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College of Liberal Arts wordmark

Ayurvedic Training - Traditional Family History, Ayurvedic Training and Practice

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Physician, doctor

वैद्य

Death

देहान्त

Almost, approximately

तकरीबन

Ancestor

पूर्वज

Late

स्वर्गीय

Well known

जाने-माने

Body

शरीर

Passed away

पूरा हो गया

Learned

सीखा

Formal training

फार्मल ट्रेनिंग

Test

इम्तिहान

Widely

विस्तृत रूप से

In the footsteps of

नक्शे कदम पर

Modern era

आधुनिक युग

Medicines, drugs

दवाईयां

To mix and grind

घोटना-पीसना

 

इमामदस्ते

Pound

कूटना

Filter, sift

छानना

Lack of time

समय का आभाव

Faith

विश्वास

What kinds of patients

किस-किस प्रकार के मरीज

Age

उम्र

Patient

मरीज

Diseases

बीमारियां

Cure, remedy, treatment

इलाज

Most

ज्यादातर

Upset stomach

पेट के रोगी

Patients with skin problems

स्किन प्रॉब्लम के रोगी

Chronic patient

बिगड़े हुये बुखार के रोगी

Method

पद्धति

Ayurveda

आयुर्वेद

Prevention

निवारण

Allopathy

ऐलोपैथी

Provides relief

आराम आ जाता है

Didn't help disease

रोग उनका कटा नहीं

Took recourse to Ayurveda

आयुर्वेद की शरण ली

Dwelling place

ठीया

Where does the patient come from

कहां-कहां से रोगी आते हैं

The patient comes from far away

दूर-दूर से भी रोगी आते हैं

Through, by means of

माध्यम

Work area

कार्यक्षेत्र

Experience

अनुभव

Touches the roots

मर्म को छू जाते हैं

Settle deep inside

अंदर तक बैठ जाते हैं

Entire life

तमाम ज़िंदगी

Expanse

विस्तार

Listen

सुनना

Remember more

ज्यादा याद हो

Happens a lot

वैसे तो बहुत होता है

In chronic illness

बिगड़े हुये बुखार में

Patient

रोगी

English medications, drugs

अंग्रेजी दवाईयों

Use

सेवन

 

विषजोरांतक पुष्पक लोह

Adding asafoetida

हींग का योग

Adding the poweder of small ficus religiosa (pipal)

छोटी पीपल का, चूरण का योग है

Skin disease

चमड़ी के रोग

Expectation

उम्मीद

Life

जान

Strength

ताकत

transcription (hindi): 

देखो जी मेरा नाम वैद्य मुकेश शर्मा है... हम यहां 1980 से, ये हमारी दुकान है... मेरे पिताजी, पूज्य पिताजी यहां पर प्रैक्टिस करते थे सन् 64 से... सन् 64-65 से यहां से प्रैक्टिस कर रहे हैं और फिर उसके बाद, उनके देहान्त के बाद मैं उनके साथ आ गया था... तो तकरीबन पंद्रह-बीस साल, बीस साल मुझे भी यहां प्रैक्टिस करते हो गये हैं... तो इसकी जो प्रेरणा है... जी... इसके प्रेरणा स्त्रोत आप अपने पिताजी को मानते हैं या उनके पिताजी, आपके पिताजी के भी जो पूर्वज थे, वो भी क्या इस कार्य में थे? नहीं... हमारे पिताजी के पूर्व पिताजी इस कार्य में नहीं थे... मेरे प्रेरणा स्त्रोत मेरे पिताश्री ही हैं... उनका पूरा नाम, स्वर्गीय वैद्य जनार्दन स्वरूप शर्मा है... वो इस इलाके के सबसे पुराने जाने-माने वैद्य रहे हैं... वो तकरीबन चालीस वर्च्चों से यहां पर प्रैक्टिस कर रहे थे... अब उनका शरीर पूरा हो गया है... 2000 में उनका शरीर पूरा हो गया है... ये बतायें कि जो आपने इस क्षेत्र में जो आपने सीखा, तो इसकी क्या आपने कोई फार्मल ट्रेनिंग ली, किसी इंस्टीट्यूट से, या पिताजी से ही सीख के कोई इम्तिहान दिये थे... इसके बारे में विस्तृत रूप से हमें बतायें? देखो जी इसके बारे में हमने अपने पिताजी से ही ट्रेनिंग ली, और उन्हीं के नक्शे कदम पर हम जो है ये काम चला रहे हैं... तो कितने वर्ष आपने ट्रेनिंग ली? तकरीबन बीस वर्ष हमने उनके साथ ट्रेनिंग ली... उसकी शुरूआत किस तरह से हुई और क्या-क्या मुश्किलें आई आपको? कभी आपको लगा कि ये काम तो हमसे नहीं होता... हां जी, शुरू में जब आधुनिक युग नहीं था, तो हम खारी बावली से दवाईयां लेकर आया करते थे और अपने पिताजी के साथ मिलके उनको घोटना-पीसना, इमामदस्ते में कूटना, फिर छानना, इस तरह से कार्य करते थे... लेकिन अब ये आजकल इतना समय का आभाव है कि या .तो आदमी प्रैक्टिस कर सकता है या फिर जो है दवाईयां खुद बना सकता है... अब तो कंपनियों की बनी-बनाई दवाईयां हैं, उन पर विश्वास करके हमें ये कार्य करना पड़ता है... ये बतायें कि आपके पास किस-किस प्रकार के मरीज आते हैं? किस उम्र से किस उम्र के मरीज आते हैं और ज्यादातर इस इलाके में या जहां से भी आपके मरीज आते हैं, कौन-कौन सी बीमारियां बहुत ज्यादा हैं जिनका आप इलाज करते हैं? देखो जी वैसे तो हमारे पास सभी तरह के, सभी उम्र के मरीज आते हैं, पर ज्यादातर जो है यहां पर पेट के रोगी, स्किन प्रॉब्लम के रोगी और बिगड़े हुये बुखार के रोगी, ये ज्यादा आते हैं हमारे पास... तो कोई ऐसा हुआ है कि आपकी जो पद्धति है, जो आप आयुर्वेद के द्वारा अपने मरीजों का जो दुख है, उसका निवारण करते हैं... कोई ऐसा हुआ है कि जिन्होंने पहले कहीं और, ऐलोपैथी या और पद्धति से अपना ईलाज कराया हो और आपके पास आये हों और फिर ठीक हुये हों? हां जी ऐसे, अनेक रोगी हैं ऐसे... जिन्होंने पहले ऐलोपैथी डॉक्टरों से इलाज कराया और उन्हें आराम आ जाता है लेकिन वो रोग उनका कटा नहीं... लेकिन फिर उन्होंने आयुर्वेद की शरण ली... चूंकि हमारा यहां पर ये सबसे पुराना वैद्य जी का बनाया हुआ ठीया है, तो वो रोगी यहां पर चले आते हैं और ठीक हो जाते हैं... कहां-कहां से रोगी आते हैं? हमारे पास दूर-दूर से भी रोगी आते हैं, पास-पास से भी रोगी आते हैं और दस-दस, पंद्रह-पंद्रह दिन की दवाई भी बन के जाती है, दूर-दूर के लिये, गुड़गांवा से भी आते हैं, जहांगीरपुरी से भी आते हैं, पास में से भी आते हैं... जिसको जैसा पता लगता है, पानीपत से भी आ जाते हैं... तो जो जहां रहता है, किसी के द्वारा, माध्यम से उसे पता लगता है तो वो फिर दवाई लेने के लिये आ जाते हैं... ये बताईये कि हरेक की ज़िंदगी में, हरेक के कार्यक्षेत्र में कुछ ऐसे अनुभव होते हैं जो उसके मर्म को छू जाते हैं... जी... वो अंदर तक बैठ जाते हैं... जी... जी... और ये यादें तमाम ज़िंदगी चलती रहती हैं... जी... मैं काफी विस्तार में आपसे वो बातें सुनना चाहता हूं कि आपकी जो प्रैक्टिस हुई है, क्या-क्या आपके अनुभव रहे हैं, किस-किस प्रकार से, कोई अनुभव ऐसा हो जो आपको बहुत ज्यादा याद हो... ऐसे तो, वैसे तो बहुत होता है, पर फिर भी जो है, कुछ ऐसा है, बिगड़े हुये बुखार में हमने देखा है कि वो रोगी अंग्रेजी दवाईयों का काफी सेवन करने के बाद एक-एक, डेढ़-डेढ़ महीना करने के बाद उनका 99 और 100 बुखार उतर नहीं पाया... और उन्होंने काफी दवाई कर ली, लेकिन वो, और रिपोर्ट उनकी जो भी उन्होंने चैक कराई, उसमें सब निल आया... लेकिन उनका 99 और 100 बुखार नहीं जा पाया... तो हमने अपनी वैद्यनाथ की जो विषजोरांतक पुष्पक लोह होती है, इसमें हींग का योग है और एक छोटी पीपल का, चूरण का योग है, ये उसको चलाया हमने और वो मरीज, दूसरे-तीसरे दिन से ही ठीक होना शुरू हो जाता है... कोई और अनुभव... और अनुभव, ऐसे हैं, स्किन के हैं, जैसे चमड़ी के रोग किसी को हो गये और वो ठीक नहीं होते और जो है अंग्रेजी दवाई उन्होंने खाई काफी, फिर भी ठीक नहीं हुये, हमने उनको देसी दवाईयों के द्वारा ठीक किया... और हमें भी उम्मीद थी कि हो जायेगा, लेकिन टाईम लगा उसको... टाईम लगने के बाद फिर हमें ये लगा कि हमारे दवाई में, आयुर्वेद दवाई में कुछ जान है, कुछ ताकत है... हमें भी विश्वास होता चला गया आयुर्वेद दवाईयों पे, के इसी कारण से हमें, मरीज जब ठीक हो जाता है, फिर हमें पूरा विश्वास हो जाता है...

translation (hindi): 

 

exercise (hindi): 

डॉ शर्मा के मरीज़ ज्यादातर किस तरह के हैं?

1 पेट के रोगी

2 स्किन प्रॉब्लम के रोगी

3 बिगड़े हुये बुखार के रोगी

4 सब के हैं

शर्मा जी के पास रोगी कहाँ कहाँ से आते हैं?

1 गुड़गाँव से

2 जहाँगीरपुरी से

3 पास और दूर, सब जगह से

4 पानीपत से

vocabulary (urdu): 

Physician, doctor

ویدیہ

Death

دہانت

Almost, approximately

تقریباً

Ancestor

پوروج

Late

سوگیریہ

Well known

جانے مانے

Body

شریر

Passed away

پورا ہو گیا

Learned

سیکھا

Formal training

فارمل ٹریننگ

Test

امتحان

Widely

وسترت روپ سے

In the footsteps of

نقشِ قدم پر

Modern era

آدھونک یگ

Medicines, drugs

دوائیاں

To mix and grind

گھوٹنا پیسنا

 

امامدستہ

Pound

کٹنا

Filter, sift

چھاننا

Lack of time

سمے کا آبھاؤ

Faith

وشواس

What kinds of patients

کس کس پرکار کے مریض

Age

عمر

Patient

مریض

Diseases

بیماریاں

Cure, remedy, treatment

علاج

Most

زیادہ تر

Patients with stomach problems

پیٹ کے روگی

Patients with skin problems

سکن پرابلم کے روگی

Chronic patient

بگڑے ہوئے بخار کے روگی

Method

پدhتی

Ayurveda

آیورویدہ

Prevention

نوارن

Allopathy

ایلوپیتھی

Provides relief

آرام آ جاتا ہے

Didn't help disease

روگ ان کا کٹا نہیں

Took recourse to Ayurveda

آیوروید کی شرن لی

Dwelling place

ٹھیا

Where does the patient come from

کہاں کہاں سے روگی آتے ہیں

The patient comes from far away

دور دور سے بھی روگی آتے ہیں

Through, by means of

مادھیم

Work area

کاریہ چھیتر

Experience

انوبھو

Touches the roots

مرم کو چھو جاتے ہیں

Settle deep inside

اندر تک بیٹھ جاتے ہیں

Entire life

تمام زندگی

Expanse

وستار

Listen

سننا

Remember more

زیادہ یاد ہو

Happens a lot

ویسے تو بہت ہوتا ہے

In chronic illness

بگڑے ہوئے بخار میں

Patient

روگی

English medications, drugs

انگریزی دوائیوں

Use

سیون

 

وشجورانت پشپک لوگ

Adding asafoetida

ہینگ کا یوگ

Adding the poweder of small ficus religiosa (pipal)

چھوٹی پیپل کا، چورن کا یوگ ہے

Skin disease

چمڑی پہ روگ

Expectation

امّید

Life

جین

Strength

طاقت

transcription (urdu): 

دیکھو جی میرا نام ویدیہ مکیش شرما ہے۔۔۔ ہم یہاں 1980 سے، یہ ہماری دکان ہے۔۔۔ میرے پتا جی، پوجیہ پتا جی یہاں پر پریکٹس کرتے تھے سن 64 سے۔۔۔ سن 65-64 سے یہاں سے پریکٹس کر رہے ہیں اور پھر اس کے بعد، ان کے دہانت کے بعد میں ان کے ساتھ آگیا تھا۔۔۔ تو تقریباً پندرہ بیس سال، بیس سال مجھے بھی یہاں پریکٹس کرتے ہو گئے ہیں۔۔۔

 

تو اس کی جو پریرنا ہے۔۔۔ جی۔۔۔ اس کے پریرنا رستروت آپ اپنے پتا جی کو مانتے ہیں یا ان کے پتا جی، آپ کے پتا جی کے بھی جو پوروج تھے، تو بھی کیا اس کاریہ میں تھے؟

 

نہیں۔۔۔ ہمارے پتا جی کے پورو پتا جی اس کاریہ میں نہیں تھے۔۔۔ میرے پریرنہ ستروت میرے پتا شری  ہیں۔۔۔ ان کا پورا نام، سوگیریہ ویدھیہ جناردن سروپ شرما ہے۔۔۔ وہ اس علاقے کے سب سے پرانے جانے مانے ویدیہ رہے ہیں۔۔۔ وہ تقریباً چالیس برسوں سے یہاں پر پریکٹس کر رہے ہیں۔۔۔ اب ان کا شریر پورا ہو گیا ہے۔۔۔ 2000 میں اس کا شریر پورا ہو گیا ہے۔۔۔

 

یہ بتائیں کہ جو آپ نے اس چھیتر میں جو آپ نے سیکھا، تو اس کی کیا آپ نے کوئی فارمل ٹریننگ لی، کسی انٹسٹٹوٹ سے، یا پتا جی سے ہی سیکھ کے کوئی امتحان دیے تھے۔۔۔ اسکے بارے میں وسترت روپ سے ہمیں بتائیں؟

 

دیکھو جی اس کے بارے میں ہم نے اپنے پتا جی سے ہی ٹریننگ لی، اور انہیں کے نقشِ قدم پہ ہم جو یہ کام چلا رہے ہیں۔۔۔

 

تو کتنے ورش آپ نے ٹریننگ لی؟

 

تقریباً بیس ورش ہم نے ان کے ساتھ ٹریننگ لی۔۔۔

 

اس کی شروعات کس طرح سے ہوئی اور کیا کیا مشکلیں آئیں آپ کو؟ کبھی آپ کو لگا کہ یہ کام تو ہم سے نہیں ہوتا۔۔۔

 

ہاں جی، شروع میں جب آدھنک یگ نہیں تھا تو ہم کھاری باولی سے دوائیاں لے کر آیا کرتے تھے اور اپنے پتا جی کے ساتھمل کے ان کو گھوٹنا پیسنا، امامدستے میں کوٹنا، پھر چھاننا، اس طرح سے کاریہ کرتے تھے۔۔۔ لیکن اب یہ آج کل اتنا سمے کا آبھاو ہے کہ یا تو آدمی پریکٹس کر سکتا ہے یا پھر جو ہے دوائیاں خود بنا سکتا ہے۔۔۔ اب تو کمپنیوں کی بنی بنائی دوائیاں ہیں، ان پر وشواس کر کے ہمیں یہ کاریہ کرنا پڑتا ہے۔۔۔

 

یہ بتائیں کہ آپ کے پاس کس کس پرکار کے مریض آتے ہیں؟ کس عمر سے کس عمر کے مریض آتے ہیں اور زیادہ تر اس علاقے میں یا جہاں سے بھی آپ کے مریض آتے ہیں، کون کون سی بیماریاں بہت زیادہ ہیں جن کا آپ علاج کرتے ہیں؟

 

دیکھو جی ویسے تو ہمارے پاس سبھی طرح کے، سبھی عمر کے مریض آتے ہیں، پر زیادہ تر جو ہے یہاں پر پیٹ کے روگی، سکن پرابلم کے روگی اور بگڑے ہرئے بخار کے روگی، یہ زیادہ آتے ہیں ہمارے پاس۔۔۔ تو کوئی ایسا ہوا ہے کہ آپ کی جو پدھتی ہے، جو آپ آیروید کے دوارا اپنے مریضوں کا جو دکھ ہے، اس کا نوارن کرتے ہیں۔۔۔ کوئی ایسا ہوا ہے کہ جنہوں نے پہلے کہیں اور، ایلوپیتھی یا کوئی اور پدھتی سے اپنا علاج کرایا ہو اور آپ کے پاس آئے ہویں اور پھر ٹھیک ہوئے ہوں؟

 

ہاں جی ایسے، انیک روگی ہیں ایسے۔۔۔ جنہوں نے پہلے ایلوپیتھیک ڈاکٹروں سے علاج کرایا اور انہیں آرام آجاتا ہے لیکن وہ روگ ان کا کٹتا نہیں۔۔۔ لیکن پھر انہوں نے آیروید کی شرن لی۔۔۔ چونکہ ہمارا یہاں پر یہ سب سے پرانا ویدیہ جی کا بنایا ہوا ٹھیا ہے، تو وہ روگی یہاں پر چلے آتے ہیں اور ٹھیک ہو جاتے ہیں۔۔

 

کہاں کہاں سے روگی آتے ہیں؟

 

ہمارے پاس ددور دور سے بھی روگی آتے ہیں، پاس پاس سے بھی روگی آتے ہیں اور دس دس، پندرہ پندرہ دن کی دوائی بھی بن کے جاتی ہے، دور دور کے لئے، گڑگاؤاں سے بھی آتے ہیں، جہانگیرپوری سے بھی آتے ہیں، پاس میں سے بھی آتے ہیں۔۔۔ جس کو جیسا پتہ لگتا ہے، پانی پت سے بھی آ جاتے ہیں۔۔۔ تو جو جہاں رہتا ہے، کسی کے دوارا، مادھیم سے اسے پتہ لگتا ہے تو وہ پھر دوائی لینے کے لئے آ جاتے ہیں۔۔۔

 

یہ بتائیے کہ ہر ایک کی زندگی میں، ہر ایک کے کاریچھوتھر میں کچھ ایسے انوبھو ہوتے ہیں جو اس کے مرم کو چھو جاتے ہیں۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

وہ اندر تک بیٹھ جاتے ہیں۔۔۔ جی۔۔۔ جی۔۔۔ اور یہ یادیں تمام زندگی چلتی رہتی ہیں۔۔۔ جی۔۔۔ میں کافی وستار میں آپ سے وہ باتیں سننا چاہتا ہوں کہ آپ کی جو پریکٹس ہوئی ہے، کیا کیا آپ کے انوبھو رہے ہیں، کس کس پرکار سے، کوئی انوبھو ایسا ہو جو آپ کو بہت زیادہ یاد ہو۔۔۔

 

ایسے تو، ویسے تو بہت ہوتا ہے، پر پھر بھی جو ہے، کچھ ایسا، بگڑے ہوئے بخار میں ہم نے دیکھا ہے کہ وہ روگی انگریزی دوائیوں کا کافی سیون کرنے کے بعد ایک ایک، ڈیڑھ ڈیڑھ مہینہ کرنے کے بعد ان کا 99 اور 100 بخار اتر نہیں پایا۔۔۔ اور انہوں کافی دوائی کر لی، لیکن وہ، اور رپورٹ ان کی جو بھی انہوں نے چیک کرائی، اس میں سب نل آیا۔۔۔ لیکن ان کا 99 اور 100 بخار نہیں جا پایا۔۔۔ تو ہم نے اپنی ویدیہ ناتھ کی جو وشجورانتک پشپک لوہ ہوتی ہے، اس میں ہینگ کا یوگ ہے اور ایک چھوٹی پیپل کا، چورن کا یوگ ہے، یہ اس کو چلایا ہم نے اور وہ مریض، دوسرے تیسرے دن سے ہی ٹھیک ہونا شروع دن سے ہی ٹھیک ہونا شروع ہو جاتا ہے۔۔۔ کوئی اور انوبھو۔۔۔ اور انوبھو۔۔۔ اور انوبھو، ایسے ہیں، سکن کے ہیں، جیسے چمڑی کے روگ کسی کو ہو گئے اور وہ ٹھیک نہیں ہوتے اور جو ہے انگریزی دوائی انہوں نے کھائی کافی، پھر بھی ٹھیک نہیں ہوئے، ہم نے ان کو دیسی دوائیوں کے دوارا ٹھیک کیا۔۔۔ اور ہمیں بھی امّید تھی کہ ہو جائیگا، لیکن ٹائم لگا اس کو۔۔۔ ٹائم لگنے کے بعد پھر ہمیں یہ لگا کہ ہمارے ہمارے دوائی میں، آیورویدہ دوائی میں کچھ جان ہے، کچھ طاقت ہے۔۔۔ ہمیں بھی وشواس ہوتا چلا گیا آیرویدہ دوائیوں پہ، کہ اسی کارن سے ہمیں، مریض جب ٹھیک ہو جاتا ہے، پھر ہمیں پورا وشواس ہو جاتا ہے۔۔۔

exercise (urdu): 

ڈاکٹر شرما کے مریض زیادہتر کس قسم کے ہیں؟

1 پیٹ کے مریض

2 سکن کے پرابلم کے مریض

3 بگڑے ہوئے بخار کے مریض

4 دئے ہوئے سب