमारी, अपने आपको दिखाने की, अपनी संपन्नता को दिखाने की, चाहें वो हो या ना हो, लेकिन दिखे जरूर... तो उसकी वजह से भी हमारे लोगों में sense of inferiority complex भी आ गया है, कि इतने पैसे में, हम कहां से लायेंगे लड़की की शादी के लिये... और ये तो इनतकमद है, इसको सफाई कराओ... और आदमी उस समय जा के और वो सफाई करा लेता है और ये उसको पता नहीं चलता, बेचारे को, गहरे में उसको अगर अहसास हो जाये, के ये आपने अच्छा खासा मर्डर कर दिया है तो शायद इस चीज पे जा के लगाम, इस कुप्रथा पर लगाई जा सकती है...

तो हम जो अभियान चला रहे हैं, उसके माध्यम से लोगों को यही आभास करा रहे हैं कि आप एक भ्रूण की सफाई नहीं कर रहे, आप एक अच्छे खासे जीव की हत्या कर रहे हैं और ये एक अच्छा खासा मर्डर है... तो, और इसको आप फैशन के तौर पर ले रहे हैं... तो आप इसपे सोचें, चिंतन करें, उसपे रूकें...

exercise (hindi): 

यह जो टेंशन है परिवारों में, वह किस की वजह से है?

1 लड़की को कैसे पढ़ाना है

2 लड़की की शादी कैसे होगी

3 दहेज कहाँ से आए

4 सब की वजह से

डॉ गोयल कहते हैं कि एक 'sense of insecurity' कब से develop हुई है?

1 आजादी से

2 दस-बीस सालों से

3 पिछले सौ सालों से

4 अंग्रेज़ों के आने से

डॉ गोयल के अनुसार कन्या भ्रूणहत्या का मुख्य कारण क्या है?

1 दकियानूसी सोच

2 शादी तय करने की समस्या

3 लड़कियों की ज़्यादा खर्च करने की आदत

4 लड़कियों का व्यवहार

कन्या भ्रूणहत्या ज्यादातर कहाँ की जाती है?

1 गाँवों में

2 शहरों में

3 बस्तियों में

4 कहीं भी

डॉ गोयल कहते हैं कि हर परिवार की इच्छा क्या है?

1 कि हमारा एक बेटा हो

2 कि हमारी एक बेटी हो

3 कि हमारे काफी बच्चे हों

4 कि हमारा कोई भी बच्चा हो

vocabulary (urdu): 

Question

سوال

Female feticide

کنیا دھرون ہتیا

How can be killed

کس پرکار سے کی جا سکتی ہے ہتیا

Outdated thought

دکیانوسی سوچ

Girl was born

لڑکی پیدا ہو گئی

Lest something happen to him/her

اس کو کچھ ہو نہ جائے

Lest someone kidnap her

اس کو کوئی اٹھا نہ لے

Let no ill behavior befall her

اس کے ساتھ کوئی اور غلط ویوہار نہ ہو جائے

In ordinary families

سادھارن پریواروں میں

In soft families

نرم پریواروں میں

In poor families

غریب پریواروں میں

Boy

لڑکے کو

Very strange tension

عجیب سی ٹینشن

Very strange psychological pressure

عجیب سے منویاگیانک پریشر

How will the wedding be

کیسے شادی ہوگی

Pregnancy

گربھ

Where will the cost come from

خرچ کہاں سے آئیگا

Please clean

صفائی کرا دیں

Midwives

دائیاں

In the stomach there is a boy or a girl

پیٹ میں لڑکا ہے یا لڑکی

Due to curiosity

کوتہل وش

The first is a girl

پہلے ایک لڑکی ہو جاتی ہے

Two babies have been born

دو ہی بچّے پیدا کرنے ہیں

One boy and one girl

ایک لڑکا اور ایک لڑکی

If it is a boy then he will be born

لڑکا ہو تو اس کو پیدا ہونے دیں

Other girl

دوسری لڑکی

Family name will be Roshan

پریوار کا نام روشن کریگا

Blood, family

گوتر

Advantage, benefit, gain, profit, use

فائدہ

Deep

گہرے میں

Social evil

ساماجک برائی

Murder because of dowry

دہیج ہتیا

Dowry system

دہیج پرتھا

In wealthy families, in well-to-do families

سمپن پریواروں میں

In middle-class families

ویشیہ پریواروں میں

Girl's wedding

لڑکی کی شادی

Marriage

شادی کی بات

Customs

ریت رواج

Ego, pride

اہنکار

The competition is so intense

دوڑ اتنی بڑھ گئی ہے

Realization

احساس

Malpractice

کپرتھا

Campaign, drive

ابھیان

Through, by means of

مادھیم

Inkling, idea

آبھاس

Abortion

دھرون کی صفائی

Killing a living being

جیو کی ہتیا

A significant murder

اچّھا خاصہ مرڈر

Think

سوچیں

Reflect

چنتن کریں

transcription (urdu): 

ایک سوال یہ ہے کہ، جو یہ کنیا دھرون ہتیا جو کی جاتی ہے۔۔۔ کافی پرچلت ہے، گاؤں میں شاید زیادہ ہوتی ہے، شہروں کی بنصبت، تو آپ بہتر بتا پائینگے۔۔۔ تو آپ کو کیا لگتا ہے، اس کا ایک، کارن کیا ہے؟ اور دوسرا، کس پرکار سے کی جا جاتی ہے ہتیا؟

 

جو کنیا دھرون ہتیا کا جو مین کارن ہے، وہ ہے ہماری دکیانوسی سوچ۔۔۔ ہمارے لوگوں نے یہ سوچ لیا ہے کہ جس کے گھر میں لڑکی پیدا ہو گئی، اس کے بیس سال تک، جب تک وہ جوان ہو کے اس کی شادی نہیں ہو جاتی، تب تک ایک ٹینشن جھیلنی ہے اس کی۔۔۔ اس کو کچھ ہو نہ جائے، اس کو کوئی اٹھا نہ لے، اس کے ساتھ کوئی اور غلط ویوہار نہ ہو جائے۔۔۔ کیونکہ ہمارے جو ساماجک ڈھاچا ہیں، اس کے اندر ایک سینس آف انسکیورٹی بھی ڈویلپ ہوئی ہے۔۔۔ آزادی کے بعد بھی ہمارے گاؤں کے اندر، وشیش طور پہ، سینس آف انسکیورٹی سادھارن پریواروں میں، نرم پریواروں میں، غریب پریواروں میں ہے۔۔۔ لڑکے کو تو یوں مانتے ہیں کہ یہ اپنا گزارہ کسی نہ کسی طرح کر ہی لیگا، لیکن جیسے ہی لڑکی پیدا ہوتی ہے پریوار میں، تو پریوار، پورا پریوار ہی، ایک عجیب سی ٹینشن سے، عجیب سے منوویگیانک پریشار سے گزرنے لگتا ہے کہ اب اس کو کیسے پڑھانا ہے، پھر اس کی الٹمیٹلی کیسے شادی ہوگی۔۔۔ اور اس شادی کا جو پرشن ہے، جو بیس سال کی بات، پیدا ہونے سے پہلے ہی، بس یہ پتہ چل جائے کہ گربھ میں لڑکی ہے، بیس سال بعد کی جو ٹینشن ہے وہ اسی سمے ہمارے پریواروں میں آ جاتی ہے، کہ اس کی شادی میں اتنا خرچہ کہاں سے آئیگا۔۔۔ تو جو سادھارن پریوار ہیں، غریب پریوار ہیں، وہ یہ سمجھتے ہیں کہ اس سے اچّھا تو اس کی ہم صفائی کرا دیں، کنیا کو، اور وہ ڈاکٹر کے پاس جاتے ہیں۔۔۔ ڈاکٹروں کا جو نیٹورک ہے وہ ان کے کمپاؤنڈرس سے ان کی نرس اور جو ہمارے گاؤں میں دائیاں ہیں، جو کویکس ہیں، آر۔ ایم۔ پی۔ ڈاکٹر جن کو بولتے ہیں، ان کے مادھیم سے ایک جال پورے انڈیا میں پھیلا ہوا ہے۔۔۔ تو آپ کا پریوار میں کسی بہو کی یا کسی ساس کی یہ اچّھا ہو کے میں یہ چیک کراؤں کہ پیٹ میں لڑکا ہے یا لڑکی ہے، تو وہ اپنے نئربائی ڈاکٹر سے یا جو اس کی اے۔ این۔ ایم۔، نرس وغیرہ آتی رہتی ہے روٹین چیک۔ اپ کے لئے، ان سے بولتی ہے، کہ میں پتہ کرنا چاہتی ہوں کہ ہے کیا؟ کوتہل وش بھی پتہ کر لیتے ہیں۔۔۔ جہاں تک فرسٹ، پہلے بچّے کا سوال ہے، اس میں یہ بات اتنی مہتوہپورن نہیں ہوتی، لیکن جب کسی کو پہلے ایک لڑکی ہو جاتی ہے تو ضرور، ہنڈرڈ پرسینٹ اس میںِ ہمارے پریوار بھی میں کہونگا، ایسے ہیں، جو یوں چاہتے ہیں، کہ دو ہی بچّے پیدا کرنے ہیں، ایک لڑکا اور ایک لڑکی یہ پہلے کسی کو لڑکی ہوجاتی ہے تو دوسری وہ یہ جاہتا ہے کہ مجھے لڑکی نا ہو، میں چیک کرا لوں۔۔۔ اگر لڑکی ہے تو اس کی صفائی کرا لیں، پھر ٹرائی کریں، چیک کرائیں، لڑکا ہو تو اس کو پیدا ہونے دیں۔۔۔ تو جو دوسری لڑکی کی جو اکسیپٹبلٹی ہے، وہ بالکل ایک قسم سے سماپت ہو گئی ہے۔۔۔ اس میں چھوٹا پریوار بھی آ گیا اور رچیسٹ پریوار بھی آگئے۔۔۔ تو دوسری لڑکی یکی جو اکسیپٹبلٹی سماپت ہوئیوہ اس لئے کہ لوگوں کی مینٹیلٹی ہے میل اور فیمیل کے حساب سے، کہ بھئی لڑکا ہی جو ہے ہمارے پریوار کا نام روشن کریگا، لڑکے کا ہی ہمیں ملیگا، لڑکی کا تو ہم نا کچھ کھا سکتے نا لے سکتے۔۔۔ یہ تو دوسرے کے گھر چلی ہی جائیگی۔۔۔ اور اس کے ساتھ ساتھ سینس آف انسکیورٹی بھی ڈویلپ ہوتی رہتی ہے۔۔۔ اور اس پر جو انویسٹمینٹ ہے اس کو کوئی اور کیش کریگا، جہاں وہ شادی ہو کے جائیگی، کتنی بڑی افسر بن جائے۔۔۔ چاہیں وہ کتنے بھی بڑے مقاب پہ پہنچ جائے۔۔۔ اس کا تو گوترہ بھی وہ نہیں رہیگا۔۔۔ آج گویل خاندان میں ایک لڑکی پیدا ہو گئی اور اس کی شادی گرگ خاندان میں ہو گئی، تو اس کو تو گوترہ بھی گرگ ہو جاتا ہے یہاں پر تو۔۔۔ تو ہمارے پاس تو اس کا کچھ نہیں رہا۔۔۔ تو ہم اس پر انویسٹ نا کر کے لڑکے پہ انویسٹ کرنے میں زیادہ اپنا فائدہ سمجھتے ہیں۔۔۔ ہمارے ایک گہرے میں یہ ایک سوچ ہوتی ہے، اندر کھاتے۔۔۔ اور جو ساماجک برائی ہے، دہیج ہتیا، دہیج پرتھا کی، وہ بھی ایک بہت اچّھا خاصہ ہمارے اوپر برڈن ہوتا ہے۔۔۔ کیونکہ سماج میں دہیج پرتھا تو ہے ہی ہے، ساتھ میں ایک دکھاوے کی ہوڈ بھی ہے۔۔۔ سمپن پریواروں میں، خاص طور پر ویشیہ پریواروں میں، کہ بھئی کون اپنے، لڑکی کی شادی میں کتنے پیسے لگا رہا ہے۔۔۔ لڑکے کی جب شادی کی بات چلتی ہے تو پہلا سوال یہ بھی اٹھتا ہے بجٹ کیا ہے، خرچ کتنا کروا رہے ہو؟ اس میں ٹینٹ پر کتنا خرچ ہوگا، کارڈ کتنا۔۔۔ ایک کارڈ میں ابھی دکھا سکتا ہوں، آیا ہوا ہے ہمارے پاس کل، ہمارے ہی پریواروں سے، قریباً چار سو روپئیے کا خرچ ہے اس ایک کارڈ پہ۔۔۔ یعنی کہ اس شادی میں کارڈ کارڈ پر اتنا خرچ ہے جتنا، ایک جس میں، دس غریب بچّوں کی شادی ہو سکتی ہے۔۔۔ تو جو یہ، اس پرکار کے ریت رواج، اہنکار کے، اتنا وشتار ہمارا ہو گیا ہے، دوڑ اتنی بڑھ گئی ہے ہماری، اپنے آپ کو دکھانے کی، اپنی سمپنتا کو دکھانے کی، چاہیں وہ ہو یا نا ہو، لیکن دکھے ضرور۔۔۔ تو اس کی وجہ سے بھی ہمارے لوگوں میں سینس آف انفیریارٹی کامپلیکس بھی آ گیا ہے، کہ اتنے پیسے میں، ہم کہاں سے لائینگے لڑکی کی شادی کے لئے۔۔۔ اور یہ تو برڈن ہے، اس کو صفائی کراؤ۔۔۔ اور آدمی اس سمے جا کے اور وہ صفائی کرا لیتا ہے اور یہ اس کو پتا نہیں چلتا، بیچارے کو، گہرے میں اس کو اگر احساس ہو جائے، کہ یہ آپ نے اچّھا خاصہ مرڈر کر دیا ہے تو شاید اس چیز پہ جا کے کچھ لگام، اس کپرتھا پر لگائی جا سکتی ہے۔۔۔ تو ہم ابھیان چلا رہے ہیں، اس کے مادھیم سے لوگوں کو یہی آبھاس کرا رہے ہیں کہ آپ ایک دھرون کی صفائی نہیں کر رہے، آپ ایک اچّھے خاصے جیو کی ہتیا کر رہے ہیں اور یہ ایک اچّھا خاصہ مرڈر ہے۔۔۔ تو، اور اس کو آپ فیشن کے طعر پعر لے رہے ہیں۔۔۔ تو آپ اس پہ سوچیں، چنتن کریں، اس پہ روکیں۔۔۔

 

 

exercise (urdu): 

یہ جو ٹینشن ہے پریواروں میں، وہ کس وجہ سے ہے؟

1 لڑکی کو کیسے پڑھانا ہے

2 لڑکی کی شادے کیسے ہوگی

3 دہیج کہاں سے آئیگا

4 ان سب کی وجہ سے