UT wordmark
College of Liberal Arts wordmark

Comparing Unani and Allopathy

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Pulse

नब्ज़

Preference, choice

तरजीह

Medicines

दवाइयां

 

देसी

Herbs, plants

जड़ी-बूटियां

 

कुचला

 

जोहर

 

अहज राकी

 

ऐलोवेरी कुचला

Ayurvedic

आयुर्वेदिक

Use

इस्तेमाल

 

मर्ज

Cure, remedy, treatment

इलाज

 

हल्की मकदार में

 

तजुर्बा

 

यूनानी अपने फन के ऊपर जिंदा रही

Advantage, benefit, gain, profit, use

फायदा

 

कुछ ठंडे होते हैं

 

कुछ गरम होते हैं

 

ठंडे की उसमें गरम दवायें

 

इसरौल

Unani

यूनानी

 

ईजाद

Elephant became crazy

हाथी जो पागल हो जाते थे

 

भिगो के

Juice

रस

 

हब्बे दवा शिफा

 

हमवजन

 

मिर्सिया

Black pepper

काली मिर्च

 

असरौल

 

बराबर की मिरदार में

Use

इस्तेमाल

 

निसिया

 

तायदात

 

जुनून

 

यूनानी मान्यता

 

तुर्जमा

 

हत्ता

Series of English medications

अंग्रेजी दवाअों का जो सिलसिला है

Little, slightly

थोड़ा-थोड़ा

Slow

आहिस्ता

Becomes right

सही हो जाता है

 

फौरी तौर पर

Loss

नुकसान

 

अंजुबार

 

कब्ज

 

अांतों पे

 

मैदे पे

 

दिमाग़ पे

 

गुर्दे पे

Expertise

महारथ

 

मद्देनज़र

Root

जड़ से

Patient

मरीज

 

पथरी

Kidney

गुर्दे की

With herbs

जड़ी-बूटियों से

 

यूनान मुफत्तरे एहसास

 

कुलथी

 

याहूदी

 

संगे सहीमारी

 

एक रत्ती नहीं

Quite clean, clear

बिल्कुल साफ

 

तोड़ने की दवा

 

पेशाब लाने वाली दवा

 

रेज़ा-रेज़ा हो के

Hard work

मेहनत

One hundred percent

सौ फीसद

 

अर्से से तज़ुर्बात

transcription (hindi): 

तो ऐलौपैथी के कुछ चीजें आप इस्तेमाल करते हैं, जैसे बी.पी.हो गया, या स्टेटसस्कोप हो गया, इस तरह की चीजें करते हैं या सिर्फ नब्ज़ देख कर ही पता करते हैं?

नहीं, स्टेटसस्कोप लेते हैं तरजीह में, लेकिन दवाइयां यही देते हैं देसी... और अगर देखा जाये तो ये नाम अलग-अलग लोगों ने रख छोड़े हैं और दवाइयां ये ही सब जड़ी-बूटियां हैं... मसलन नक्सवोमिका है, कुचला, उसका जोहर निकला लिया, और जो है ऐलौपैथिक में... और हमारी अहज राकी नाम है जिसका, ऐलोवेरी कुचला, आयुर्वेदक वाले इस्तेमाल करते हैं... अच्छा, होम्योपैथी में जो है, उसमें भी जो है वो यही मर्ज से इलाज करते हैं, ये ही जड़ी-बूटियां जो हैं, इसका एक्सट्रैक्ट वगैरह लेते हैं, बहुत हल्की मकदार में उसे इस्तेमाल करते हैं... और अंदर अगर जो है रजिस्टैंट सिस्टम जो है, तो वो काम करता है... उसे जो है, परसूऐट जो है, उसे जो है एक्सलरेट करते हैं... और इस तरीके से जो है उसमें शिफा होती है... और ऐलौपैथिक में जो है एंटी उसका है, जैसे यूनानी में भी एंटी उसका जो है असर... और जो ये है, यूनानी जो है यूनान से आई अरबों में, अरबों ने जो है उसको, वहमिया जो वो थे, वो सब अलग किया, उसके बाद ये जो होते-होते जो है, ये जहां उनकी हुकूमतें थी वहां पे इसका ईलाज हुआ... और वो सब होके, वो लोग जब यहां हिन्दुस्तान में आये, तो यहां से इसका ईलाज आया है... और जहां असल थी, वहां, उनमें भी असल खत्म हो गई ईलाज... और यहां पर जो है तजुर्बा, अंग्रेज जो लोग आये, उन्होंने अपनी ऐलौपैथी चलाई, कोशिश की... तो यहां, नहीं, लेकिन ये यूनानी अपने फन के ऊपर जिंदा रही... जिसे फायदा हुआ वो आया, और जो है, तो इस तरीके से... तो ऐसे ही यूनानी में भी जो है एंटी उसके, ईलाज है, उसमें भी...

जी...

जैसे उसमें कुछ ठंडे होते हैं, कुछ गरम होते हैं, ठंडे की उसमें गरम दवायें, गरम की ठंडी दवायें... ऐसी बहुत सारी हैं हमारी, इसरौल है, ये, हमारी यूनानी उसमें, हकीम अजमल खां ने जो है इसका, इसकी ईजाद की थी... वो जब वहां पे गये, नार्थ में, वहां पर देखा हाथी जो पागल हो जाते थे, वो भिगो के इसका, रस पिलाते थे और वो फिर सही हो जाते थे... तो उन्होंने उससे जो है, ये निकाला, उसे हब्बे दवा शिफा बनाई इसमें... जिसमें ये है हमवजन, मिर्सिया, काली मिर्च जिसे कहते हैं, और अंग्रेजी में पीपर, और असरौल बराबर की मिरदार में ले के इसे इस्तेमाल किया... और ये जो है इस, इसका जो है निसिया, उसमें जो ज्यादा ब्लड प्रैशर हो जाता है उसके लिये किया... और जो ज्यादा तायदात में जुनून, मैनिया जिसे अंग्रेजी में कहते हैं, हमारी यूनानी मान्यता है, तो ये हुआ... असल जो है यूनानी ही थी, यूनानी का तुर्जमा जो है, उन्होंने, अंग्रेजों ने भी उसमें किया और हत्ता के बहुत से नाम तो उन्होंने, वो ही नाम हैं जो उस, उनके थे... फिर वहां से उन्होंने जो है अपनी ज़बान के अंदर किया और फिर तर्जुमा करके फिर उसमें तरक्की की... अब यहां पे तो आदमी पहले दूसरी ज़बान में सीखता है फिर सोचता है इतनी उम्र का हिस्सा जाहिल हो जाता है...

जी...

इस तरीके से जो है, लेकिन जो उनकी अपनी ज़बान है, जब उसमें हो गया, आगे बढ़ते रहे और जो पीछे आने वाले थे वो पीछे ही रहे...

तरक्की की अगर हम बात करें... आप, आप जो कह रहे हैं कि ऐलौपैथी जो है यूनानी...

ऐलौपैथी...

जो अंग्रेजी दवाओं का जो सिलसिला है...

तो उसमें जो है...

कितना रहा है, रिसर्च हो रही है?

उसमें जो है, उसकी वजह ये है कि हर चीज का जो है, ये जो है उन्होंने स्पेशलाईज़ेशन हरेक चीज में कर दिया है... इस वजह से... लेकिन उसमें जो है वो, क्या कहते हैं, उसका एक्सट्रैक्ट ले लेते हैं, जो ज्यादा काम करने वाला है एक्सट्रैक्ट, उसका वो ले लेते हैं, बाकी उसमें छोड़ देते हैं... उस एक्सट्रैक्ट के अंदर सब चीज शामिल होती है... उसमें एल्कलाईट जो होते हैं सारे, तो, लेकिन उसी के अंदर जो हम कोल्ड ड्रग्स करते हैं, तो उसमें जो उसके एल्कलाईड, जो पूरी ड्रग है, उसके अंदर, नैशनल ड्रग में उसका साईड इफैक्ट जो है, उसकी दवा छुपी होती है... थोड़ा-थोड़ा, आहिस्ता करता है लेकिन वो सही हो जाता है लेकिन उसमें जो है, वो फौरी तौर पर तो करता है लेकिन बाद में जो है, वो दूसरी चीजों में नुकसान करता है... मतलब एक दवा है, अंजुबार है, अंजुबार होती है, हम जो है फौरी उसको मद्देनज़र रखते हुये, जिसको कहते हैं, जिसका काम है कव्ज करना, तो आंतों पे ये असर करेगी, मैदे पे, दिमाग़ पे इसका क्या असर होगा, गुर्दे पे क्या, पूरी चीज वो नहीं है... अब यहां, लेकिन स्पेशलिस्ट में क्या होता है, वो ही चीज में वो कहते हैं, वैसे तो सब सीखते हैं, लेकिन एक ही चीज में महारथ हासिल कर लेते हैं, वो दूसरी चीज को वो मद्देनज़र नहीं रखते... फौरी फायदा देखते हैं, यहां पूरा जो है, जनरल बॉडी का रहता है, यूनानी के अंदर काम किया जाता है...

तो ये फर्क एक, एक बहुत बड़ा फर्क है कि आपकी दवाईयां जो हैं वो जड़ से ही चीजों को निकाल रही हैं...

जो नैचुरल है, इसमें आर्टिफिशियल का मुकाबला कर ही नहीं सकती वो... जो नेचर ने हमें दिया हुआ है वो...

अ, ये बतायें कि आपकी इतने सालों की प्रैक्टिस है, आप, किस्म-किस्म के मरीज आपके पास आते होंगे, कोई ऐसा दिलचस्प वाक्या, या वाक्या कोई...

हूं...

जो आपके जहन में हो, कि बहुत ही बुरी हालत में कोई आया हो और आपने उसे ठीक किया हो...

हूं...

और अब आपका वो शुक्रिया हर मौके पर अदा करता हो... ऐसा कुछ याद है?

हां...

कुछ याद पड़ता है?

एक ऐसा मरीज यहां पे था, मतलब उसको पथरी थी गुर्दे की थी, अच्छा सफदरजंग हॉस्पीटल में था... उन्होंने, उनमें बैड खाली नहीं थे, उन्होंने दो महीने का टाईम दिया था उसे... किडनी की पथरी थी, गुर्दे की... तो हमारे पास आया, चलो हम यहां देख लें उसको... हमने जो है जड़ी-बूटियों से उसका ईलाज किया... उसमें जो है पथरी तो होता है यूनान मुफत्तरे एहसास और उसके अंदर पुराने में कुलथी है और इस, ये जो याहूदी है, संगे सहीमारी है, इस किस्म की, इसका ईलाज किया... उसके बाद पंद्रह दिन में, पंद्रह-बीस दिन के अंदर, जब वो वहां पे दुबारा उन्होंने एक्सरे कराया तो डॉक्टरों ने मुझसे कहा कि बिल्कुल साफ हो चुकी थी पथरी...

एक रत्ती नहीं...

हैं... एक रत्ती नहीं, बिल्कुल साफ, उन्होंने तोड़ के निकाल के, पूरा ऑपरेशन, एक तरफ तोड़ने की दवा देते हैं, एक तरफ डायबटीक, पेशाब लाने वाली दवा... तो उससे जो है रेज़ा-रेज़ा हो के निकल जाती है... तो इसमें जितनी मेहनत ऐलौपैथी से ज्यादा यूनानी में की जायेगी, तो इसका रिजल्ट सौ फीसद होगा... और ये बहुत अर्से से तज़ुर्बात होती आई है...

translation (hindi): 

 

 

 

 

 

exercise (hindi): 

एलोपैथी और यूनानी दवाओं के नाम अलग होते हैं पर हकीमों का मानना है कि वो एक ही जड़ी बूटियों से बनाई जाती हैं। नीचे दी गई दवायें कौन सी ऐसी हैं?

1 नक्सवोमिका

2 अहज राकी

3 सभी

4 इसरौल

अंग्रेज़ी दवाओं में हर चीज़ों में स्पेशलाईज़ेशन करने से क्या हो गया है?

1 मर्ज़ जड़ से ठीक हो जाता है

2 दवाओं के साइडइफ़ैक्ट नहीं होते।

3 दूसरी चीज़ों को वो मद्देनज़र नहीं रखते।

4 सब बीमारियों को पहचान लेते हैं|

पथरी के इलाज में “एक रत्ती नहीं” का इस्तेमाल किया गया है। इसका क्या मतलब है?

1 थोड़ा सा रह जाना

2 बहुत रह जाना

3 बिल्कुल साफ़ हो जाना

4 पूरा रह जाना

vocabulary (urdu): 

Pulse

نبض

Preference, choice

ترجیح

Medicines

دوائیاں

Native

دیسی

Herbs, plants

جڑی بوٹیاں

 

کچلا

 

جوہر

Dog's bane

ازراقی

   

Ayurvedic

آیرویدک

Use

استعمال

Ailment

مرض

Cure, remedy, treatment

علاج

In a low dosage

ہلکی مقدار میں

Experience

تجربہ

Unani thrived on its own art

یونانی اپنے فن کے اوپر زندہ رہی

Advantage, benefit, gain, profit, use

فائدہ

Some are cold

کچھ ٹھنڈے ہوتے ہیں

Some are hot

کچھ گرم ہوتے ہیں

 

ٹھنڈے کی اس میں گرم دوائیاں

 

اسرول

Unani

یونانی

Invent

ایجاد

The elephant that became crazy

ہاتھی جو پاگل ہو جاتے تھے

After wetting it

بھگو کے

Juice

رس

 

حبّ دوا شفی

 

ہموزن

 

مرسیا

Black pepper

کالی مرچ

 

اسرول

In equal quantities

برابر کی مقدار میں

Use

استعمال

 

نسیا

Quantity

تعداد

Madness, insanity

جنون

 

یونانی مانیتا

Translation

ترجمہ

Until

حتّی

Series of English medications

انگریزی دواؤں کا جو سلسلہ ہے

Little, slightly

تھوڑا تھوڑا

Slow

آہستہ

Becomes right/better

صحیح ہو جاتا ہے

Immediately

فوری طور پر

Loss

نقصان

 

انجبار

Constipation

قبض

 

آنتوں پہ

 

میدے پہ

On the mind

دماغ پہ

 

گردے پہ

Expertise

مہارت

 

مدّ نظر

Root

جڑ سے

Patient

مریض

 

پتھری

Kidney

گردے کی

With herbs

جڑی بوٹیوں سے

 

یونان مفتر احساس

 

کلتھی

 

ہاہودی

 

سنگِ سرِ  ماری

 

ایک رتّی نہیں

Quite clean, clear

بالکل صاف

 

توڑنے کی دوا

Medicine that facilitates urination

پیشاب لانے والی دوا

 

ریزہ ریزہ ہو کے

Hard work

محنت

One hundred percent

سو فیصد

Experience [that comes] with age

عمر سے تجربات

transcription (urdu): 

تو ایلوپیتھی کے کچھ چیزیں آپ استعمال کرتے ہیں، جیسے بی۔ پی۔ ہو گیا، یا اسٹیتھوسکوپ ہو گیا، اس طرح کی چیزیں کرتے ہیں یا صرف نبض دیکھ کر ہی پتہ کرتے ہیں؟

 

نہیں، اسٹیتھوسکوپ لیتے ہیں ترجیح میں، لیکن دوائیاں یہی دیتے ہیں دیسی۔۔۔ اور اگر دیکھا جائے تو یہ سب نام الگ الگ لوگوں نے رکھ چھوڑےے ہیں اور دوائیاں یہ ہی سب جڑی بوٹی ہے۔۔۔ مثلاً نکسوامکا ہے، کچلا، اس کا جوہر نکال لیا، اور جو ہے ایلوپیتھک میں۔۔۔ اور ہمارے یہاں ازراقی نام ہے اس کا، ایورویدہ میں کچلا، آیرویدک والے استعمال کرتے ہیں۔۔۔ اچّھا، ہم ہومیوپیتھی کے علم میں جو ہے، اس میں بھی یہ وہ اس مرض سے علاج کرتے ہیں، یہ ہی دوائیاں، جڑی بوٹیاں ہوتی ہیں، اس کا اکسٹریکٹ جو ۔۔۔۔۔ وغیرہ میں لیتے ہیں، بہت ہلکی مقدار میں اسے استعمال کرتے ہیں۔۔۔ اور اندر اگر جو ہے رزسٹینس سسٹم جو ہے، تو وہ کام کرتا ہے۔۔۔ اسے جو ہے، پرسوئیڈ اسے جو ہے، اسے جو ہے اکسیلریٹ کرتے ہیں۔۔۔ اور اس طریقے سے جو ہے اس میں شفی ہوتی ہے۔۔۔ اور ایلوپیتھک میں جو ہے اینٹی اس کا ہے، ایسے یونانی میں بھی اینٹی اس کا ہے علاج۔۔۔ اور جو اصل جو ہے، یہ یونانی جو ہے یونان سے آئی عربوں میں، عربوں نے اسے جو ہے ان کے جو، اہمیا  تو وہ جو تھے، وہ سب الگ کیا، اس کے بعد یہ ہوتے ہوتے جو ہے، یہ جہاں ان کی حکومتیں تھیں وہاں پہ اس کا علاج ہوا۔۔۔ اور وہ سب ہو کے، یہاں پہ جب ہندوستان میں وہ لوگ آئے، تو یہاں سے اس کا علاج رائج ہو گیا۔۔۔ اور جہاں وہ جو اصل تھی، ان میں بھی اصل ختم ہو گیا علاج۔۔۔ اور یہاں پہ جو تجربہ، انگریز جو لوگ آئے، انہوں نے اپنی ایلوپیتھی چلائی، کوشش کی۔۔۔ تو یہاں، نہیں، جو ہے، لیکن یہ یونانی اپنے فن کے اوپر زندہ رہی۔۔۔ جسے فائدہ ہوا وہ آیا، اور جو ہے، اس طریقے سے۔۔۔ تو ایسے یونانی میں بھی جو ہے انٹی اس کے، ضدّ علاج ہیں، بھئی، ضدّ ہے اس میں بھی۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

جیسے جو مرض کچھ ٹھنڈے ہوتے ہیں، کچھ گرم ہوتے ہیں، ٹھنڈے کی اس میں گرم دوائیں ہیں، گرم کی ٹھنڈی دوائیں۔۔۔ ایسی ہی بہت ساری ہیں ہماری، اسرول ہے، یہ، ہماری یونانی اس میں، حکیم اجل خان نے جو ہے اس کا، اس کی ایجاد کی تھی۔۔۔ وہ جب وہاں ہپ گئے، نارتھ میں، وہاں پر دیکھا ہاتھی جو پاگل ہو جاتے تھے تو انہیں اس میں بھگو کے اس کا، رس پلاتے تھے اور وہ پھر صحیح ہو جاتے تھے۔۔۔ تو انہوں نے اس سے جو ہے، یہ نکالا، اسے حبّ دوا شفی بنائی اس میں۔۔۔ جس میں یہ ہے بہموزن، مرسیا، کالی مرچ جسے کہتے ہیں اور انگریزی میں پیپر، اور اسرول برابر کی مقدار میں لے کے اسے استعمال کیا۔۔۔ اور یہ جو ہے اس، اس کا جو ہے نسیا، اس میں جو زیادہ بلڈ پریشر ہو جاتا ہے اس کے لئے کیا۔۔۔ اور جو زیادہ تعداد میں جنون، مینیا جسے انگریزی میں کہتے ہیں، ہماری یونانی مانییا ہے، تو یہ ہوا۔۔۔ اصل جو ہے یونانی ہی تھی، یونانی ہی کا ترجمہ جو ہے، انہوں نے، انگریزوں نے بھی اس میں کیا اور حتّی کہ بہت سے نام تو انہوں نے، وہ ہی نام ہیں جو اس، ان کے تھے۔۔۔ پھر وہاں سے انہوں نے جو ہے اپنی زبان کے اندر کیا اور پھر ترجمہ کر کے پھر اس میں، جو ہے، ترقّّی کی۔۔۔ اب یہاں پہ تو آدمی دوسری زبان میں جو آدمی پہلے سیکھتا ہے پھر ہوتا ہے اتنی عمر کا حصّہ غائب ہو جاتا ہے۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

اس طریقے سے جو ہے، لیکن جو ان کی اپنی زبان ہے، جب اس میں ہو گیا، آگے بڑھتے رہے اور جو پیچھے آنے والے تھے وہ پیچھے ہی رہے۔۔۔

 

ترقّی کی اگر ہم بات کریں۔۔۔ تو آپ، آپ جو کہ رہے ہیں کہ ایلوپیتھی جو ہی یونانی۔۔۔

 

ایلوپیتھی۔۔۔

 

جو انگریزی دواؤں کا جو سلسلہ ہے۔۔۔

 

تو اس میں جو ہے۔۔۔

 

کتنا رہا ہے، ریسرچ ہو رہی ہے؟

 

اس میں جو ہے، اس کی وجہ یہ ہے کہ ہر چیز کا جو ہے، یہ جو ہے انہوں نے اسپیشلائزیشن ہر ایک میں کر دیا ہے۔۔۔ اس وجہ سے۔۔۔ لیکن اس میں جو ہے وہ، کیا کہتے ہیں، اس کا اکسٹریکٹ لے لیتے ہیں، جو زیادہ کام کرنے والا ہے اکسٹریکٹ، اس کا وہ لے لیتے ہیں، باقی اس میں چھوڑ دیتے ہیں۔۔۔ کروڈ ڈرگز کے اندر سب چیز شامل ہوتی ہے۔۔۔ اس میں ایلکلائٹ جو ہوتے ہیں سارے، تو لیکن اسی کے اندر جو ہم کروڈ ڈرگز کرتے ہیں، تو اس میں جو اس کے الکلائٹ، جو پوری ڈرگ ہے، اس کے اند، نیچرل ڈرگ میں اس کا سائڈ افیکٹ جو ہے، اس کی دوا چھپی ہوتی ہے۔۔۔ تھوڑا تھوڑا، آہستہ کرتا ہے لیکن وہ صحیح ہو جاتا ہے لیکن اس میں جو ہے، وہ فوری طور پہ تو کرتا ہے لیکن بعد میں جو دوسری چیزوں میں وہ نقصان کرتا ہے۔۔۔ مثلاً ایک دوا ہے، انجبار ہے، انجبار ہوتی ہے، ہم جو ہے تو پوری اس کو مد نطر رکھتے ہوئے، جس کو کہتے ہیں، جس کا کام ہے قبض کرنا، تو آنتوں پہ یہ اثر کریگی، میدے پہ، دماغ پہ اس کیا اثر ہوگا، گردے پہ کیا، پوری چیز وہ نہیں ہے۔۔۔ اب یہاں، لیکن اسپیشلسٹ میں کیا ہوتا ہے، وہ ہی چیز میں وہ کہتے ہیں، ویسے تو سب سیکھتے ہیں، لیکن ایک ہی چیز میں مہارت حاصل کر لیتے ہیں، وہ دوسری چیز کو وہ مدّ نظر ہی رکھتے ہیں۔۔۔ فوری فائدہ دیکھتے ہیں، یہاں پورا جو ہے، جنرل باڈی کا رہتا ہے، یونانی کے اندر کام کیا جاتا ہے۔۔۔

 

تو یہ۔۔ یہ فرق ایک، ایک بہت بڑا فرق ہے کہ آپ کی دوائیاں جو ہیں وہ جڑ سے ہی چیزوں کو نکال رہی ہیں۔۔۔ 

 

ہاں، ہاں، ہاں، جو نیچرل ہے، اس میں آرٹفشیل کا مقابلہ کر ہی نہیں سکتے ہیں وہ۔۔۔ جو نیچر نے ہمیں دیا ہوا ہے وہ۔۔۔

 

یہ بتائیں کہ آپ کی اتنے سالوں کی پریکٹس ہے، آپ، قسم قسم کے مریض آپ کے پاس آتے ہونگے، کوئی ایسا دلچسپ واقعہ، یا واقعہ کوئی۔۔۔

 

ہوں۔۔۔

 

جو آپ کے ذہن میں ہو، کہ بہت ہی بری حالت میں کوئی آیا ہو اور آپ نے اسے ٹھیک کیا ہو۔۔۔

 

ہوں۔۔۔

 

اور اب آپ کا وہ شکریہ ہر موقعے پر ادا کرتا ہو۔۔۔ ایسا کچھ یاد پڑتا ہے؟ ہے؟

 

ہاں۔۔۔

 

کچھ یاد پڑتا ہے؟

 

ایک ایسا مریض یہاں پہ تھا، مطلب اس کو پتھری تھی گرد کی تھی، اچّھا سفدرجنگ ہاسپٹل میں تھا۔۔۔ انہوں نے ان میں بیڈ خالی نہیں تھے، انہوں نے دو مہینے کا ٹائم دیا تھا اسے۔۔۔ کڈنی کی پتھری تھی، گرد کی۔۔۔ تو ہمارے پاس آیا، چلو ہم یہاں دیکھ لیں اس کو۔۔۔ ہم نے جو ہے جڑی بوٹیوں سے اس کا علاج کیا۔۔۔ اس میں جو ہے پتھری تو ہوتا ہے یونان مپھترے احساس اور اس کے اندر پرانے میں کلتھی ہے اور اس، یہ جو یاہودی ہے، سنگِ سرِ ماہی ہے، اس قسم کی، اس کا علاج کیا۔۔۔ اس کے بعد پندرہ دن میں، پندرہ بیس دن کے اندر، جب وہ وہاں پہ دوبارہ انہوں نے ایکس۔ رے کرایا تو ڈاکٹروں نے مجھ  سے کہا کہ بالکل صاف ہو چکی تھی پتھری۔۔۔

 

ایک رتّی نہیں؟۔۔۔

 

ہاں؟

 

ایک۔۔

 

ایک، بالکل نہیں،  بالکل صاف ہو گئی تھی، انہوں نے توڑ کے نکال کے، پورا آپریشن، ایک طرف توڑنے کی دوا دیتے ہیں، ایک طرف ڈائبیٹک، پیشاب لانے والی دوا۔۔۔ تو اس سے جو ہے ریزہ ریزہ ہو کے نکل جاتی ہے۔۔۔ تو اصل میں جتنی محنت اس پہ ایلوپیتھی سے زیادہ یوانانی میں کی جائیگی، تو اس کا رزلٹ سو فیصد ہوگا۔۔۔ اور یہ بہت عرصے سے تجربات ہوتی آئی ہیں۔۔۔

 

 

exercise (urdu): 

حکیم صاحب آخر میں کس قسم کے مریض کا ذکر کرتے ہیں؟

1 قبض کے مریض

2 شوگر کے مریض

3 پتھری کے مریض

4 پیلیا کے مریض