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College of Liberal Arts wordmark

Ayurveda Ethics (2)

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Fees

फीस

For the stomach

पेट के लिये

Religion

धर्म

Service

सेवा

 

वैद्य मरीज की सेवा करने के लिये बनाया है, दुखी करने के लिये नहीं

Allowance

गुंजाइश

transcription (hindi): 

देखो जी, फीस की बात ये है, रोट्टी तो सबको खान नै चाहिये... पेट के लिये करैं हैं... पर बात ये है, मेरे पिताजी ये कहा करते, राजा भी दो रोटी खावै है, हम भी दो रोटी खावैं हैं... साथ मैं कुछ नहीं जाता... धर्मो रक्षति रक्षतः.... धर्म की रक्षा कर, धर्म तेरी रक्षा करेगा... बेकार मैं, जैसे बाल्मिकी ऋषि थे, लूटा-पीटा करते, पर उन्होंने कहा, जब नारद मुनि ने, अक, साथ क्या जागा तेरे? घर वाले तै पूछ कै आ, अक तू, तेरे दुखः-सुख को बंटावैंगे के नहीं... हम क्यूं इसा करम करैं, अक जो लूट-लूट कै दुनिया नै खावैं, दंड तो हम भुगतैंगे... भगवान की दया से अपने खेत हैं, खेत मैं गेहूं पैदा हो जा है, धान हो जा है, खा ले हैं, लोगों की सेवा हो जा है... वैद्य मरीज की सेवा करने के लिये बनाया है, दुखी करने के लिये नहीं... वैद्य को हमेशा, पैसा मिलो या ना मिलो, हैं जी, देखो, पेट तो सबनै भरना है, पैसा मिलो या ना मिलो, मरीज को शांति मिलनी चाहिये... मरीज का रोग दूर होना चाहिये... बेचारा ठीक होगा तो अपने आप ना दे देगा ठीक हो कै... अर जिसके पास जी गुंजाइश है, अपने साथ मैं भी दे दे है... हफ्ते की दवाई दे दे हैं, बाजे को फ्री दे दे हैं, बाजे को पैसे ले ले हैं... फ्री वाले को ऐसा, जंगल में से तोड़ के बता दें, कुछ लिखवा भी दे हैं जो बड़े लोग आवैं हैं... जिसके पास गुंजाइश है, लिखवा दे हैं, वैद्यनाथ की आवैं हैं, डाबर की आवैं हैं, हैं जी... तो इस तरह इलाज करते हैं हम...

translation (hindi): 

 

exercise (hindi): 

वैद्य जी का फ़ीस के बारे में क्या मानना है?

1 वैद्य मरीज़ की सेवा करने के लिये बना है

2 पैसे मिले या नहीं, मरीज़ को शांति मिलनी चाहिये

3 सब

4 जिसकी जितनी गुंजाइश हो उतना दे दे हैं

vocabulary (urdu): 

Fees

فیس

For the stomach

پیٹ کے لئے

Religion

دھرم

Service

سیوا

 

ویدیہ مریض کی سیوا کرنے کے لئے بنایا ہے، دکھی کرنے کے لئے نہیں

Allowance

گنجائش

transcription (urdu): 

دیکھو جی، فیس کی بات یہ ہے، روٹی تو سب کو کھانے چاہئیے۔۔۔ پیٹ کے لئیے کریں ہیں۔۔۔ پر بات یہ ہے، میرے پتا جی کہا کرتے، راجا بھی دو روٹی کھاوے ہے، ہم بھی دو روٹی کھاویں ہیں۔۔۔ ساتھ میں کچھ نہیں جاتا۔۔۔ دھرمو رکشت رکشت:۔۔۔ دھرم کی رکشا کر، دھرم تیری رکشا کریگا۔۔۔ بیکار میں، جیسے بالمک کرشی تھے، لوٹا پیٹا کرتے، پر انھوں نے کہاِ جب نارد مونی نے، اک، ساتھ کیا جاگا تیرے؟ گھر والے تے پوچھ کے آ، اک تو، تیرے دکھ سکھ کو بٹاوینگے کہ نہیں۔۔۔ ہم کیوں اسا کرم کریں، اک جو لوٹ لوٹ کے دنیا نے کھاویں، ڈنڈ تو ہم بھگتینگے۔۔۔ بھگوان کی دیا سے اپنے کھیت ہیں، کھیت میں گیہوں پیدا ہو جا ہے، دھیان ہو جا ہے، کھالے ہیں، لوگاں کی سیوا ہو جا ہے۔۔۔ ویدیہ مریض کی سیوا کرنے کے لئے بنایا ہے، دکھی کرنے کے لئے نہیں۔۔۔ ویدیہ کو ہمیشہ، پیسہ ملو یا نہ ملو،  ہیں جی، دیکھو، پیٹ تو سب نے بھرنا ہے، پیسہ ملو یا نہ ملو، مریض کو شانتی ملنی چاہئیے۔۔۔ مریض کا روگ دور ہونا چاہئیے۔۔۔ بیچارہ ٹھیک ہوگا تو اپنے آپ نہ دے دیگا ٹھیک ہو کے۔۔۔ ار جس کے پاس جی گنجائش ہے، اپنے ساتھ میں بھی دے دے ہے۔۔۔ ہفتے کی دوائی دے دے ہیں، بعضے کو فری دے دے ہیں، بعضے کو پیسے لے لے ہیں۔۔۔ فری والے کو ایسا، جنگل میں سے توڑ کے بتا دیں، کچھ لکھوا بھی دے ہیں جو بڑے لوگ آویں ہیں۔۔۔ جس کے پاس گنجائش ہے، لکھوا دے ہیں، ویدیہ ناتھ کی آویں ہیں، ڈابر کی آویں ہیں، ہیں جی۔۔۔ تو اس طرح علاج کرتے ہیں ہم۔۔۔

exercise (urdu): 

وییہ جی کی فیس کے بارے میں کیا رائے ہے؟

1 ویدیہ مریض کی سیوا کرنے کے لئے بنا ہے

2 پیسے ملے یا نہیں، مریض کو شانتی ملنی چاہئیے

3 سب

4 جس کی جتنی گنجائش ہو، اتنا دے دیں