UT wordmark
College of Liberal Arts wordmark

Comparing Unani and Ayurveda

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Unani

यूनानी

Ayurvedic

आयुर्वेदिक

 

एक ही मां के दो बच्चे

Air

वात

Nature

प्रकृति

Disease, illness

बीमारी

 

पित

Phlegm

कफ

 

सौदा, सफरा, दम अौर बलगम

Deal, transaction

सौदा

Black part

काला पार्ट

 

दम

Meat

माँस

Blood

खून

Phlegm

बलगम

Cold natured man

ठंड नेचर का आदमी

 

सौदावी नेचर

Warm natured man

गरम नेचर का आदमी

Man's mood

आदमी का मिजाज़

Diet

परहेज़

Eats everything

सभी कुछ खाते हैं

Two sides of the same coin

एक ही सिक्के के दो रूख

Meaning

मतलब

Example

मिसाल

 

पंचकर्मा

 

पंचकर्म

 

ईलाल बिल तब्दीर

Almost, approximately

तकरीबन

 

दलक

 

दलक ए मसक्कीन

 

दलक मुसव्वी

Rigorous massage

सखत मसाज

Mild massage, tender massage

मुलायम मसाज

Common language

आम ज़ुबान

 

नेती क्रिया

 

शुरोधारा

 

स्नेह सेदन

 

नश्तर लगाना

 

गंदी रतूबात

Fire

आग

 

दीया

 

पैरों में सुन्नपन

 

जोक लगाना

Existence

वजूद

 

नचा के

Especially

खासतौर से

Mental

दिमाग़ी

Service

खिदमत

transcription (hindi): 

ऐसा है, यूनानी का कन्सैप्ट और आयुर्वेद का कन्सैप्ट, एक ही मां के दो बच्चे हैं... वात, जो हम लोग देखते हैं प्रकृति या टैम्परामैंट, वहीं यूनानी में भी देखा जाता है... क्योंकि जो भी हम लोग बीमारी देखते हैं, जैसे हम लोग वात को मानते हैं, वात को अगर हम बेसिकली एक्सप्लेन करें, तो नर्वस सिस्टम एक तरह से आ गया... ऐसे ही पित है, पित आ गया आपका पूरा डाईजैस्टिव सिस्टम... और कफ आ गया आपका पूरा लैफेटिक सिस्टम... तो ये तीनों, मतलब, बॉडी, ह्यूमन बॉडी तो वही है, आप उसको यूनानी ट्रीटमेंट दीजिये, आप आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट दीजिये या ऐलोपैथिक दीजिये, कुछ भी दीजिये, ह्यूमन एनाटमी, फिजियोलॉजी वही रहेगी... वो चेंज नहीं है... वो हजारों साल से वही की वही है... लेकिन जैसे हम लोग पढ़ते हैं, पढ़ने के हिसाब से अलग-अलग जो गुरू हुये हैं, उन्होंने अपने हिसाब से अलग-अलग कन्सैप्ट दे दिये हैं जिससे आयुर्वेद और यूनानी का जन्म हुआ है... और जहां तक बात है वात, पित, कफ की, मैंने आपको बिल्कुल इनशॉर्ट, बिल्कुल एक लेमैन लैंग्वेज में बता दिया कि ये-ये हैं... तो यूनानी में भी यही सब कन्सैप्ट है कोई अलग नहीं है... मतलब हम इसको बॉयफरकेट करके क्यूं चलें, मुझको तो बेसिकली ये समझ में भी नहीं आता, के हम इसे बॉयफेरकेट क्यूं करें... हम क्यूं नहीं बिल्कुल एक इकट्ठे होकर के चलें तो शायद हम लोग ज्यादा पावरफुल हो जायें... और जैसे हम लोग ट्रीटमेंट देते हैं, ऐसा नहीं है कि अगर मैं इन्फर्टेलिटी का ट्रीटमेंट दे रही हूं तो सिर्फ आयुर्वेद को पकड़ के बैठ गई, कि मेरे को सिर्फ आयुर्वेदिक ड्रग्स ही देनी है... डॉक्टर साहब से भी कन्सल्ट करती हूं कि ये पेशैंट है, इसमें हमें किस तरह से फॉलो करना है... तो वो मिक्सचर होता है, यूनानी और आयुर्वेद का भी मिक्सचर होता है... ऐसा नहीं है कि हम लोग बिल्कुल एक, मतलब, बहुत रिजिड्ली किसी भी स्ट्रीम को फॉलो करें... हम लोग अपनी क्रॉस प्रैक्टिस भी करते हैं... मतलब डॉक्टर साहब भी कई बारी हैल्प ले लेते हैं कि भई सीमा इसमें हम क्या चीज दें कि इसमें पेशैंट को ज्यादा फायदा हो जाये... तो ये मेरे हिसाब से तो दोनों चीजें अलग हैं ही नहीं... और बेसिक कॉन्सैप्ट, वो मैंने बता ही दिया आपको... ये सीमा ने बहुत कुछ कह दिया... बेसिकली इन्होंने वात, पित और कफ को लिया है, हमारे सौदा, सफरा, दम और बलगम... बेसिकली ह्यूमन से रिलेटिड चारों पार्ट हैं, और हम सफरा भी डिसीज़ को थोड़ा अलग करते हैं... सफरा क्या है? सौदा क्या है? सौदा बेसिकली, टैम्परामैंट के चार पार्ट हमने लिये हैं... टैम्परामैंट, मतलब बॉडी का टैम्परेचर, बॉडी में क्या है, हमारा उसमें, सौदा वो, जो काला पार्ट है... बाईल पार्ट... जितना बाईल पिग्मैंटेशन है वो सौदा भी हैं... ऐसे ही सफरा, यानि यैल्लो, जिसमें लिम्स पार्ट आता है हमारा... फिर दम, दम मीन्स, जिसमें रैड पार्ट आता है हमारा... जिसमें माँस और खून दम पार्ट में आ गये... बलगम, बलगम मीन्स, इसे हम आयुर्वेद से इसलिये थोड़ा सा अलग करते हैं कि बलगम एक डिसीज़ड पार्ट हो गया बॉडी का... इसे, जब हम थ्योरी पढ़ते हैं, तो बलगमी, मीन्स, वो ठंडी नेचर का आदमी है... और सौदावी नेचर का है तो उसे हम एक गरम नेचर का आदमी मानेंगे... सौदावी नेचर के आदमी में कैंसर के चांसिज़ ज्यादा हैं... बलगमी नेचर के आदमियों में टी.बी. के चांसिज़ ज्यादा हैं... इससे हम, डायग्नोसिज़ में आसानी होती है... और उसी थ्योरी को मानते हुये, बॉडी का टैम्परामैंट देखते हुये, आदमी का मिजाज़ देखते हुये, यूनानी ट्रीटमेंट में मिजाज़ बहुत बड़ा रोल अदा करता है... और मिजाज़ के साथ-साथ हम लोग बाद में, के परहेज़ कराते हैं, जबकि मार्डन सिस्टम में परहेज नाम की कोई चीज ही नहीं है... सभी कुछ खाते हैं... हमारे यहां, जब हम यूनानी ईलाज चलाते हैं तो बहुत सारी चीजों का एकदम परहेज उन्हें, के भई ये स्टॉप कर दो, ये नहीं खायेंगे आप, यही खायेंगे... यही आयुर्वेद में भी है... आयुर्वेद में भी है... बिल्कुल... तो एक ही पहलू के, एक ही सिक्के के दो रूख हैं... क्योंकि यूनानी यूनान से आई, ग्रीक से आई, इंडिया में आ के इंडियन होकर रह गई है... आज ग्रीक में कोई यूनानी को नहीं जानता... ये उनका दुर्भाग्य है हमारा नहीं, के आज उनकी पैथी को हम लोग यहां ज़िंदा रखे हुये हैं... और आयुर्वेद तो बेसिकली ओरिज़न ही इंडिया का है... और दुनिया में जितने भी ट्रीटमेंट चल रहे हैं सब आयुर्वेद-यूनानी की ही ओरिज़न हैं... ये जो मार्डन सिस्टम है, ये, या जो होम्योपैथिक सिस्टम भी है, वो ओरीज़न जो है, वो आयुर्वेद और यूनानी ही हैं हम... मतलब ये... आपको एक मिसाल देता हूं... आजकल पंचकर्मा का बहुत जोर-शोर है... बहुत ज्यादा, पंचकर्मा का... एक... काट देना... क्या हुआ... टेक... टेक... टेक... एक मिनट बैटरी... रोलिंग... अब जैसे आप पंचकर्मा को ही ले लीजिये... पंचकर्म का आज की डेट में हॉटैस्ट टॉपिक है इंडिया में... और एब्रॉड में भी आजकल बहुत पंचकर्मा की ब्रांचिस खुल रही हैं... अगर मेरा कोई साथ दे ना, तो आई हैव ए वैरी इंटैलीजैंट आईडिया एबाउट दिस... कोई फाइनैंसर अगर मुझे मिले तो मैं एक ऐसी यूनिट लगाऊं, जिसमें हम कम्पलीटली स्ट्रैस ट्रीटमेंट को, पैरालीसिज ट्रीटमेंट को, और जितने पंचकर्म हैं, पंचकर्म को यूनानी में दूसरे तरीके से लिया गया है... यूनानी में इसे 'ईलाज बिल तब्दीर' के नाम से रिमार्क किया गया है और ये तकरीबन तीन हजार साल से हमारी पैथी में चला आ रहा है... ईलाज बिल तब्दीर में क्या है के दलक, दलक मीन्स मसाज, पंचकर्मा मीन्स मसाज... दलक तीन तरह की मसाज़िस बताई हैं, दलक ए मसक्कीन, दलक मुसव्वी, मतलब एक सखत मसाज, मुलायम मसाज, ये एक आम ज़ुबान में बोल लो... इसी तरह पंचकर्म में भी पांचकर्म बताये हैं, जिसमें एनीमा लगाना, नेती क्रिया करना, शुरोधारा और उसे क्या बोलते हैं... स्नेह... स्नेह सेदन... हां, ये पांच कर्म होते हैं पंचकर्मा में... हमारी पैथी में पांच कर्मों में बांधा नहीं गया है इसे... हमारी पैथी में इसे और ब्रॉड कर दिया गया है... जैसे नश्तर लगाना, कपलिंग, आजकल आप तिबिया कॉलेज, करौल बाग जाईये, कपलिंग का एक, चाईनापैथी वाले दिखाते हैं, के वो प्रैशर कप लगाते हैं और कप लगा के छोड़ देते हैं, पांच-सात मिनट बाद वो थोड़ा सा स्वैल्ड, वाटरी, पानी, स्किन के थोड़े-थोड़े बबल, पानी के बाहर आ जाते हैं, जिन्हें नीडल से तोड़ देते हैं... तो कपलिंग में अंदर का, जो गंदी रतूबात हैं, उन्हें निकालने का प्रोसीज़र है... यूनानी पैथी में कपलिंग कैसे किया करते थे, एक पॉट लिया, पॉट के अंदर आग जलाई, आग जला के बॉडी पे रख दिया, जिस पार्ट का हमने गंदी रतूबात को खींचना होता था, और उस पॉट को यहां प्रैशर से रख दिया... जब तक उसमें ऑक्सीजन होती थी, वो जलती रहती थी, जब अंदर की सारी ऑक्सीजन खत्म हो जाती थी तो दीया या जो अंदर हम आग रखते थे वो बुझ जाती थी... और तो बुझने के बाद, क्योंके ऑक्सीजन अंदर खत्म हो गई, तो प्रैशर बना देती थी, और उस प्रैशर में, बाद में हम उसे पांच, दस, पंद्रह मिनट लगा के, बाद में उसे हटाते थे, उसे प्रैशर को, रिलीज करके प्रैशर और स्किन में से वो ही, जो आज हम मार्डन सिस्टम से कर रहे हैं, अब तो कपलिंग के इन्सट्रूमैंट आ गये हैं, कपलिंग का है, ऐसे ही न्यूरो के, जैसे सरवाईकल पेन के लोग हैं, या जिन्हें स्पॉन्डीलिसिज़ है बेसिकली, चाहें वो सरवाईकल है, लम्बोरेसिक है, लंबर है, या कोई नर्वस कम्प्रैस हो गया है, जिनमें पैरों में सुन्नपन आने लगता है, कपलिंग का बड़ा अच्छा रिज़ल्ट है... नश्तर लगाना, जोक लगाना, ये सब, ये एल्टरनेटिव सिस्टम ही है जो यूनानी में ईलाज बिल तब्दीर के नाम से आज अपना वजूद रखते हैं... आयुर्वेद में यही पंचकर्म के नाम से मौजूद है...अगर इन दोनों को मिला दिया जाये, एक सिस्टम नया डवलप किया जाये, जिसमें स्ट्रेरस ट्रीटमेंट के लिये डांस थैरेपी है, ऐरोमा थैरेपी है, ये सभी यूनानी के पार्ट हैं... (खांसी) (सॉरी) डांस थैरेपी... तीन हजार साल पहले भी लोग डांस कराके, नचा के, म्यूजिक पे, जो उनके अपने म्यूजिक थे, लोगों के स्ट्रैस को दूर किया करते थे... खासतौर से जो दिमाग़ी काम करने वाले, राजा-महाराजा हुआ करते थे, जो उनके मंत्रीगण हुआ करते थे, उन लोगों के लिये महफिलें सजा करती थी, उसमें तानसेन जैसे गुरू हुआ करते थे... जो म्यूज़िक बजाते थे, राजाओं के दिमाग को शांत करते थे, जिससे वो और अच्छा सोच सकें... आज की डेट में इतना स्ट्रेस है पब्लिक पे, अगर हम इसी एक आईडिया को अगर एक प्लेटफार्म पर लाकर बात करें, तो हम दुनिया को एक नई ईलाज की एक राह दिखा सकते हैं... ईलाज बिल तब्दीर और पंचकर्मा को अगर हम मिला दें, एक तो मेरे जैसे मिडिल क्लास आदमी के पास इतना बजट पॉसीबल नहीं है, अगर काद्गा हमें बजट मिले, हमें स्पेस मिले और इन्स्ट्रूमैंट लगाने के लिये हमें फाइनैंस मिले तो हम बहुत सारे लोगों की खिदमत कर सकते हैं उससे... बहुत, बल्कि मैं तो चाहूंगा कि हमारी गौरमैंट भी इस पैथी को, इस सिस्टम को मिलाके बात करे और ऐसे, ऐसे, स्पेस हमें दे या स्पेस बनाये और हम जैसे लोगों के आईडिया ले के और इस पैथी को अगर डवलप करे तो एक नया ही सिस्टम डवलप हो सकता है इलाज का... जैसे चाईना में आज एक्यूप्रैशर, एक्यूपंचर चल रहा है, वो तो कुछ भी नहीं है... ये तो एक लेस मात्र है, यूनानी का एक पार्ट, जिसे हम एक्यूप्रैशर, एक्यूपंचर के नाम से जानते हैं... अगर ईलाज बिल तब्दीर को देख लिया जाये तो हम लोग इससे कई गुना आगे हैं... मैग्नेट थैरेपी, मैग्नेट थैरेपी आज कहते हैं... मैग्नेट थैरेपी के रिकार्ड जो मिलते हैं वो तकरीबन चार हजार साल पुरानी किताबों में मिलते हैं... एक्यूप्रैशर, एक्यूपंचर ये कहते हैं चाईना वाले हमारी पद्धति है, मैं दावे के साथ इस बात के प्रूफ दे सकता हूं के ये यूनानी का एक पार्ट है... लेकिन बस ये ही है, रिसर्च की कमी, संसाधनों की कमी बेसिकली... नॉट रिसर्च, संसाधन होंगे तो नैचुरल है डवलपमैंट तो अपनेआप होगा... रिसर्च तो अपने आप निकलेगी...

translation (hindi): 

 

exercise (hindi): 

हज़ारों साल से क्या नहीं बदला?

1 आयुर्वेद की दवाएँ

2 युनानी दवाएँ

3 ह्यूमन फ़िज़ियोलोजी

4 एलोपैथिक दवाएँ

डॉ० का क्या मानना है?

1 सबको अलग-अलग ट्रीटमैंट दिया जाना चाहिये

2 केवल युनानी ट्री्टमैंट दिया जाना चाहिये

3 इकट्ठे हो कर काम करना चाहिये

4 केवल आयुर्वेद का इलाज होना चाहिये

युनानी ट्रीटमैंट में क्या सबसे ज़रूरी है?

1 मिज़ाज़

2 परहे्ज़

3 सभी

4 बॉडी का टैमप्रेचर

vocabulary (urdu): 

Unani

یونانی

Ayurvedic

آیورویدک

 

ایک ہی ماں کے دو بچّے

Air

وات

Nature

پرکرت

Disease, illness

بیماری

 

پت

Phlegm

کف

 

دوسا، صفرا، دم، اور بلغم

Deal, transaction

سودا

Black part

کالا پارٹ

 

دم

Meat

سانس

Blood

خون

Phlegm

بلغم

Cold natured man

ٹھنڈ نیچر کا آدمی

 

سوداوی نیچر

Warm natured man

گرم نیچر کا آدمی

Man's mood

آدمی کا مزاج

Diet

پرہیز

Eats everything

سبھی کچھ کھاتے ہیں

Two sides of the same coin

ایک ہی سکّے کے دو رخ

Meaning

مطلب

Example

مثال

 

پنچکمرا

 

پنچکرم

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

transcription (urdu): 

ایسا ہے، یونانی کا کانسیپٹ اور آیوروید کا کانسیپٹ، ایک ہی ماں کے دو بچّے ہیں۔۔۔ وات، جو ہم لوگ دیکھتے ہیں پرکرت یا ٹیمپرمینٹ، وہیں یونانی میں بھی دیکھا جاتا ہے۔۔۔ کیونکہ جو بھی ہم لوگ بیماری دیکھتے ہیں، جیسے ہم لوگ وات کو مانتے ہیں، وات کو اگر ہم بیسکلی اکسپلین کریں، تو نروس سسٹم ایک طرح سے آی گیا۔۔۔ ایسے ہی پت ہے، پت آ گیا آپ کا پورا ڈائجیسٹو سسٹم۔۔۔ اور کف آ گیا آپ کا پورا لمفیٹک سسٹم۔۔۔ تو یہ تینوں، مطلب، باڈی، ہیومن باڈی تو وہی ہے، آپ اس کو یونانی ٹریٹمینٹ دیجئیے، آپ آیورویدک ٹریٹمینٹ دیجئیے یا ایلوپیتھک دیجئیے، کچھ بھی دیجئیے، ہیومن اینیٹمی، فزیالجی وہی رہیگی۔۔۔ وہ چینج نہیں ہے۔۔۔ وہ ہزاروں سال سے وہی کی وہی ہے۔۔۔ لیکن جیسے ہم لوگ پڑھتے ہیں، پڑھنے کے حساب سے الگ الگ جو گرو ہوئے ہیں، انہوں نے اپنے حساب سے الگ الگ کانسیپٹ دے دئے ہیں جس سے آیوروید اور یونانی کا جنم ہوا ہے۔۔۔ اور جہاں تک بات ہے وات، پت، کف کی، میں نے آپ کو بلکل ان شارٹ، بالکل ایک لے مین لینگؤیج میں بتا دیا کہ یہ یہ ہیں۔۔۔ تو یونانی میں بھی یہی سب کانسیپٹ ہیں کوئی الگ نہیں ہیں۔۔۔ مطلب ہم اس کو بائفرکیٹ کر کے کیوں چلیں، مجھے کو تو بیسکلی یہ سمجھ میں بھی نہیں آتا، کہ ہم اسے بائفرکیٹ کیوں کریں۔۔۔ ہم کیوں نہیں بالکل ایک اکٹّھے ہو کر کے چلیں تو شاید ہم لوگ زیادہ پاورفل ہو جائیں۔۔۔ اور جیسے ہم لوگ ٹریٹمینٹ دیتے ہیں، ایسا نہیں ہے کہ اگر میں انفرٹلٹی کا ٹریٹمینٹ دے رہی ہوں تو صرف آیوروید کو پکڑ کے بیٹھ گئی، کہ میرے کو صرف آیورویدک ڈرگس ہی دینی ہیں۔۔۔ ڈاکٹر صاحب سے بھی کنملٹ کرتی ہوں کہ یہ پیشنٹ ہے، اس میں ہمیں کس طرح سے فالو کرنا ہے۔۔۔ تو وہ مکسچر ہوتا ہے، یونانی اور آیوروید کا بھی مکسچر ہوتا ہے۔۔۔ ایسا نہیں ہے کہ ہم لوگ بالکل ایک، مطلب، بہت رجڈلی کسی بھی سٹریم کو فالو کریں۔۔۔ ہم لوگ اپنی کراس پریکٹس بھی کرتے ہیں۔۔۔ مطلب ڈاکٹر صاحؓ بھی کئی باری ہیلپ لے لیتے ہیں کہ بھئی سیما اس میں ہم کیا چیز دیں کہ اس کو پیشنٹ کو زیادہ فائدہ ہو جائے۔۔۔ تو یہ میرے حساب سے تو دونوں چیزیں الگ ہیں ہی نہیں۔۔۔ اور بیسک کانسیپٹ، وہ میں نے بتا ہی دیا آپ کو۔۔۔

 

یہ سیما نے بہت کچھ کہہ دیا۔۔۔ بیسکلی انہوں نے وات، پت اور کف کو لیا ہے، ہمارے سودا، صفرا، دم اور بلغم۔۔۔ بیسکلی ہیومن سے رلیٹڈ چاروں پارٹ ہیں، اور ہم صفرانی ڈزیز کو تھوڑا الگ کرتے ہیں۔۔۔

 

سودا کیا ہے؟ صفرا کیا ہے؟

 

سودا بیسکلی، ٹیمپرامنیٹ کے چار پارٹ ہم نے لئے ہیں۔۔۔ ٹیمپرامینٹ، مطلب باڈی کا ٹیمپریچر، باڈی میں کیا ہے، ہمارا اس میں، سودا وہ، جو کالا پارٹ ہے، بائل پارٹ۔۔۔ جتنا بائل پگمینٹیشن ہے وہ سودا ہیں۔۔۔ ایسے ہی صفرا، یعنی ییلو، جس میں لمف پارٹ آتا ہے ہمارا۔۔۔ پھر دم، دم مینس، جس میں ریڈ پارٹ آتا ہے ہمارا۔۔۔ جس میں مانس اور خون دم پار میں آ گئے۔۔۔ بلغم، بلغم مینس، اسے ہم آیوروید سے اس لئے تھوڑا سا الگ کرتے ہیں کہ بلغم ایک ڈزیزڈ پارٹ ہو گیا باڈی کا۔۔۔ اسے، جب ہم تھیوری پڑھتے ہیں، تو بلغمی، مینس، وہ ٹنھڈی نیچر کا آدمی ہے۔۔۔ اور سوداوی نیچر کا ہے تو اسے ہم ایک گرم نیچر کا آدمی مانینگے۔۔۔ سوداوی نیچر کے آدمی میں کینسر کے چانسز زیادہ ہیں۔۔۔ بلغمی نیچر کے آدمیوں میں ٹی۔ بی۔ کے چانسز زیادہ ہیں۔ اس سے ہم۔۔۔ ڈائگنوسس میں آسانی ہوتی ہے۔ اور اسی تھیوری کو مانتے ہوئے، باڈی کا ٹیمپرمینٹ دیکھتے ہوئے، آدمی کا مزاج دیکھتے ہوئے، یونانی ٹریٹمینٹ میں مزاج بہت بڑا رول ادا کرتا ہے۔۔۔ اور مزاج کے ساتھ ساتھ ہم لوگ بعد میں، کے پرہہیز کراتے ہیں، جبکہ ماڈرن سسٹم میں پرہیز نام کی کوئی چیز ہی نہیں ہے۔۔۔ سبھی کچھ کھاتے ہیں۔۔۔ ہمارے یہاں، جو ہم یونانی علاج چلاتے ہیں تو بہت ساری چیزوں کا ایک دم پرہیز انہیں، کے بھئی یہ اسٹاپ کر دو، یہ نیہں کھائینگے آپ، یہی کھائینگے۔۔۔

 

یہی آیوروید میں بھی ہے۔۔۔

 

آیوروید میں بھی ہے۔۔۔ بالکل۔۔۔ تو ایک ہی پہلو کے، ایک ہی سکّے کے دو رخ ہیں۔۔۔ کیونکہ یونانی یونان سے آئی، گریک سے آئی، انڈیا میں آ کے انڈین ہو کے رہ گئی ہے۔۔۔ آج گریک میں کوئی یونانی کو نہیں جانتا۔۔۔ یہ ان کا دربھاگیہ ہے ہمارا نہیں، کہ آج ان کی پیتھی کو ہم لوگ یہاں زندہ رکھے ہوئے ہیں۔۔۔ اور آیوروید تو بیسکلی اورجن ہی انڈیا کا ہے۔۔۔ اور دنیا میں جتنے بھی ٹریٹمینٹ چل رہے ہیں سب آیوروید یونانی کی ہی اورجن ہیں۔۔۔

 

یہ جو ماڈرن سسٹم ہے، یہ، یا جو ہومیوپیتھک سسٹم بھی ہے، وہ اورجن جو ہے، وہ آیوروید اور یونانی ہی ہیں ہم۔۔۔ مطلب یہ۔۔۔

 

آپ کو ایک مثال دیتا ہوں۔۔۔ آج کل پنچمرا کا بہت زور شور ہے۔۔۔ بہت زیادہ،

 

پنچکرما کا۔۔۔ ایک کاٹ دینا۔۔۔ کیا ہوا۔۔۔ ٹیک۔۔۔ ٹیک۔۔۔ ٹیک۔۔۔ ایک منٹ بیٹری۔۔۔

exercise (urdu): 

ہزاروں سال سے کیا نہیں بدلا؟

1 آیوروید کی دوائیں

2 یونانی دوائیں

3 ہیومن فزیالجی

4 ایلوپیتھک دوائیں

ڈاکٹر کا کیا ماننا ہے؟

1 سب کو الگ الگ ٹریٹمینٹ دیا جانا چاہئیے

2 صرف یونانی ٹریٹمینٹ دیا جانا چاہئیے

3 اکٹّھے ہو کار کام کرنا چاہئیے

4 صرف آیوروید کا علاج ہونا چاہئیے

یونانی علاج میں کیا سب سے ضروری ہے؟

1 مزاج

2 پرہیز

3 سب ہی

4 باڈی کا ٹیمپریچر