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Nutrition

Dr. Vimal K. Modi - 12: Naturopathy, Health Education

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About This Lesson: 
Dr. Modi talks about some of his interesting patient experiences.
vocabulary (hindi): 

विधियां 

 

Procedures

वजन घटाने की

 

To reduce weight

चेहरे की चमक

 

Glow on the face

चार स्वाभाविक मल मार्ग

 

Four natural ways to discard body waste

त्वचा की कांति

 

Luster, brightness of the skin

चीनी चिकनाई

 

Sugar and oily food

सलाद

 

Salad

उबली हुई सब्जियां

 

Boiled Vegetables

पेट भरने के लिये

 

To fill the stomach

जो अंदर कचरा हो रहा है

 

What is being converted to garbage inside

वजन

 

Weight

पिशाब

पेशाब

Urine

मन को ढांढस दिया

मन को ढाढस दिया

Console the heart

चेहरे की हवाइयाँ उड़ गई

 

To be afraid/ to get worried

भांप लिया

 

Guessed

transcription (hindi): 

इसके अलावा इतने सालों से आप ये जो कार्य कर रहे हैं, लोगों की सेवा कर रहे हैं, उन्हें स्वस्थ बना रहे हैं... इस पूरी, इस पूरे आपके कार्यक्षेत्र में, इस पूरे अनुभव में कोई बड़ा मजेदार, दिलचस्प अनुभव आपके जीवन में हुआ हो, मरीज को ले के, जो आपको अंदर तक छू गया हो या याद हो आपको... वो हमें ज़रा बतायें...

मेरे पास बहुत सारे आते हैं वजन घटाने... कुछ इसलिये आते हैं कि घुटने जवाब दे गये हैं... कुछ इसलिये लड़कियां आती हैं कि उनकी शादी नहीं हो रही है... बहुत सी विधियाँ हिन्दुस्तान में प्रचलित हैं वजन घटाने की... लेकिन उन सब वजन घटाने में  चेहरे की चमक चली जाती है... क्योंकि जब वजन घटता है तो शरीर का जो कचरा है, जो मांस है, जो फैट है वो जलता है और वो एलीमिनेट होना चाहिये शरीर से, हमारे जो चार स्वाभाविक मल मार्ग हैं, उनसे निकल जाना चाहिये... वो नहीं निकलेगा तो त्वचा की कांति कम हो जायेगी, चमक कम हो जायेगी... तो मुझे, या यों कहें कि इस प्राकृतिक चिकित्सा को ये विशेषता प्राप्त है कि वजन भी घटा देता है और चमक भी बनी रहती है... उसी तरह की घटना है, गोरखपुर से व्यापारी वजन घटाने मेरे पास आये... गोरखपुर के भी आते हैं... और गोरखपुर के शहर के आते हैं तो मुझे जरा सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि अगर वजन नहीं घटेगा तो मेरी बदनामी होगी, आदि आदि... तो मैंने उनको बहुत ढंग से समझाया कि वजन घटाने के लिये चीनी-चिकनाई का प्रयोग बिल्कुल मत कीजिये... सुबह फल खाये, जितना चाहें... दोपहर को खूब सलाद खाये... उबली हुई सब्जियाँ खाये... और पेट भरने के लिए रोटियां खाये... तीन चार बजे किसी फल का रस ले लीजिये... और रात को भी यही भोजन कीजिये... खूब अच्छी तरह समझाया... रोज मेरे यहां वो चिकित्सा के लिये भी आते रहे... क्योंकि प्राकृतिक चिकित्सा इसलिये आवश्यक होती है कि जो वजन घट रहा है, जो अंदर कचरा हो रहा है, वो बाहर निकल जाये... मैं रोज रोज वजन करने के लिये नहीं कहता क्योंकि कभी आपने ज्यादा पानी पी रखा है तो आधा किलो वजन बढ़ जायेगा... कभी पिशाब कर दिया तो आधा किलो घट जायेगा... मैं कहता हूं हर हफ्ते ही वजन करो... तो जरूर कुछ ना कुछ घटा हुआ जरूर दिखेगा...

वो आये... सात दिन के बाद मैंने उनका वजन किया... नहीं घटा... परेशानी हुई... फिर मैंने अपने मन को ढाढ़स दिया और उनको भी समझाया कोई चिंता मत कीजिये अगले हफ्ते घट जायेगा... वो दूसरे हफ्ते भी आते रहे, चौदह दिन आ गये, मैंने उनका वजन किया, वजन नहीं घटा... मैंने कहा, मेरा तो बड़ा नुकसान करेंगे... शहर में जा के गायेंगे कि आरोग्य मंदिर में कुछ होता नहीं है... बड़ी परेशानी हुई... लेकिन परेशानी उनको व्यक्त करने की ताकत नहीं थी... फिर हिम्मत बंधाई, चिंता मत कीजिये, करते रहिये, जरूर घटेगा... तीसरा हफ्ता आ गया, इक्कीस दिन हो गये... संयोग से उस दिन उनकी पत्नी भी साथ आई थीं... मुझे और भी डर लगा, आज भी मशीन पर चढ़ाऊंगा, नहीं घटेगा तो और बड़ी दिक्कत होगी... बड़ी हिम्मत की, मशीन पर चढ़ाया... मेरे तो जमीन पैर के नीचे की सरक गई... एक ग्राम वजन नहीं घटा...चेहरे की हवाइयाँ उड़ गईं... उस हवाईयों को उसकी पत्नी ने भाँप लिया... समझ लिया... उसने कहा, डॉक्टर, परेशान क्यों होते हैं, जो आपने बताया था वो भी खा रहे हैं, जो पहले खाते थे वो भी खा रहे हैं... अब आप बताये वजन कैसे घटेगा...

exercise (hindi): 

1) गोरखपुर से आए व्यापारियों को वज़न घटाने के लिये डॉ० ने क्या सलाह दी?

१) चीनी चिकनाई का प्रयोग करें।

२) उबली सब्ज़ी खाएँ।

३) गेहूँ की रोटी खाएँ।

४) बीज वाले फल खाएँ।

2) वज़न कब लेना चाहिये?

१) हर रोज़ लें।

२) महीने में एक बार लें।

३) साल में एक बार लें।

४) हफ़्ते में एक बार लें।

3) व्यापारियों का वज़न क्यों नहीं घट रहा था?

१) बहुत खाना खाते थे।

२) तला हुआ खाना खाते थे।

३) चीनी चिकनाई वाला खाना खाते थे।

४) रोज़ के खाने के साथ जो बताया था वो भी खा रहे थे।

vocabulary (urdu): 

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transcription (urdu): 

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exercise (urdu): 

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Dr. Vimal K. Modi - 10: Naturopathy, Nutrition

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About This Lesson: 
Dr. Modi talks about the appropriate use of salt in food.
vocabulary (hindi): 

उबली सब्जियां 

Boiled vegetables

शक्ति

Strength

त्वचा रोग

Skin disease

खुजली

Itch

transcription (hindi): 

तो तन और मन का स्वाद अलग है?

अलग है...

तो क्या ये भी सिखाया जाता है यहां पे?

सिखाया नहीं जाता, कराया जाता है... मैं ये ही भोजन कराता हूं... मैं मरीजों को दोपहर को और रात को दो तरह की उबली सब्जियाँ ही देता हूं... उन सब्जियों में नमक मिर्च मसाला कुछ नहीं होता क्योंकि कुछ रोग में मैं नमक मना करता हूं... क्योंकि नमक हमारे भोजन में तीन से पांच ग्राम की ही आवश्यकता होती है... अगर हमारे, नमक हम ज्यादा खा रहे हैं तो हमारे शरीर को बाहर निकालना पड़ता है... और हमारे vital organs अगर कमजोर हैं तो उन्हें शक्ति प्रदान करने के लिये उनको सुरक्षित रखना पड़ेगा, उन्हें आराम देना पड़ेगा... और हम नमक खिला देंगे तो उनको फिर उस नमक को बाहर निकालना पड़ेगा... अपनी मशीनरी उधर काम लगानी पड़ेगी... इसलिये कुछ रोग में, जैसे त्वचा-रोग में, खुजली है, तो मैं नमक मना कर देता हूं इसलिये मैं दो तरह के भोजन तो नहीं बनाता, बिना नमक का ही भोजन बनाता हूं... जिनको नमक खाना होता है वो नमक डाल लेते हैं और जिनको नमक नहीं खाना होता वो बिना नमक के भोजन करते हैं...

तो ये आप, आप एक किस्म की स्वतंत्रता देते हैं उन मरीजों को कि अगर आपको थोड़ा नमक का स्वाद बढ़ाना है तो आप बढ़ा सकते हैं या उसमें भी कोई बंदिश है?

नहीं, बंदिश उतनी की जा सकती है जितना वो बर्दाश्त कर सकें... जितना वो बर्दाश्त करें... मिर्च की बंदिश, मीठे की बंदिश, खटाई की बंदिश... फिर काली मिर्च की, हरी मिर्च की, लाल मिर्च की बंदिश, सब तरफ की बंदिश रहती है... तो नमक के सहारे वो कुछ देर आदी हो जाता है... चल पाता है... सीख पाता है... और मेरी बात मान पाता है...

exercise (hindi): 

1) हमारे शरीर को कितने नमक की ज़रूरत होती है?

१) आठ से दस ग्राम

२) तीन से पाँच ग्राम

३) दस से बीस ग्राम

४) उन्नीस से बीस ग्राम

2) आरोग्य मंदिर में किस प्रकार का खाना बनता है?

१) तीखा खाना

२) बिना नमक का

३) मीठा खाना

४) खट्टा खाना

vocabulary (urdu): 

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transcription (urdu): 

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exercise (urdu): 

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Dr. Vimal K. Modi - 09: Naturopathy, Nutrition

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About This Lesson: 
Dr. Modi describes the mechanics of taste and validity of eating seasonal produce.
vocabulary (hindi): 

ऊब जायेंगे 

Will get bored

अप्राकृतिक स्वाद

Unnatural taste

नैसर्गिक स्वाद

Heavenly, natural taste

अनैसर्गिक स्वाद

Unnatural taste

नमक

Salt

उबली सब्जियां

Boiled vegetables

पेट में रगड़

Abrasion in the stomach

जीभ

Tongue

स्वाद

Taste

transcription (hindi): 

इसके अलावा कुछ ये भी कहा जाता है कि लोग स्वाद के मारे, भोजन बड़ा स्वादिष्ट खा लेते हैं, लेकिन उसकी जो अपनी एक, अपनी एक, प्राकृतिक उसके अंदर एक ताकत है, उसे खत्म कर देते हैं... क्या आप इस बात को मानते हैं?

मानते नहीं हैं, साक्षात सत्य है... स्वाद आप लेकर थोड़े ही पैदा हुये थे... आप जिस देश में रह रहे हैं, उस देश के स्वाद के आप आदी हो गये हैं... आपके माताजी-पिताजी ने जो आपको स्वाद दिया, उस स्वाद से आप फंसे हुये हैं... हमारे साउथ में जो भोजन खाया जाता है, जो दक्षिण प्रदेश में भोजन खाया जाता है, वो हमारे पूर्वी जगह नहीं खाया जाता... और शायद अगर हम दक्षिण में चले जायें तो हमें वो सांभर और वो, खाते खाते हम ऊब जाएँगे क्योंकि हम रोटी सब्जी खाने के आदि हैं... ये हमें सिखाया किसने? हमारे पिता ने, हमारे दादा ने...तो आप स्वस्थ भोजन कीजिये, प्राकृतिक भोजन कीजिये... ये मैं मानता हूं कि आपका पुत्र उसको नहीं अपनायेगा... लेकिन अगर यही परंपरा चलती रही तो आपका पोता जरूर अपनायेगा क्योंकि हमने पारिवारिक परिवेश से सीखा हुआ है... जो सिखाया गया, वो है... और एक बात आपको और बता दूं कि जो भी स्वाद पैदा हुआ है, जो भी अप्राकृतिक स्वाद पैदा किये जा रहे हैं, वो स्वाद मिला कहां से? वो सारा स्वाद हमें प्रकृति ने बताया... रंग हमें कहां से मिला? सब प्रकृति ने दिया... हमने प्रकृति से स्वाद सीखा और उसको नैसर्गिक स्वाद से आनंदित ना होके अनैसर्गिक स्वाद को हम कल्पना करके और उससे आनंदित हो रहे हैं... नमक भोजन में चाहिये... हम नमक डालकर खाते हैं इसलिये हमें नमक की आदत पड़ गई है... हम बिना नमक का खायेंगे तो हमें स्वाद मिलेगा...और इन मसालों ने तो प्राकृतिक स्वाद ही गायब कर दिया है... मुझे तो लगता है अगर आपको मसालेदार सब्जी मिल जाये और आपकी आंख बंद कर दी जाये तो आप पहचान नहीं पायेंगे कि लौकी खा रहे हैं कि परमल खा रहे हैं कि नेनुआ खा रहे हैं, कि भिंडी खा रहे हैं कि मटर खा रहे हैं, क्योंकि वो स्वाद आपका जो है, वो उन मसालों के स्वाद से दब जाता है.

उबली सब्जियाँ खाये, आपको हर बार अलग स्वाद मिलेगा... निमुआ का अलग स्वाद, परमल का अलग स्वाद... अगर नमक ज्यादा भोजन में खाते हैं तो पालक खाइये, पालक में तो नमक ही नमक भरा हुआ है... हर फल में अलग स्वाद है... कमाल की बात है कि स्वाद खट्टा भी है, मीठा भी है, खट्टा मीठा भी है... और आप संतरा जब शुरू में खाते हैं तो थोड़ा खट्टा खाते हैं, फिर थोड़ा खट्टा मीठा खाते हैं, जब जाने लगता है तो आपको मिठास से भरकर चला जाता है... और फिर अगले ऋतु की याद दिलाता रहता है कि इतना मीठा संतरा खाया था... ऋतु की खाईये... हर ऋतु में अलग अलग स्वाद दिये हैं... और एक बात और आपको बता दूं कि ईश्वर ने उस ऋतु में आत्मरक्षा करने के लिये वो फल और सब्जियां दी हैं... गर्मियों में देखिये तरबूजा आता है, खरबूजा आता है, खीरा आता है लौकी, नेनुआ आते हैं... क्योंकि उसमें पानी की मात्रा ज्यादा है, गर्मियों में आपको पानी ज्यादा लेना चाहिये... इसलिये ईश्वर ने ऐसे भोजन और सब्जियां पैदा की हैं, ऐसे फल पैदा किये हैं कि आपको खूब पानी मिले... जाड़ों में वो भोजन नहीं है... तो प्राकृति आपकी रक्षा करती है, प्रकृति को रक्षा करने दीजिये...

स्वाद के मारे न्यारे...

स्वाद के मारे न्यारे... और स्वाद अगर हमें प्राकृति ने दिया है तो उस स्वाद को सीखना शुरू करें... अरे आपको मिर्च खानी है, चर्चरा खाना है तो मिर्च खाइये ना... प्याज खानी है वो तीखा है, लहसुन का अलग स्वाद है... और एक मजे की बात आपको बता दूं... लोग जब मिर्च खाते हैं तो सब्जी में मिला के खाते हैं... सलाद खाते हैं तो दांत में दबा के खाते हैं... तो उनको उस मिर्च का स्वाद, मुझे तो नहीं लगता कि दस प्रतिशत से ज्यादा मुंह में लगता हो... और 90 प्रतिशत जा के पेट में रगड़ पैदा करती है... आपके पूरे शरीर को डिस्टर्ब करती है... अगर मिर्च ही खाना हो तो मिर्च को काटिये, खूब चबाइए, खूब जीभ पर रगड़िए और खूब उसकी हाय हाय का आनंद लीजिये... तो पूरा का पूरा आप लाभ ले पायेंगे ना... और तब बचा हुआ पेट में डालेंगे... क्योंकि हर चीज का स्वाद तो केवल जीभ में है... कभी आप कल्पना कीजिये, किसी पार्टी में खड़े होईये कि लोग भोजन करने में कितना समय लगाते हैं... सात मिनट... प्लेट लेने से प्लेट नीचे रखने तक... और वो भोजन बना कितने सालों में है? तीन महीने में तो गेहूं ने पैदा करके गेहूं पैदा किया... फलों ने छः छः महीने तक पेड़ पर लटक के पक तैयार हुये... और आप खाते हैं सात मिनट में... जिसलिये खाते हैं उसका ही स्वाद नहीं लेते... जीभ पर स्वाद लीजिये... हर भोजन को जीभ पर तब तक रखिये जब तक उसका स्वाद है... जब स्वाद खत्म हो तभी गले के नीचे उतारिये... देखिये आपके स्वाद में क्या आनंद आयेगा... और आपके उस स्वाद से आपके उस मन के स्वाद को पूरा भोजन मिलेगा...

 

exercise (hindi): 

1) हमें प्राकृतिक स्वाद कहाँ से मिलता है?

१) खाने से

२) प्रकृति से

३) माता पिता से

४) नमक और मसालों से

2) गरमियों में अधिक पानी की मात्रा वाले फल और सब्ज़ी कौन से हैं?

१) तरबूज

२) खरबूजा

३) लौकी

४) सब

3) शरीर के किस अंग से हमें स्वाद मिलता है?

१) दाँत से

२) जीभ से

३) पेट से

४) मुँह से

vocabulary (urdu): 

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transcription (urdu): 

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exercise (urdu): 

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Dr. Vimal K. Modi - 08: Naturopathy, Nutrition

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About This Lesson: 
Dr. Modi talks about eating "live foods."
vocabulary (hindi): 

ऋतु की सब्जियां 

Seasonal vegetables

अंकुरित अनाज

Sprouted grain

शक्ति

Strength

सोयाबीन

Soybean

सुपाच्य

Easily digestible

पचने लायक

Can be digested

transcription (hindi): 

ऋतु की सब्ज़ियाँ खानी चाहिये... ऋतु के फल खाने चाहिये... क्योंकि ऋतु उनकी उपज को बढ़ाती है... उस समय किसानों को दवाओं का प्रयोग नहीं करना पड़ता, खाद नहीं देनी पड़ती और उसकी उपज बहुत होती है... तो आप उन दवाओं से भी बचेंगे... उन खाद के तकलीफों से भी बचेंगे... इसलिये ऋतु के फल और ऋतु की सब्जियां खाइये तो बहुत अच्छा रहेगा... अंकुरित अनाज खाये... क्योंकि अब ये झगड़ा बहुत शुरू हो गया है कि दूध हमें सही मिल रहा है कि नहीं मिल रहा है... दूध pasteurised मिल रहा है, दूध packed हो के मिल रहा है... मैं तो ये मानता हूं कि जरूर उसमें कुछ न कुछ है जो उसे सुरक्षित करती है... और वो सुरक्षित जो चीज कर रही है वो आपके शरीर से निकलती नहीं है... तो अगर आप इस झगड़े में पड़ रहे हैं कि दूध सही मिल रहा है कि नहीं मिल रहा है, तो मेरी राय से अंकुरित अनाज खाना शुरू कीजिए, दूध की कमी की पूर्ति हो जाएगी... अंकुर निकलना चाहिए... बहुत भ्रम है कि अंकुर जितना बड़ा निकलेगा, उतना स्वास्थ्य मिलेगा... बिल्कुल नहीं... कम से कम अंकुर निकलना चाहिए... क्योंकि उसके अंदर इतनी शक्ति बढ़ी हुई है कि वो अंकुर पैदा कर सकती है... वो शक्तिवान अनाज आपके शरीर में जब जाएगा तो वो शक्ति देगा और रोग को निकाल बाहर फेंकेगा...  

दूध सही मिल रहा है, जरूर प्रयोग करें, दही सही मिल रहा है, जरूर प्रयोग करें... लेकिन अगर उस झगड़े में हैं तो न प्रयोग करें...

बहुत सा विज्ञापन हो रहा है अंडा रोज खाना चाहिये... रोज अंडा खाये... लेकिन मैं आपको ये बता दूं कि अंडे में आठ प्रतिशत प्रोटीन होता है... दालों में बीस से बास प्रतिशत प्रोटीन होता है... और अगर हम सोयाबीन की दाल खाते हैं तो हमें लगभग पैंतीस प्रतिशत प्रोटीन मिलता है, जो सर्वोत्तम है और सबसे अधिक है... तो अगर हम प्रोटीन की लालच से अंडा खा रहे हैं, तो अंकुरित अनाजों को खाये... और जब वो अंकुरित अनाज होते हैं तो उसके अमाइनो एसिड के बॉण्ड बड़ी आसानी से टूट जाते हैं... सुपाच्य हो जाता है... पचने लायक हो जाता है...

 

exercise (hindi): 

1) ऋतु की सब्ज़ियाँ दूसरी सब्ज़ियों से कैसे अलग हैं?

१) किसान दवा का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

२) खाद नहीं देनी पड़ती है।

३) ऋतु से फलों और सब्ज़ियों की उपज बढ़ती है।

४) सब

2) अगर दूध सही नहीं मिल रहा है तो उसकी जगह क्या खाना चाहिये?

१) अंकुरित अनाज

२) मांस मच्छी

३) मिठाई

४) पनीर

3) प्रोटीन की मात्रा किस खाने में ज़्यादा होती है?

१) अंडे में

२) मांस में

३) सोयाबीन की दाल में

४) अंकुरित अनाज में

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transcription (urdu): 

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exercise (urdu): 

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Dr. Vimal K. Modi - 07: Naturopathy, Nutrition

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About This Lesson: 
Dr. Modi explains about the changed nature of foods, and how to properly use them.
vocabulary (hindi): 

नैचुरोपैथी 

Naturopathy

छिलके सहित फलों को खाना चाहिये

Should eat fruits with the peel

खुज्जा

Fiber

नमी

Moisture

transcription (hindi): 

हाईजीन से ही बहुत ज्यादा जुड़ी एक चीज होती है न्यूट्रिशन... आप क्या खाते हैं? किस तरह खाते हैं? और कितना खाते हैं? और आपके नैचुरोपैथी में, जो प्राकृतिक चिकित्सा है, इसमें न्यूट्रिशियन का एक बहुत बड़ा हिस्सा है... वो आप हमें जरा विस्तार से समझाये...

भोजन वो भोजन नहीं है जो पच्चीस साल पहले था... वो सब्जियां नहीं हैं जो पच्चीस साल पहले थीं... वो फल नहीं हैं जो पच्चीस साल, तीस साल पहले थे... पहले, तीस साल पहले जब मैं पिताजी के साथ काम करता था, तो पिताजी कहा करते थे कि छिलके सहित फलों को खाना चाहिए... छिलके में खुज्जा हुआ करता था... और अब व्यापारियों ने उन सब छिलकों में ज़हर डुबो दिया है... सेब पर रंग का स्प्रे होता है... दवाओं का स्प्रे होता है... यहां तक कि उसपे प्लास्टिक की कोटिंग होती है कि उस पर से moisture निकल ना जाये... फलों के अंदर की जो नमी है वो बाहर ना निकल जाये... वो प्लास्टिक उसे बचाये रखता है... अब आप, मुझे आप ही बताईये कि उन छिलकों को आप खायेंगे तो ज़हर खायेंगे... इसलिये आज के परिवेश में, उन सब फलों को जो छीलकर खाये जा सकते हैं उन्हें छीलकर ही खाना चाहिये... ये जरूर है कि पहले एक सेब छिलके सहित खाकर जो हमें खुज्जा प्राप्त होता था वो इस समय आपको दो सेब खाकर प्राप्त होगा... लेकिन जो खुज्जा आप ज़हर के छिलके सहित खायेंगे वो बहुत नुकसान करेगा... इसलिये मेरी तो राय है कि इस समय फल और सब्जियों को, जो छील कर खाई जा सकती हैं उन्हें छील कर खाना ही चाहिये...

exercise (hindi): 

1) फलों को किस प्रकार खाना चाहिये?

१) फलों को छील कर खाना चाहिये।

२) फलों को काट कर खाना चाहिये।

३) फलों को बिना छीले खाना चाहिये।

४) फलों के बीज निकाल कर खाना चाहिये।

vocabulary (urdu): 

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transcription (urdu): 

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exercise (urdu): 

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Nutrition - Seasonal

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About This Lesson: 
Mr. Prajapat talks about the kinds of seasonal foods he eats.
vocabulary (hindi): 

आलू 

 

Potato

गोभी

 

Cauliflower

मटर

 

Peas

भिन्डी

 

Okra

घेवड़ा

 

Belongs to squash family

लौकी

 

Squash

लाख रुपये का गल्ला

 

A vessel in which traders put their money-10 thousand rupees in the vessel

धान गेहूं की

 

Husk of wheat

सरसों

 

Mustard

transcription (hindi): 

विक्रम प्रसाद प्रजापद जी...

हां...

हमें ये बतायें कि मौसम के साथ

हूं... हूं...

जो बदलाव आते हैं आपके जीवन में, खान पान में क्या बदलाव आते हैं?

खान पान में भी बदलाव आता है...

किस प्रकार?

जैसे कि ये ठंडी मौसम है... तो ठंडी मौसम में थोड़ा पन अलग रहता है, गर्मी में कुछ अलग रहता है...

क्या क्या रहता है? बतायें...

(हंसते हैं)

आप सर्दी में क्या खाते हैं और गर्मी में क्या खाते हैं?

सर्दी में ज्यादातर रोटी सब्जी खाते हैं...

किस प्रकार की सब्जी?

यही (हंसते हुये) जो अपने खेत में उगाते हैं हम लोग...

नाम लीजिये...

आलू, गोभी, मटर...

और दूसरे मौसम में क्या खाते हैं?

दूसरे मौसम में जो जैसा होता है... जैसे गर्मी में भिंडी होता है, घेवड़ा होता है, लौकी होता है... जैसा मौसम रहता है वैसा अपना इस्तेमाल करते हैं...

exercise (hindi): 

1) मौसम के साथ खान-पान में क्या-क्या बदलाव आते हैं?

१) सर्दी में भिण्डी खाते है।

२) गर्मी में गोभी खाते हैं।

३) गर्मी में लौकी खाते हैं।

४) गर्मी में मटर खाते हैं।

vocabulary (urdu): 

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transcription (urdu): 

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exercise (urdu): 

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Public Health, Nutrition - Dr. Rahul Modi: 10

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vocabulary (hindi): 

आरोग्य संस्थान 

 

Arogya Center

प्रांगण

 

Courtyard/enclave

जागरूकता

 

Awareness

बीमारी

 

Illness

कार्यशाला

 

Workshop

योगासन

 

Poses of Yoga

प्राणायाम

 

A yogic exercise

परिवर्तन

 

Change

स्वस्थ

 

Healthy

परवरिश

 

Raising

आंगनबाड़ी

 

Nurses of medical college who train women on nutrition and health

नर्सिज़

 

Nurses

ट्रेंड

ट्रेन

Train

घरेलू

 

Home made

आयरन की कमी

 

Deficiency of Iron

गुड़

 

Raw sugar

लोहे की कढ़ाई

 

Skillet made of iron

आयरन

 

Iron

हाथ

 

Hands

विटामिन डी

 

Vitamin D

जलन

 

Burning

पेशाब की जलन

 

Burning of urine

हल्का सा तेल लगा लें

 

Lightly put the oil

कुल्ला कर

 

After Rinsing/washing the mouth

हरी सब्जी

 

Green vegetable

transcription (hindi): 

आरोग्य संस्थान के प्रांगण के बाहर...

हूं...

की भी जागरूकता जरूरी है...

जी...

उस क्षेत्र में आपने क्या क्या कार्य किये है?

इसके लिये हम कोशिश करते हैं कि जहां, कहीं, जैसे, आजकल हर बीमारी के नाम से एक दिन, दिवस मनाया जाता है, World Diabetes Day, World Heart Day, Arthritis Day, इन सब, जब दिवस मनते हैं तो हम लोगों को, या तो अपने यहां कार्यशाला करते हैं या कोई कार्यशाला कर रहा होता है तो उसकी कार्यशाला में जाते हैं... लोगों को भोजन के बारे में, योगासन के बारे में, प्राणायाम के बारे में बताते हैं... कहते हैं कि आप अपने शरीर को कैसे ठीक रख सकते हैं... कैसे आप अपने भोजन में थोड़े परिवर्तन करके, क्या खाना है, क्या नहीं खाना है, क्या कम खाना है और क्या ज्यादा खाना है, ये करके, अपने शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं... कभी लड़कियों का स्कूल होता है, वहां, मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि हम लडड़ियों को सिखायें... क्योंकि एक लड़की अधिकतर घर में रहती है... एक लड़की आगे जाकर मां बनती है... कि, अगर मां, और, वही अपने पति को, अपने हस्बैंड को, अपने बच्चों को, अपने पूरे घर का भोजन उसके हाथ में रहता है, अपने पूरे बच्चों की परवरिश उसके हाथ में रहती है... तो कभी भी, जब हम कोशिश करते हैं कि हम लड़कियों के साथ काम करें... हम उस, उनको सिखायें... यहां आंगनबाड़ी की महिलाएं आती हैं... ए.एन.एम., मैडिकल कॉलेज के नर्सेज़ होती हैं, उनको ट्रेन करते हैं, और उनको घरेलू बातें बताते हैं कि आप आयरन की कमी की जगह गुड़ खा लें... लोहे की कड़ाही में अपना खाना बनायें, इससे आपको आयरन मिलेगा... आप धूप में बैठें... अपने हाथ, हाथ को धूप में रखें... इससे आपको विटामिन-डी मिलने लगेगा... आपको पानी पीना चाहिये, अगर आपको जलन हो रही है... महिलाओं की पेशाब की जलन हो रही है... आप पानी की मात्रा अपनी बढ़ा लें... आपको उससे लाभ मिलेगा... नहाने से पहले अपने शरीर पर हल्का सा तेल लगा लें और फिर नहायें... आपको किसी कोल्ड क्रीम की, किसी भी artificial chemical की जरूरत नहीं पड़ेगी... सवेरे उठ के ब्रश कर लें, कुल्ला कर लें... आप अगर हरी सब्ज़ी बनायेंगी तो आपका बच्चा हरी सब्जी खायेगा... आप फल खायेंगी तो आपका बच्चा फल खायेगा... ये सारी बातें हम उसको सिखाते हैं, कोशिश करते हैं...

 

exercise (hindi): 

1) लोगों में जागरूकता लाने के लिये डॉक्टर मोदी क्या काम करते हैं?

१) हर बीमारी के नाम से एक दिवस मनाते हैं।

२) गाँव में जाकर प्रचार प्रसार करते हैं।

३) लोगों को बीमारियों के बारे में जानकारी देते हैं।

४) सफ़ाई रखने के लिये बताते हैं।

2) दिवस वाले दिन डॉक्टर मोदी क्या करते हैं?

१) योगासन के बारे में बताते हैं।

२) भोजन के बारे में बताते हैं।

३) लड़कियों को सिखाते हैं कि भोजन में क्या खाना चाहिये और क्या नहीं।

४) ऊपर दिये गए सब

vocabulary (urdu): 

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transcription (urdu): 

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exercise (urdu): 

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Nutrition - Dr. Rahul Modi: 8

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vocabulary (hindi): 

खजूर 

 

Dates

गुड़