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College of Liberal Arts wordmark

Ayurveda: Ethics, Faith, Diagnosis

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Difference

अंतर

Fully

पूर्ण रूप से

Man

आदमी

Success

कामयाबी

Faith

श्रद्धा

 

कहने-सुनने पर ही यकीन रखता है

Completely successful

पूर्णत: सफलता

Sharp

तिक्षण

Prevalent

प्रचलन

Reason

वजह

Less

कम

will soon be alright

जल्द से जल्द ठीक हो जायें

Advertise, propogate

प्रचार

Nowadays

आजकल

Prevalent

प्रचलन

Daily

रोजाना

Method

पद्धति

Estimate

आकलन

Check the pulse

नाड़ी पकड़ते हैं

Look at the face

चेहरा देखते हैं

Having had them open their mouth, examine the tongue

मुंह खुलवा के, जीभ का परीक्षण करते हैं

Tongue

जीभ

Face

चेहरा

Stomach

पेट

Upset stomach

पेट खराब है

Pain

दर्द

According to the pain

दर्द के हिसाब से

Phlegm

कफ

Bile

पित

Air

वायु

Get to know

पता लग जाता है

 A way of doing something

ढर्रा

Cold problem

नजले-जुखाम की दिक्कत

Stomach upset

पेट की जलन

Acid problem

एसिड की दिक्कत

Joint pain

जोडों में दर्द

Problem

दिक्कत

Cold

नजले

Cough

खांसी

Fever

बुखार

Mix poweder in honey

शहद में पुड़िया

Pills for sucking

चूसने की गोलियां

Hot water

गरम पानी

Restrain eating and drinking more, restrain diet

खान-पान का ज्यादा संयम है

Spicy fried things

चटपटी-तली चीजें

Plain food

सादा खाना

South Asian, traditional medicines

देसी दवाईयां

Certainly

निश्चित

Month

महीना

Half month

डेढ महीना

Disease caused by air imbalance

वायु के रोग

transcription (hindi): 

तो आप मुझे ये बतायें कि ये जो विश्वास की जो बात है...

जी...

आयुर्वेद और ऐलोपैथी, इसमें आप क्या अंतर पाते हैं, पूर्ण रूप से?

देखो जी, अतंर तो इसमें बिल्कुल अलग-अलग है... आयुर्वेद में सबसे पहले वही आदमी कामयाबी उठा सकता है, हर तरह के रोग में, अगर उसका विश्वास और उसकी श्रद्धा आयुर्वेद से ठीक होने की है... और जो आदमी श्रद्धा कम रखता है, सिर्फ कहने-सुनने पर ही यकीन रखता है कि उसने कहा, उसने कहा, तब वो आयेगा, तो उसको पूर्णतः सफलता नहीं मिलती है... इसीलिये आदमी जो है पहले ऐलोपैथी की तरफ जाता है... उसे कुछ घंटे में ही पहली खुराक आराम दे देती है... तो इतना बड़ा फर्क है के आयुर्वेद की दवाई तीन खुराक खाने के बाद उसे थोड़ा सा आराम आयेगा और ऐलोपैथी की दवाई एक खुराक ही जवाब दे देगी... इसलिये जो है इतना बड़ा अंतर, आदमी खुद ही मान लेता है और हम भी मानते हैं इस बात को... हमारी तो कोई भी दवाई एकदम तिक्षण नहीं होगी, कि भई एक ही खुराक में उसका बुखार डाउन जायेगा... उसका बुखार डाउन आयेगा हमारे यहां पूरे चौबीस घंटे में...

तो क्या आपको लगता है कि इसका प्रचलन इसी वजह से कम है कि लोग चाहते हैं कि जल्द से जल्द ठीक हो जायें... तो क्या आप इसका प्रचार करते हैं कि आप आयुर्वेद की तरफ आयें या इस तरह से आपके मरीज बढ़ते हैं, या मरीज किस वजह से आपके पास आते हैं?

ऐसे तो हमारे पास तो हमारे प्रोफैशन के हिसाब से, आयुर्वेद के हिसाब से ज्यादा आते हैं, क्योंकि गली-मौहल्लों में बैठे हैं, आजकल सभी जगह बैठे हैं प्रैक्टिस करने वाले... तो हमारे पास तो सिर्फ आयुर्वेद के लिये ही ज्यादा आते हैं...

नहीं-नहीं, मैं ये पूछना चाह रहा था कि आप इसका प्रचलन कैसे करते हैं, आयुर्वेद का?

प्रचलन इसीलिये करते हैं, हमें विश्वास है, हमें, जो मरीज हमारे पास आता है उसको हम आयुर्वेदिक दवाई के द्वारा ठीक करते हैं और उसको ये कहते हैं कि भई इतना टाईम लगेगा आपको... दवाई करो, ठीक बिल्कुल हो जाओगे... आराम लगेगा आपको... टाईम लगेगा... तो, इसलिये प्रचलन होता जाता है उसका... रोजाना कुछ ना कुछ, किसी ना किसी को कहा ही जाता है...

ये बतायें कि आप कैसे निर्धारित करते हैं कि मरीज को क्या है? आप, आपकी जो पद्धति है...

जी...

वो किस प्रकार से आप आकलन करते हैं कि मरीज को क्या प्रॉब्लम है?

हम जो है मरीज की पहले नाड़ी पकड़ते हैं, उसके बाद उसका चेहरा देखते हैं, उसके बाद उसका मुंह खुलवा के, जीभ का परीक्षण करते हैं, देखते हैं अगर नाड़ी में उसको फीवर का है, तो उसको फीवर का सिमटम देख के बताया जाता है... जीभ देखके, चेहरा देखके, पता लग जाता है कि उसका पेट से संबंध है, पेट से, पेट खराब है... और दर्द है तो उसको दर्द के हिसाब से नाड़ी से पता लग जाता है कि उसको, हमारा आयुर्वेद तीन चीज पे ही डिपैंड है... कफ, पित, वायु पे... तो इनसे हमें पता लग जाता है...

तो इनके जो प्रचलित, जो आपके तरीके हैं इस पद्धति में, वो हमें जरा विस्तार से बतायें... अगर मुझे कफ की बीमारी है तो क्या, पित है तो क्या, वायु है तो क्या? तो आप क्या करते हैं? आपका ढर्रा क्या होता है?

देखो, कफ में, सब, पहले आदमी को नज ले-जुखाम की दिक्कत आयेगी... उसमें बुखार भी हो सकता है... पित में उसको पेट की जलन, गैस, एसिड की दिक्कत आयेगी... स्किन परेशानी भी हो सकती है... और वायु में उसको हाथों, पैरों में जोड़ों में दर्द की दिक्कत आयेंगी... ये तीनों चीज से ये सिम्टम पता लगते हैं कि उसको क्या दिक्कत हैं... वायु से दर्द का पता लगेगा, पित से उसको पेट की गड़बड़ का पता लगेगा और कफ से उसको नजले, खांसी, जुखाम, बुखार का पता लगेगा...

तो इसका आप इलाज किस तरह करते हैं?

देखो जी, हम इसका शहद में पुड़िया, हमारा योग है, हमारे वैद्य जी का, शहद में पुड़िया हैं, चूसने की गोलियां हैं और गरम पानी का विशेष है... खान-पान का ज्यादा संयम है इसमें... चटपटी-तली चीजें, बाजार की चीजें बिल्कुल बंद हैं... बिल्कुल सिम्पल, सादा खाना और देसी दवाईयां, शहद वाली पुड़िया खायें, तो उसको निश्चित, दो दिन में ही काफी आराम जाता है... ऐसे ही दर्द का है, दर्द की जो वायु से संबंध है, उसका, उसमें थोड़ी सा लंबी दवाई चलती है, दर्द कितना पुराना है, कितना पुराना नहीं है, तो इसीलिये उसमें महीना, डेढ महीना भी लग जाता है, दो-दो, तीन-तीन महीने भी लग जाते हैं वायु के रोग में... 

exercise (hindi): 

आयुर्वेद किन चीज़ों पर डिपैंड नहीं हैं?

1 कफ

2 पित

3 दर्द

4 वायु

. वायु से कौन-सा सिम्टम पता लगता है कि मरीज को क्या दिक्कत है?

1 पेट की गड़बड़ का

2 जुकाम का

3 दर्द का

4 सब का

पित से कौन-सा सिम्टम पता लगता है कि मरीज को क्या दिक्कत है?

1 जुकाम का

2 दर्द का

3 पेट की गड़बड़ का

4 खांसी का

कफ से कौन-सा सिम्टम पता लगता है कि मरीज को क्या दिक्कत है?

1 नजले का

2 खांसी का

3 ्सब का

4 बुखार का

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