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Dr. Vimal K. Modi - 09: Naturopathy, Nutrition

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About This Lesson: 
Dr. Modi describes the mechanics of taste and validity of eating seasonal produce.
vocabulary (hindi): 

ऊब जायेंगे 

Will get bored

अप्राकृतिक स्वाद

Unnatural taste

नैसर्गिक स्वाद

Heavenly, natural taste

अनैसर्गिक स्वाद

Unnatural taste

नमक

Salt

उबली सब्जियां

Boiled vegetables

पेट में रगड़

Abrasion in the stomach

जीभ

Tongue

स्वाद

Taste

transcription (hindi): 

इसके अलावा कुछ ये भी कहा जाता है कि लोग स्वाद के मारे, भोजन बड़ा स्वादिष्ट खा लेते हैं, लेकिन उसकी जो अपनी एक, अपनी एक, प्राकृतिक उसके अंदर एक ताकत है, उसे खत्म कर देते हैं... क्या आप इस बात को मानते हैं?

मानते नहीं हैं, साक्षात सत्य है... स्वाद आप लेकर थोड़े ही पैदा हुये थे... आप जिस देश में रह रहे हैं, उस देश के स्वाद के आप आदी हो गये हैं... आपके माताजी-पिताजी ने जो आपको स्वाद दिया, उस स्वाद से आप फंसे हुये हैं... हमारे साउथ में जो भोजन खाया जाता है, जो दक्षिण प्रदेश में भोजन खाया जाता है, वो हमारे पूर्वी जगह नहीं खाया जाता... और शायद अगर हम दक्षिण में चले जायें तो हमें वो सांभर और वो, खाते खाते हम ऊब जाएँगे क्योंकि हम रोटी सब्जी खाने के आदि हैं... ये हमें सिखाया किसने? हमारे पिता ने, हमारे दादा ने...तो आप स्वस्थ भोजन कीजिये, प्राकृतिक भोजन कीजिये... ये मैं मानता हूं कि आपका पुत्र उसको नहीं अपनायेगा... लेकिन अगर यही परंपरा चलती रही तो आपका पोता जरूर अपनायेगा क्योंकि हमने पारिवारिक परिवेश से सीखा हुआ है... जो सिखाया गया, वो है... और एक बात आपको और बता दूं कि जो भी स्वाद पैदा हुआ है, जो भी अप्राकृतिक स्वाद पैदा किये जा रहे हैं, वो स्वाद मिला कहां से? वो सारा स्वाद हमें प्रकृति ने बताया... रंग हमें कहां से मिला? सब प्रकृति ने दिया... हमने प्रकृति से स्वाद सीखा और उसको नैसर्गिक स्वाद से आनंदित ना होके अनैसर्गिक स्वाद को हम कल्पना करके और उससे आनंदित हो रहे हैं... नमक भोजन में चाहिये... हम नमक डालकर खाते हैं इसलिये हमें नमक की आदत पड़ गई है... हम बिना नमक का खायेंगे तो हमें स्वाद मिलेगा...और इन मसालों ने तो प्राकृतिक स्वाद ही गायब कर दिया है... मुझे तो लगता है अगर आपको मसालेदार सब्जी मिल जाये और आपकी आंख बंद कर दी जाये तो आप पहचान नहीं पायेंगे कि लौकी खा रहे हैं कि परमल खा रहे हैं कि नेनुआ खा रहे हैं, कि भिंडी खा रहे हैं कि मटर खा रहे हैं, क्योंकि वो स्वाद आपका जो है, वो उन मसालों के स्वाद से दब जाता है.

उबली सब्जियाँ खाये, आपको हर बार अलग स्वाद मिलेगा... निमुआ का अलग स्वाद, परमल का अलग स्वाद... अगर नमक ज्यादा भोजन में खाते हैं तो पालक खाइये, पालक में तो नमक ही नमक भरा हुआ है... हर फल में अलग स्वाद है... कमाल की बात है कि स्वाद खट्टा भी है, मीठा भी है, खट्टा मीठा भी है... और आप संतरा जब शुरू में खाते हैं तो थोड़ा खट्टा खाते हैं, फिर थोड़ा खट्टा मीठा खाते हैं, जब जाने लगता है तो आपको मिठास से भरकर चला जाता है... और फिर अगले ऋतु की याद दिलाता रहता है कि इतना मीठा संतरा खाया था... ऋतु की खाईये... हर ऋतु में अलग अलग स्वाद दिये हैं... और एक बात और आपको बता दूं कि ईश्वर ने उस ऋतु में आत्मरक्षा करने के लिये वो फल और सब्जियां दी हैं... गर्मियों में देखिये तरबूजा आता है, खरबूजा आता है, खीरा आता है लौकी, नेनुआ आते हैं... क्योंकि उसमें पानी की मात्रा ज्यादा है, गर्मियों में आपको पानी ज्यादा लेना चाहिये... इसलिये ईश्वर ने ऐसे भोजन और सब्जियां पैदा की हैं, ऐसे फल पैदा किये हैं कि आपको खूब पानी मिले... जाड़ों में वो भोजन नहीं है... तो प्राकृति आपकी रक्षा करती है, प्रकृति को रक्षा करने दीजिये...

स्वाद के मारे न्यारे...

स्वाद के मारे न्यारे... और स्वाद अगर हमें प्राकृति ने दिया है तो उस स्वाद को सीखना शुरू करें... अरे आपको मिर्च खानी है, चर्चरा खाना है तो मिर्च खाइये ना... प्याज खानी है वो तीखा है, लहसुन का अलग स्वाद है... और एक मजे की बात आपको बता दूं... लोग जब मिर्च खाते हैं तो सब्जी में मिला के खाते हैं... सलाद खाते हैं तो दांत में दबा के खाते हैं... तो उनको उस मिर्च का स्वाद, मुझे तो नहीं लगता कि दस प्रतिशत से ज्यादा मुंह में लगता हो... और 90 प्रतिशत जा के पेट में रगड़ पैदा करती है... आपके पूरे शरीर को डिस्टर्ब करती है... अगर मिर्च ही खाना हो तो मिर्च को काटिये, खूब चबाइए, खूब जीभ पर रगड़िए और खूब उसकी हाय हाय का आनंद लीजिये... तो पूरा का पूरा आप लाभ ले पायेंगे ना... और तब बचा हुआ पेट में डालेंगे... क्योंकि हर चीज का स्वाद तो केवल जीभ में है... कभी आप कल्पना कीजिये, किसी पार्टी में खड़े होईये कि लोग भोजन करने में कितना समय लगाते हैं... सात मिनट... प्लेट लेने से प्लेट नीचे रखने तक... और वो भोजन बना कितने सालों में है? तीन महीने में तो गेहूं ने पैदा करके गेहूं पैदा किया... फलों ने छः छः महीने तक पेड़ पर लटक के पक तैयार हुये... और आप खाते हैं सात मिनट में... जिसलिये खाते हैं उसका ही स्वाद नहीं लेते... जीभ पर स्वाद लीजिये... हर भोजन को जीभ पर तब तक रखिये जब तक उसका स्वाद है... जब स्वाद खत्म हो तभी गले के नीचे उतारिये... देखिये आपके स्वाद में क्या आनंद आयेगा... और आपके उस स्वाद से आपके उस मन के स्वाद को पूरा भोजन मिलेगा...

 

exercise (hindi): 

1) हमें प्राकृतिक स्वाद कहाँ से मिलता है?

१) खाने से

२) प्रकृति से

३) माता पिता से

४) नमक और मसालों से

2) गरमियों में अधिक पानी की मात्रा वाले फल और सब्ज़ी कौन से हैं?

१) तरबूज

२) खरबूजा

३) लौकी

४) सब

3) शरीर के किस अंग से हमें स्वाद मिलता है?

१) दाँत से

२) जीभ से

३) पेट से

४) मुँह से

vocabulary (urdu): 

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transcription (urdu): 

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exercise (urdu): 

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