UT wordmark
College of Liberal Arts wordmark

Unani Practice

Unani Treatment (4)

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Friendly

मुफीद

Medicines and treatment

दवा-अो-ईफा

 

हब्बे शिफा

Cold

नजला

Stress

दिमाग़ी टैंशन

Insomnia, can't sleep

नींदं नहीं आती है

Anxiety

घबराहट होती है

Attack, attacks

दौरा पड़ जाता है

Cramping in hands and feet

हाथ पैर ऐंठ जाते हैं

Machine used to measure blood pressure, sphygmomanometer

ब्लड प्रैशर नापने की मशीन

Use

इस्तेमाल

Satisfied

तसल्ली

Pulse

नब्ज

Fever

बुखार

transcription (hindi): 

अच्छा मुझे एक बात ये और बतायें कि कोई ऐसी खास एक, एक या दो दवायें, बहुत ही खास, एक तो आपने पुड़िया बताई जो आपकी जादू की पुड़िया है...

जी...

उसके अलावा कुछ यूनानी दवा में, जोकि बाकी लोग भी शायद इस्तेमाल करते हों? कोई ऐसी खास दवायें हैं जिनके नाम आप हमें बता सकते हैं जो बहुत मुफीद मानी जाती हैं... कोई भी ईलाज हो...

दवा-ओ-ईफा की गोली आती है, दवा-ओ-ईफा, और एक गोली आती हैं हब्बे शिफा... जिसको नजला पुराना होता है या दवा-ओ-शिफा हम उसे देते हैं जिसको दिमाग़ी टैंशन, टैंशन जिसको बोलते हैं, टैंशन रहती है बीमारी जिसको, नींद नहीं आती है, घबराहट होती है, या इसी तरीके से हमने बताया दौरा पड़ जाता है, मरीज को, बच्चा हो या बड़ा हो, उसको दौरा पड़ जाता है, हाथ पैर ऐंठ जाते हैं, तो उसको वो दवाई देते हैं हम... वो दवा-ओ-शिफा इसमें बहुत ज्यादा काम करती है...

एक और बात बतायें कि, मैं देख रहा हूं कि आपके पास ब्लड प्रैशर नापने की मशीन भी है और आपके पास आला भी है, स्टैटसकोप...

जी... जी...

ये यूनानी में इसका इस्तेमाल किया जाता है या ये आप एडीशनल एक, ऐलोपैथिक का एक तरीका इस्तेमाल करते हैं, ताकि थोड़ा और गहराई में आप जायें?

इसका ऐसा है, बहुत मरीजों को तसल्ली नहीं होती है ना हाथ से, तो इससे ब्लड प्रैशर को नाप के जरा तसल्ली हो जाती है कि हां भई, बी.पी. चैक कर लिया मेरा, भई नार्मल है, या डाउन हो रहा है या क्या हो रहा है, या क्या हो रहा है... तो उससे थोड़ा मरीज को तसल्ली हो जाती है... वरना तो नब्ज से पता चल जाता है कि ब्लड प्रैशर इसका डाउन हो रहा है या हाई हो रहा है... असल चीज तो नब्ज है... मरीज की तसल्ली के लिये अब हमें थर्मामीटर भी रखना पड़ता है... अब इसको बुखार हो रहा है... वरना तो नब्ज से ही पता चल गया कि भई बुखार ही है इसको... बी.पी. इन्सट्रूमेंट रख लिया वहीं, मरीज को नापने के लिये, कि भई देख लिया कहां इसका ब्लड प्रैशर हाई हो रहा है... मरीज को तसल्ली हो गई कि हां भई मेरा बी.पी. चैक किया... वरना ऐसे कुछ नहीं है, इतना तो पता चल जाता है ऐसे... जी...

translation (hindi): 


 

exercise (hindi): 

कौन सी खास यूनानी दवा है जो बहुत मुफ़ीद मानी जाती है?

1 दवा ओ ईफ़ा

2 हब्बे शिफ़ा

3 सब

4 दवा ओ शिफ़ा

मरीज़ की तसल्ली के लिये हकीम जी क्या इस्तेमाल करते हैं?

1 स्टैट्सकोप

2 थरमामीटर

3 सब

4 बी.पी इन्सट्रूमेंट

vocabulary (urdu): 

Friendly

مفید

Medicines and treatment

دوا الشفا

 

حبّ شفا

Cold

نزلہ

Stress

دماغی ٹینشن

Insomnia, can't sleep

نیند نہیں آتی ہے

Anxiety

گھبراہٹ ہوتی ہے

Attack, attacks

دورا بن جاتا ہے

Cramping in hands and feet

ہاتھ پیر اینٹھ جاتے ہیں

Machine used to measure blood pressure, sphygmomanometer

بلڈ پریشر ناپنے کی مشین

Use

استعمال

Satisfied

تسلّی

Pulse

نبض

Fever

بخار

transcription (urdu): 

اچّھا مجھے ایک بات یہ اور بتائیں کہ کوئی ایسی خاص ایک دوا، ایک یا دو دوائیں، بہت ہی خاص، ایک تو آپ نے پڑیا بتائی جو آپ کی جادو کی پڑیا ہے۔۔۔

جی۔۔۔

اس کے علاوہ کچھ یونانی دوا میں، جو کہ باقی لوگ بھی شاید استعمال کرتے ہوں؟ کوئی ایسی خاص دوائیں ہیں جن کے نام آپ ہمیں بتا سکتے ہیں جو بہت مفید مانی جاتی ہیں۔۔۔ کوئی بھی علاج ہو۔۔۔

دوا الشّفا کی گولی آتی ہے، دوا الشّفا، اور ایک گولی آتی ہے حبِّ شفا۔۔۔ جس کا۔۔۔ جس کو نزلہ پرانا ہوتا ہے یہ دوا الشّفا ہم اسے دیتے ہیں جس کو دماغی ٹینشن، ٹینشن جس کو بولتے ہیں، ٹینشن رہتا ہے بیماری جس کو، نیند نہیں آتی ہے، گھبراہٹ ہوتی ہے، یا اسی طریقے سے ہم نے بتلایا دورا بن جاتا ہے، مریض کو، بچّہ ہو یا بڑا ہو، اس کو دورا پڑ جاتا ہے، ہاتھ پیر اینٹھ جاتے ہیں، تو اس کو وہ دوائی دیتے ہیں ہم۔۔۔ وہ
دوا الشّفا اس میں بہت زیادہ کام کرتی ہے۔۔۔

ایک اور بات بتائیں کہ، میں دیکھ رہا ہوں کہ آپ کے پاس بلڈ پریشر ناپنے کی مشین بھی ہے اور آپ کے پاس آلہ بھی ہے، اسٹیتھسکوپ۔۔۔

جی۔۔۔ جی۔۔۔

یہ یونانی میں اس کا استعمال کیا جاتا ہے یا یہ آپ اڈشنل ایک، ایلوپیتھک کا ایک طریقہ استعمال کرتے ہیں، تاکہ تھوڑا اور گہرائی میں آپ جائیں؟

اس کا ایسا ہے، بہت مریضوں کو تسلّی نہیں ہوتی ہے نہ ہاتھ سے، تو اس سے بلڈ پرشر کو ناپ کے ذرا تسلّی ہو جاتی ہے کہ ہاں بھئی، بی۔پی  چیک کر لیا میرا، بھئی نارمل ہے، یا ڈاؤن ہو رہا ہے، اپ ہو رہا ہے، یا کیا ہو رہا ہے۔۔۔ تو اس سے تھوڑا مریض کو تسلّی ہو جاتی ہے۔۔۔ ورنہ تو نبض سے پتہ چل جاتا ہے کہ بلڈ پریشر اس کا ڈاؤن ہو رہا ہے یا ہائی ہو رہا ہے۔۔۔ اصل جیز تو نبض ہے۔۔۔ مریض کی تسلّی کے لئے اب ہمیں تھرمامٹر بھی رکھنا پڑتا ہے۔۔۔ اب اس کو بخار ہو رہا ہے۔۔۔ ورنہ تو نبض سے ہی پتہ چل گیا کہ بھئی بخار ہی ہے اس کو۔۔۔ بی۔ پی۔ انسٹرمنٹ رکھ لیا وہیں، مریض کو ناپنے کے لئے، کہ بھئی دیکھ لیا کہاں اس کا بلڈ پریشر ہائی ہو رہا ہے۔۔۔ مریض کو تسلّی ہو گئی کہ ہاں بھئی میرا بی۔ پی۔ چیک کیا۔۔۔ ورنہ ایسے کچھ نہیں ہے، اتنا تو پتہ چل جاتا ہے ایسے۔۔۔ جی۔۔۔

exercise (urdu): 

کونسی خاص یونانی دوا ہے جو بہت مفید مانی جاتی ہے؟

1 دوا الشّفا

2 حبِّ شفا

3 یہ سب

4 دوا الشّفا

مریض کی تسلّی کے لئے حکیم صاحب کیا استعمال کرتے ہیں؟

1 اسٹتھوسکوپ

2 تھرمامٹر

3 سب

4 بی۔پی۔ انسٹرمینٹ

Faith

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

 

तजदीद

 

Written

लिख के

 

Amulets

ताबीज

 

The holy Koran

कुरान शरीफ

 

Cure, remedy, treatment

ईलाज

इलाज

Physical, bodily

जिस्मानी

 

Spiritual

रूहानी

 

Verses

आयतें

 

Patient

मरीज

 

Incurable

लाईलाज

लाइलाज

Body

शरीर

 

To burn

जलाना

 

To drink

पीना

 

Making a solution in water

पानी में घोल करके

 

Empty stomach

खाली पेट

 

Peace, respite

सुकून

 

Pain in the knee

घुटने में दर्द

 

Pain in the hip

कमर में दर्द

 

 

रसौली

 

Rub and burn

मल के जलाना

 

Medication, drug, medicine

दवाई

 

Spiritual strength

रूहानी ताकत

 

Treatment

शिफा

 

Unani doctor

हकीम

 

Loneliness

तन्हाई

 

Patient

मरीज

 

The zeal to serve

खिद्मत का जज्बा

 

transcription (hindi): 

एक और जब मैं आपसे कैमरे के अलावा बात कर रहा था तो आपने कहा था कि एक वो कुछ तज दीद आप लिख के दे देते हैं...

हूं...

काग ज पे...

जी-जी... ताबीज ...

उसके बारे में, उसके बारे में आप मुझे बतायें, क्या है वो?

ताबीज होता है वो...

जी...

हमारे जो कुरान शरीफ है, कुरान शरीफ, उसके अंदर हर तरह का ईलाज है, जिस्मानी भी, रूहानी भी... उसके अंदर कुछ ताबीज ऐसे, ऐसी-ऐसी आयतें होती हैं जिनको हम लिख के, कागज़ पर देते हैं... जैसे मान लो, कोई मरीज है, और डॉक्टरों ने उसको लाईलाज कह दिया कि इसका कोई ईलाज नहीं है... अगर कुछ दिन उसका ईलाज किया जाये, जैसे हम ताबीज लिखकर दे देते हैं, इसको सारे शरीर को मिलके जलाना है... और एक ताबीज लिख के दे दिया, भई, इसको पीना है, पानी में घोल करके, सुबह के टाईम, खाली पेट पीना है... तो उससे उस मरीज को काफी राहत मिलती है, बहुत आराम मिलता है और वो आ के कहता है कि हां, मुझे काफी आराम है... बहुत सुकून है... बहुत से मरीज ऐसे भी आये के भई घुटने में दर्द हो रहा है या कमर में दर्द हो रहा है, अभी हमारे पास एक और आता है जिसके यहां, राईट साईड में, रसौली बताई थी डॉक्टरों ने... हमने उसको ताबीज दिये, मल के जलाना है जी ये, एक ताबीज है, इसको खाली पेट पीना है, एक उसके साथ हमने दवाई लगा रखी थी पीने के लिये, डाईजैस्टिव, तो अभी वो कल आई थी मेरे पास, तो वो बतला रही थी कि वो पेट की जो रसोली है वो, मुझे लग रहा है कि बहुत कम होती जा रही है... काफी आराम मिल रहा है इसमें...

तो आप क्या ये मानते हैं कि जो यूनानी ईलाज है...

जी...

यूनानी दवायें हैं...

जी...

इसमें रूहानी ताकत का बहुत बड़ा हाथ होता है?

रूहानी ताकत का बहुत बड़ा हाथ है... हम लोग जो लिखते हैं, उसके ऊपर लिखते हैं नुस्खे के ऊपर लिखते हैं ............ यानि कि शिफा देखने वाला ऊपर वाला है, खुदा है... हमारा तो सिर्फ काम है, दवाई दे दी... अब ऊपर वाला इसमें मदद करेगा... शिफा देगा... और वो देता है... ऊपर से मदद होती है इसके अंदर... अब हकीम लोग जो होते थे वो सिर्फ ये नहीं है कि सिर्फ मरीज को दवाई दे दी, बस चलो, ठीक हो जायेगा... रात में, तन्हाई में, उसके लिये दुआ भी करते थे... भई ये मेरा मरीज, अल्लाह इसको शिफा देना... इसको मुकम्मल शिफा देना... वहां लालच नहीं होता है... एक, कौम की खिद्मत का जज्बा होता है, हकीमो को...

तो आप भी जब नमाज पढ़ते हैं तो आप भी दुआ मांगते हैं?

बिल्कुल मांगते हैं...

हर मरीज के लिये दुआ?

हर मरीज के लिये... बल्कि उठते-बैठते भी यही कहता हूं, ऐ मालिक सच्चे, कर दे सबको अच्छे...

translation (hindi): 

 

 


exercise (hindi): 

हकीम जी दवाइयों के साथ रूहानी इलाज भी करते हैं, कैसे?

1 नुस्खें के ऊपर ताबीज़ लिख कर देते हैं

2 हर रात मरीज़ों के लिये दुआ करते हैं

3 सब इलाज करते हैं

4 नमाज़ पढ़ते हुए मरीज़ों के लिये दुआ भी माँगते हैं

vocabulary (urdu): 




Written

لکھ کے


Amulets

تعویذ


The holy Koran

قرآن شریف


Cure, remedy, treatment

علاج


Physical, bodily

جسمانی


Spiritual

روحانی


Verses

آیتیں


Patient

مریض


Incurable

لاعلاج


Body

شریر


To burn

جلانا


To drink

پینا


Making a solution in water

پانی میں گھول کر کے


Empty stomach

خالی پیٹ


Peace, respite

سکون


Pain in the knee

گھٹنے میں درد


Pain in the hip

کمر میں درد



رسولی


Rub and burn

مل کے جلانا


Medication, drug, medicine

دوائی


Spiritual strength

روحانی طاقت


Treatment

شفا


Unani doctor

حکیم


Loneliness

تنہائی


Patient

مریض


The zeal to serve

خدمت کا جذبہ


transcription (urdu): 

ایک اور جب میں آپ سے میں کیمرے کے علاوہ بات کر رہا تھا آپ نے کہا تھا کہ ایک وہ کچھ تجویذ آپ لکھ کے دے دیتے ہیں۔۔۔

 

ہوں۔۔۔

 

کاغذ پہ۔۔۔

 

جی، جی۔۔۔ تعویذ ۔۔۔


اس کے بارے میں، اس کے بارے میں آپ مجھے بتائیں، کیا ہے وہ؟

 

تعویذ ہوتا ہے وہ۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

ہمارے جو قرآن شریف ہے، قرآن شریف، اس کے اندر ہر طرح کا علاج ہے، جسمانی بھی، روحانی بھی۔۔۔ اس کے اندر کچھ تعویذ ایسے، ایسی ایسی آیتیں ہیں جن کو ہم لکھ کے، کاغذ پر دیتے ہیں۔۔۔ جیسے مان لو، کوئی مریض ہے، اور ڈاکٹروں نے اس کو لاعلاج کہ دیا کہ اس کا کوئی علاج نہی ہے۔۔۔ اگر کچھ دن اس کا علاج کیا جائے، جیسے ہم تعویذ لکھ کر دے دیتے ہیں، اس کو سارے شریر کو مل کے جلانا ہے۔۔۔ اور ایک تعویذ لکھ کے دے دیا، بھئی، اس کو پینا ہے، پانی میں گھول کر کے، صبح کے ٹائم، خالی پیٹ پینا ہے۔۔۔ تو اس سے اس مریض کو کافی راحت ملتی ہے، بہت آرام ملتا ہے اور وہ آ کے کہتا ہے کہ ہاں، مجھے کافی آرام ہے۔۔۔ بہت سکون ہے۔۔۔ بہت سے مریض ایسے بھی آئے کہ بھئی کھٹنے میں درد ہو رہا ہے یا کمر میں درد ہو رہا ہے، ابھی ہمارے پاس ایک اور آتا ہے جس کے یہاں، رائٹ سائڈ میں، رسولی بتائی تھی ڈاکٹروں نے۔۔۔ ہم نے اس کو تعویذ دیے، مل کے جلانا ہے جی یہ، ایک تعویذ ہے، اس کو خالی پیٹ پینا ہے، ایک اس کے ساتھ ہم نے دوائی لگا رکھی تھی پینے کے لئے، ڈائجیسٹو، تو ابھی وہ کل آئی تھی میرے پاس، تو وہ بتلا رہی تھی کہ وہ پیٹ کی جو رسولی ہے وہ، مجھے لگ رہا ہے کہ بہت کم ہوتی جا رہی ہے۔۔۔ کافی آرام مل رہا ہے اس میں۔۔۔

 

تو آپ کیا یہ مانتے ہیں کہ جو یونانی علاج ہے۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

اس میں روحانی طاقت کا بہت بڑا ہاتھ ہوتا ہے؟

 

روحانی طاقت کا بہت بڑا ہاتھ ہے۔۔۔ ہم لوگ جو لکھتے ہیں، اس کے اوپر لکھتے ہیں نسخے کے اوپر لکھتے ہیں۔۔۔ یعنی کہ شفا دینے والی ذات ہے، اوپر والی ذات ہے، خدا ہے۔۔۔ ہمارا تو صرف کام ہے، دوائی دے دی۔۔۔ اب اوپر والا اس میں مدد کریگا۔۔۔ شفا دیگا۔۔۔ اوپر وہ دیتا ہے۔۔۔ اوپر سے مدد ہوتی ہے اس کے اندر۔۔۔ اب حکیم لوگ جو ہوتے تھے وہ صرف یہ نہیں ہے کہ صرف مریض کو دائی دے دی، بس چلو، ٹھیک ہو جائیگا۔۔۔ رات میں، تنہائی میں، اس کے لئے دعا بھی کرتے تھے۔۔۔ بھئی یہ میرا مریض، اللّہ اس کو شفا دینا۔۔۔ اس کو مکمّل شفا دینا۔۔۔ وہاں لالچ نہیں ہوتا ہے۔۔۔ ایک، قوم کی خدمت کا دل میں جذبہ ہوتا ہے، حکیموں کو۔۔۔

 

تو آپ بھی جب نماز پڑھتے ہیں تو آپ بھی دعا مانگتے ہیں؟

 

بالکل مانگتے ہیں۔۔۔

 

ہرمریض کے لئے دعا؟

 

ہر مریض کے لئے، ہر مریض کے لئے۔۔۔ بلکہ اٹھتے بیٹھتے بھی یہی کہتا ہوں، اے مالک سچّے، کر دے سب کو اچّھے۔۔۔

exercise (urdu): 

حکیم جی اپنی دوائیوں کے ساتھ روحانی علاج بھی کرتے ہیں، کیسے؟

1 نسخے کے اوپر تعویذ لکھ کر دیتے ہیں

2 ہر رات مریضوں کے لئے دعا کرتے ہیں

3 یہ سب چیزیں کرتے ہیں

4 نماز پڑھتے ہوئے مریضوں کے لئے دعا بھی مانگتے ہیں

Unani History and Treatment

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Belief, faith

यकीन

Treatment

ईलाज

Hereditary treatment

खानदानी ईलाज

Guru-disciple tradition

गुरु शिष्य परंपरा

Became bounded

दायरे में बंध गये

Disease, illness

बीमारी

Pulse

नब्ज़

Use

इस्तेमाल

 

नब्बाज़

In a country village

गांव-देहातों में

Medicines

दवाईयां

Written

कलमबंद

Resourcefulness

हिकमत

Few medicines

चंद दवाईयां

Jungle, forest

जंगल

Were making themselves

अपने आप बनाते थे

Pill

गोली

 

सदैला

Herb

बूटी

Precedents

मिसालें

Hereditary

खानदानी

On pimples and boils

फोड़े-फुन्सियों पे

Ointment, balm, salve

मरहम

Awareness, vigilance

जागरूकता

Bone treatment

हड्डियों का ईलाज

Hand

हाथ

Distraught, vexed, troubled, worried

परेशान

Life

ज़िंदगी

Livelihood

रोज़ी-रोटी

Became bad

खराब हो गया

Faith, belief

यकीन

Orthopedist, bone specialist

हड्डियों का डॉक्टर

What does not die

मरता क्या नहीं करता

Broken down, finished

बरबाद

Will bear

झेल लूंगा

Well-built people

मुस्टंडे पहलवान

Rolling pin

बेलन

Screamed

चींख मार पड़े

Oh! I'm dead!

हाय मरा

Bones

हड्डियां

Country herbal paste

देसी लेप

Bandage

पट्टी

Herbal paste

लेप

Medicine, drug

दवाई

A glass of milk

एक गिलास दूध

Milk

दूध

Cream

मलाई

Fat

मोटा

Betel leaves

पान

Lime, mortar

चूना

transcription (hindi): 

वैसे ये तो एक यकीन की बात है लोगों के... जहां तक साईंटीफिकल ट्रीटमेंट की बात है, तो साईंटीफिकली अगर किसी को ईलाज दिया जा रहा है, तो जहां तक मेरी अपनी सोच है, वो बैटर ट्रीटमेंट है... मैं ये नहीं कह रहा के जो खानदानी ईलाज चला आ रहा है, या जो गुरु शिष्य परंपरा के ज़रिये ईलाज चला जा रहा है, आ रहा है, वो कम है... बेसिकली यूनानी तो आये ही गुरू शिष्य परंपरा के थ्रू दुनिया में है... और यहां तक देखा गया है कि वो लोग ज्यादा परफैक्ट रहे हैं ईलाज के मामलों में, आज की थ्योरी से... हम लोग तो एक दायरे में बंध गये के, एक लिमिटेशन्स है हमारी, हमने ये पढ़ना है, ये डायग्नोसिस का प्रोसीज़र है, इस सिस्टम पे चलोगे तो ये बीमारी है, इस सिस्टम पे चलोगे ये बीमारी है... आज हम, बेसिकली वैसे भी हम तो नब्ज़ देख के ही ईलाज करते हैं, ये स्टैथो रखा जरूर है और ये ब्लड प्रैशर भी, हम सिर्फ आज की डेट की माडर्न ट्रीटमेंट का सहारा लेने के लिये इसे इस्तेमाल करते हैं, नब्ज़ देख के ही ईलाज देते हैं हम... लेकिन हमसे कई सौ गुणे ज्यादा नब्बाज़ थे वो लोग, जो पहले खानदानी ईलाज लिया करते थे... लेकिन आज की डेट में बैठे हुये लोगों में एक तो इतनी इंटैलीजैंसी नहीं बची, ह्यूमन ब्रेन पहले के मुकाबले आज डवलप नहीं है, मेरी सोच के मुताबिक... पहले तीन सौ साल पहले, तीन हजार साल पहले मिस्र में जो सर्वेरियां हुई हैं, जो ममीज़ मिली हैं, जो उनपे ऑपरेशन हुये मिले हैं, जो डैड बॉडीज़ मिली हैं, अभी तक हम वहां तक पहुंच भी नहीं पाए हैं... ऐसे, एक बुक मैंने पढ़ी थी उसमें, मिस्र में ऐसे दीये जलते हुये मिले हैं जो पुराने, तेंतीस सौ साल, चौंतीस सौ साल से लगातार जल रहे हैं और जो उसमें मैटीरियल पड़ा है, वो जस्ट 25% या 40%, 50% यूज़ हुआ है... यानि वो अभी इतने ही साल तक और जल सकते हैं... मिस्र में ऐसे दीये मिले हैं... तो उस वक्त का साईंस, जब मशीनरी नहीं थी, कितना डवलप रहा होगा... तो उन लोगों को हम पूरी तरह से इग्नोर तो नहीं कर सकते जो यूनानी सिस्टम को चला रहे हैं, गांव-देहातों में जो इस सिस्टम को आज चला रहे हैं... हां, लेकिन, आज की डेट में उसे क्वालीफाईड टच देना इसलिये जरूरी है के जो चीज हमारी रेयर होती चली गई हैं, बहुत, सारा सिस्टम, बहुत सारी दवाईयां खो चुकी हैं... बहुत सारा आज हम खो चुके हैं... क्योंकि मान लिया किसी के वालिद मोहतरम को ईलाज आता था, उन्होंने, आज भी ये परंपरा गांव-देहात में बड़ी चलती है... वो फार्मूले नहीं बताते अपने और ना ही इन्हें कलमबंद करते हैं, लिखते भी नहीं हैं... मेरे मामू हकीम अब्दुल वाहिद शल्फी, हकीम हुये हैं, बड़े पॉपुलर हुये हैं, 94 साल की ऐज में उनका 1994 में देहान्त हो गया है और वो नजीबाबाद, यू.पी. में हिकमत की प्रैक्टिस किया करते थे... क्वालीफाईड हकीम थे, उन्होंने देहरादून से 1918 में बी.यू.एम.एस. किया था...लेकिन वो क्वाईट इंटीलीजैंट आदमी थे... उनके यहां कैंसर का जो ईलाज, मेरी, जब मैं स्टूडैंट यूनानी था, मैंने देखा है कि उनके यहां कैंसर के इतने मरीज आते थे और इतने ठीक हुआ करते थे, आज उनकी बताई हुई कुछ, चंद दवाईयां, जो मैं उनके साथ, जो जंगल में वो कलैक्ट किया करते थे ना, अपने आप बनाते थे वो सारी दवाई, सैल्फ फॉरमेशन थी उनकी, उन्होंने कोई गोली बाजार से नहीं खरीदी थी, किसी को कोई चटनी मंगा के नहीं दी... वो सैल्फ फॉरमेशन किया करते थे... हमारे भी अब पढ़ाया जाता है, सैदला एक डिपार्टमेंट है, जिसमें हमें मैडीसन की फॉरमेशन सिखाई जाती है... मैं भी कोशिश करता हूं के कुछ दवाईयां, पेशैंट अगर चाहता है, तो हम लोग अपनेआप बनवा के देते हैं उन्हें... वो कॉस्टली तो पडती हैं मार्किट से, एक कमर्शियल पर्पस से बनाई हुई और एक जस्ट ट्रीटमेंट परपस से बनाई हुई... फिर कई बार ऐसा होता है, बूटी लेने के लिये हमें देहरादून की पहाड़ियों तक जाना पड़ता है... नजीबाबाद मेरा बेसिक रहा है तो नजीबाबाद से हमें काफी-कुछ बूटियां मिल जाती हैं... खेत हैं हमारे, उनसे मिल जाती हैं... तो हमारे मामू वो ईलाज किया करते थे... और कैंसर के बहुत सारे मरीज मैंने अपनेआप ठीक होते देखे हैं... ऐसी कई मिसालें हैं, लेकिन हम मैं उनसे पूछता था, मामू आज ईलाज क्या देते हो, मुझे बता दो, तो वो कहते थे, अरे अभी मैं कौन सा मरा जा रहा हूं... दे जाऊंगा, मैं तुझे बता के जाऊंगा... और इत्तफाक से मैं दिल्ली में था, उन्हें हार्ट अटैक आया, वो चले गये...ना तो उन्होंने अपने फार्मूले कलमबंद किये, ना उस सेदला को, जो मैडीसन वो बनाया करते थे, उसे पेपर फार्म में लाये, ना वो उसे, किसी भी तरह से, कुछ भी नहीं छोड़ के गये यूनानी सिस्टम का... और जहां तक मैं समझता हूं ये देश को एक बहुत बड़ा लौस है, उनकी जो नॉलेज थी, जिसे आज ये इंडिया यूज़ नहीं कर रहा है या यूनानी सिस्टम को यूज़ करने वाले हम लोग उसे यूज़ नहीं कर रहे हैं... ये हमारे लिये लौस है... ऐसी खानदानी जो तमाम दवाईयां जो रेयर होती चली गई हैं... पहले फोड़े-फुन्सियों पे मरहम बनाया करते थे लोग, आज भी थाने के पास वो दो-तीन जगह बैठे हैं, बनाते हैं, लेकिन मरहम की, बेसिकली, मैं खुद यूनानी फिज़िशियन हूं, मुझे मरहम बनाना नहीं आता... क्यों? क्योंकि मैं फोड़े-फुन्सी का ईलाज नहीं करता... जबकि ये खानदानी पेशा वाले बड़ा अच्छा मरहम बनाते हैं... लेप बनाते हैं, दर्दों के लेप बनाते हैं... मेरे को जितनी, किताबी जानकारी मुझे अच्छी है, लेकिन किताब के अलावा हटके भी कुछ है... जो आज की डेट में सिर्फ रेयर ही बनाया हुआ है... और पूरी कम्पलीट यूनानी के लिये हमें उन सब चीजों तक भी जाना ही होगा... मेरी अपनी सोच है ये... हमें उनसे भी कुछ चाहिये, उनमें जागरूकता ऐसी पैदा करनी चाहिये कि जो फार्मूले उन लोगों के पास हैं, उन्हें साईंटीफिकली प्रूव करें, थोड़ा सा उनपे रिसर्च करें, उन्हें देखें, क्योंकि मरीज उनसे ज्यादा अच्छे ठीक होते हैं... आप यहीं चले जाईये घोड़े वाली गली में... कट, कट, कट, कट... डॉक्टर साहब आप वहीं से, थोड़ा सा... जहां खत्म किया था आपने... तो सिफा सा आ गया, तो लाईट चली गई थी... तो हमारे मामू ने वो चीजें हम लोगों तक नहीं प्रोवाईड कराई... नतीजा ये हुआ कि जो एक बहुत ब्रॉड जो उनकी रिसर्च, 1918 में उन्होंने बी.यू.एम.एस. में एड्मिशन लिया था, 23-24 में पास हुये थे... सन् 1 की पैदाईश थी उनकी, 1901 की, और 1994 में 94 की एज़ में उनकी डैत्थ हुई... तो इस लंबे पीरियड की, 74-73 साल की प्रैक्टिस में जो उन्होंने रिसर्च की थी, जो जानकारियां हासिल की थी, काश वो कलमबन्द कर गये होते, वो तो एक क्वालीफाईड हकीम थे, ना तो वो किसी को बता के गये, औलाद उनके कोई थी नहीं, तो ये इतनी बड़ी चीज यहीं की यहीं खत्म हो गई... मैं, जबकि एक यूनानी फिजिशियन हूं, मैं भी उनसे बहुत-कुछ गेन नहीं कर पाया... इसी तरह हमारी सिस्टम जो है, जो, आज भी बहुत से गांवों में ऐसे लोग पड़े हैं जिनके खानदान में कभी हकीम हुये हैं और वो हिकमत चला रहे हैं... लेकिन आप उनसे पूछने जाओ के आप फार्मूला क्या यूज करते हो, ना तो वो कलमबन्द करते हैं, ना वो बताते हैं, नतीजा ये होता है कि डे बाए डे, डे बाए डे, ये रेयर ट्रीटमेंट, एक बहुत अच्छी चीजें हैं, वो खत्म होती चली जा रही हैं, दुनिया से... अभी आप यहीं गली घोड़े वाली में जाईये, एक हकीम बैठते हैं, वो हडि्डयों का ईलाज करते हैं, पहलवान हकीम के नाम से... तुर्कमान गेट के पास जो हैं? हां जी, हां जी, यस... तो आप उनके पास जाईये... मैंने वहां एम.एस. ऑरथोपैडिक्स सर्जरी के लोगों को ट्रीटमेंट कराते देखा है अपना... एक एम.एस. का एक्सीडेंट हुआ, ऑरथोपैडिक्स सर्जरी में एम.एस., उनका हाथ यहां से फ्रैक्चर हो गया, फ्रैक्चर होने के बाद उन्होंने ऑपरेट कराया और वो ऑपरेशन भी गलत हो गया... हाथ यूं हो गया उनका... तो मेरे पास आये वो... बोले यार, डॉक्टर मुकीम, परेशान हूं, राईट हैंड है, और ये ही मेरी ज़िंदगी की रोज़ी-रोटी थी... ये खराब हो गया... मैंने कहा डॉक्टर साहब, आप तो सर्जन हैं, दुबारा ऑपरेट करा दो... गंगाराम जा के करा दो, कहीं बढ़िया... उन्होंने कहा, यार एक उसका नाम सुना है, आप मुझे वहां ले चल... मैंने कही, आपको यकीन है, कि यकीन नहीं होता तो मैं आता नहीं... मेरा एक पेशैंट ऐसे ही कभी गया था, वो ठीक हुआ है... मैं उन्हें ले के चला गया वहां... उन्होंने कहा, देखा हाथ, पूछा कि भई तुम कौन हो, तो बोले कि भई मैं डॉक्टर हूं, और हडि्डयों का डॉक्टर हूं... पहले तो वो हंसे... बोले के मूसल, एक इतना बड़ा मुदगल उठा के बोले, इसे झेल लेगा... वो हंसने लगे... के क्या मतलब? के इसे झेल ले तो बता मैं तेरा ईलाज करूंगा... और मरता क्या नहीं करता, उन्होंने कहा, के यार बरबाद तो है ही, ज्यादा खराब होगा तो दोबारा ऑपरेशन पे चला जाऊंगा... मुझसे कहा उन्होंने, के खराब होगा तो दोबारा ऑपरेशन पे चला जाऊंगा... और ठीक हो गया तो देखते हैं भई इन्हें... उन्होंने कहा कि हां जी, मैं तैयार होकर आया हूं, झेल लूंगा... मैंने कहा अच्छा... थोड़ी देर बातें की, उन्होंने चाय पिलवाई, चाय पिलवाने के बाद दो मुस्टंडे पहलवान बुलवाये और बोले, अरे पकडिये इस डॉक्टर का हाथ... (हंसते हुये) इसी लैंग्वेज में... और उन्होंने हाथ पकड़ा और नीचे फ़र्श पर रख दिया... और वो अपना, जैसे, क्या बोलते हैं, बेलन होता है ना खाना बनाने का, इतना मोटा है वो उनके पास... यूं लिया, और यूं हाथ को सीधे रोल कर दिया... डॉक्टर साहब तो चींख मार पड़े... कि हाय मरा... और दोनों ने छोड़ा नहीं... उसे उन्होंने बाई फोर्स उनकी सारी हडि्डयां तोड़ के सीधी कर दी... तोड़ दी हडि्डयां, फ्रैक्चर कर दिया हाथ उनका... डॉक्टर कहने लगे, मैं मर गया... मैं गलत जगह आ गया... मैंने कहा, अरे झेल लेगा... फिर उन्होंने उसपे कोई देसी लेप लगाया, जिसके बारे में वो भी नहीं बताते किसी को, देसी लेप लगाया, यहां पे बांस की लकडियां ली, थोड़े-थोड़े टुकड़े... उन्होंने यहां उन्हें लगाया... और इस तरह से हाथ को ऐसा फिक्स कर दिया, के पूरी तरह से, प्लास्टर की तरह से उन्होंने उसे पट्टी बांध के फिक्स कर दिया, लेप लगा के... और बोले के अब तू तीन हफ्ते बाद आ मेरे पास, तब देखूंगा...मैं डॉक्टर साहब को तीन हफ़्ते बाद लेकर गया, जब हाथ खोला उनका, वैरी स्ट्रेंज, उनका हाथ पूरा सीधा था, जो यूं हो चुका था... जो यूं हो चुका था एक्सीडेंट में, पूरा सीधा था एकदम... उन्होंने एक बार और उसी तरह से पट्टी की और यूं बोले, अब तू तीन महीने में आना... बोले दवाई क्या खाऊं... उन्होंने कहा, कुछ मत खा, एक गिलास दूध सुबह पी, एक गिलास दूध शाम को पी, मलाई हटा दे, तुझे मोटा होने का डर है तो... कैल्शियम उससे मिल जायेगा, बाकी कुछ मत खा... हां, पान खा ले, खाना है तो, चूना लगा के... वो कैल्शियम को बॉडी में डलवाना चाहते थे... दूध की और उसकी शक्ल में वो चली गई... और नाओ ही इज़ ए वैरी गुड सर्जन, इन ऑरथोपैडिक्स सर्जरी... आज वो दिल्ली में ही हैं, मैं नाम उनकी इजाज़त के बगैर अभी बताना नहीं चाहूंगा कैमरे के सामने, अदरवाईज़, कहीं ऐसा, अगर उन्होंने इजाज़त दी, एक बार पूछके, तो दोबारा कभी आपसे गुफ्तगू करने का मौका मिला, तो मैं उन्हें इस कैमरे के सामने फिर से पेश कर दूंगा, अगर उन्होंने इजाज़त दी, क्योंकि ये उनकी प्रैक्टिस को भी इफैक्ट करता है... वो ऑरथोपैडिक सर्जन हैं बेसिकली...

translation (hindi): 

 

exercise (hindi): 

आज के मुकाबले में पहले की पद्धतियाँ क्यों ज़्यादा विकसित थी?

1 मिस्र में सर्जरी होती थीं

2 कैंसर भी कई बार ठीक हो जाता है

3 सब

4 पहले ज़्यादा इंटैलीजैंट लोग थे, खुद ही दवा बनाते थे

आजकल जड़ी बूटियाँ कहाँ से मिलती हैं?

1 देहरादून की पहाड़ियों से

2 नज़ीबाबाद

3 सब

4 नज़ीबाबाद के खेतों से

आजकल कौन सी ऐसी्दवाएँ हैं जो रेयर होती जारही हैं?

1 फोड़े फुन्सी का मरहम

2 दर्दों का लेप

3 सब

4 कुछ दवाएँ जो खुद बनाते थे

vocabulary (urdu): 

Belief, faith

یقین

Treatment

علاج

Hereditary treatment

خاندانی علاج

Guru-disciple tradition

گرو ششیہ پرمپرا

Became bounded

دائرے میں بندھ گئے

Disease, illness

بیماری

Pulse

نبض

Use

استعمال

 

نبّاض

In a country village

گاؤں دیہاتوں میں

Medicines

دوائیاں

Written

قلمبند

Resourcefulness

حکمت

Few medicines

چند دوائیاں

Jungle, forest

جنگل

Were making themselves

اپنے آپ بناتے تھے

Pill

گولی

 

صیدلہ

Herb

بوٹی

Precedents

مثال

Hereditary

خاندانی

On pimples and boils

پھوڑے پھنسیوں پہ

Ointment, balm, salve

مرحم

Awareness, vigilance

جاگرکتا

Bone treatment

ہڈّیوں کا علاج

Hand

ہاتھ

Distraught, vexed, troubled, worried

پریشان

Life

زندگی

Livelihood

روزی روٹی

Became bad

خراب ہو گیا

Faith, belief

یقین

Orthopedist, bone specialist

ہڈّیوں کا ڈاکٹر

What does not die

مرتا کیا نہیں مرتا

Broken down, finished

برباد

Will bear

جھیل لونگا

Well-built people

مسٹنڈے پہلوان

Rolling pin

بیلن

Screamed

چیخ مار پڑے

Oh! I'm dead!

ہائے مرا

Bones

ہڈّیاں

Country herbal paste

دیسی لیپ

Bandage

پٹّی

Herbal paste

لیپ

Medicine, drug

دوائی

A glass of milk

ایک گلاس دودھ

Milk

دودھ

Cream

ملائی

Fat

موٹا

Betel leaves

پان

Lime, mortar

چونا

transcription (urdu): 

ویسے یہ تو ایک یقین کی بات ہے لوگوں کے۔۔۔ جہاں تک سائنٹفکل ٹریٹمینٹ کی بات ہے، تو سائنٹفکلی اگر کسی کو علاج دیا جا رہا ہے، تو جہاں تک میری اپنی سوچ ہے، وہ بیٹر ٹریٹمینٹ ہے۔۔۔ میں یہ نہیں کہ رہا کہ جو خاندانی علاج چلا آ رہا ہے، یا جو گرو ششیہ پرمپرا کے ذریعے علاج چلا جا رہا ہے، آ رہا ہے، وہ کم ہے۔۔۔ بیسکلی یونانی تو آئے ہی گرو ششیہ پرمپرا کے تھرو دنیا میں ہے۔۔۔ اور یہاں تک دیکھا گیا ہے کہ وہ لوگ زیادہ پرفیکٹ رہے ہیں علاج کے معماملوں میں، آج کی تھیوری سے۔۔۔ ہم لوگ تو ایک دائرے میں بندھ گئے کہ، ایک لمٹیشنس ہیں ہماری، کہ ہم نے یہ پڑھنا ہے، یہ ڈائگنوسس کا پروسیجر ہے، اسی سسٹم پہ چلوگے تو یہ بیماری ہے، اس سسٹم پہ چلوگے وہ بیماری ہے۔۔۔ آج ہم، بیسکلی ہم بھی ویسے بھی ہم تو نبض دیکھ کے ہی علاج کرتے ہیں، یہ سٹیتھو رکھا ضرور ہے اور یہ بلڈ پریشر بھی، ہم صرف آج کی ڈیٹ کی ماڈرن ٹریٹمینٹ کا سہارا لینے کے لئے اسے استعمال کرتے ہیں، نبض دیکھ کے ہی علاج دیتے ہیں ہم۔۔۔ لیکن ہم سے کئی سو گناہ زیادہ نبّاض تھے وہ لوگ، جو پہلے خاندانی علاج لیا کرتے تھے۔۔۔ لیکن آج کی ڈیٹ میں بیٹھے ہوئے لوگوں میں ایک تو اتنی انٹیلجینسی نہیں بچی، ہیومن برین پہلے کے مقابلے آج ڈویلپ نہیں ہے، میری سوچ کے مطابق۔۔۔ پہلے تین سو سال پہلے، تین ہزار سال پہلے مصر میں جو سروریاں ہوئی ہیں، جو ممیز ملی ہیں، جو ان پہ آپریشن ہوئے ملے ہیں، جو ڈیڈ باڈیز ملی ہیں، ابھی تک ہم وہاں تک پہنچ بھی نہین پائے ہیں۔۔۔ ایسے، ایک بک میں نے پڑھی تھی اس میں، مصر میں ایسے دیے جلتے ہوئے ملے ہیں جو پرانے، تینتیس سو سال، چونتیس سو سال سے لگاتار جل رہے ہیں اور جو اس میں مٹریریل پڑا ہے، وہ جسٹ ٹوینٹی فائو پرسینٹ یا فورٹی پرسینٹ، ففٹی پرسینٹ یوز ہوا ہے، یعنی وہ ابھی اتنے ہی سال تک اور جل سکتے ہیں۔۔۔ مصر میں ایسے دیے ملے ہیں۔۔۔ تو اس وقت کا سائنس، جب مشینری نہیں تھی، کتنا ڈویلپ رہا ہوگا۔۔۔ تو ان لوگوں کوہم پوری طرح سے اگنور تو نہیں کر سکتے جو یونانی سسٹم کو چلا رہے ہیں، گاؤں دیہاتوں میں جو اس سسٹم کو آج چلا رہے ہیں۔۔۔ لیکن،ہاں، آج کی ڈیٹ میں اسے کوالفائڈ ٹچ دینا اس لئے ضروری ہے کہ جو چیز ہماری ریر ہوتی چلی گئی ہیں، بہت، سارا سسٹم، بہت ساری دوائیاں کھو چکے ہیں۔۔۔ بہت سارے علاج ہم کھو چکے ہیں۔۔۔ کیونکہ مان لیا کسی کے والد محترم کو علاج آتا تھا، انہوں نے، آج بھی یہ پرمپرا گاؤں دیہات میں بڑی چلتی ہے۔۔۔ وہ فارمولے نہیں بناتے اپنے اور نہ ہی انہیں قلمبند کرتے ہیں، لکھتے بھی نہیں ہیں۔۔۔ میرے مامو حکیم عبد الواحد شلفی، حکیم ہوئے ہیں، بڑے پاپیولر ہوئے ہیں، 94 سال کی ایج میں ان کا 1994 میں دیہانت ہو گیا ہے اور وہ نجیباباد، یو۔ پی۔ میں حکمت کی پریکٹس کیا کرتے تھے۔۔۔ کوالفائڈ حکیم تھے۔۔۔ انہوں نے دیہرادون سے 1918 میں بی۔یو۔ایم۔ایس کیا تھا۔ لیکن وہ کوئک، انٹیلجینٹ آدمی تھے۔ ان کے یہاں کینسر کا جو علاج، میری، جب میں سٹوڈنٹ یونانی تھا، میں نے دیکھا ہے کہ ان کے یہاں کینسر کے اتنے مریض آتے تھے اور اتنے ٹھیک ہوا کرتے تھے، آج ان کی بتائی ہوئی کچھ، چند دوائیاں، جو میں ان کے ساتھ، جنگل میں وہ کلیکٹ کیا کرتے تھے نا، اپنے آپ بناتے تھے وہ ساری دوائی، سیلف فارمیشن تھی ان کی، انہوں نے کوئی گولی بازار میں نیہں خریدی تھی، کسی کو کوئی چٹنی منگا کے نہیں دی۔۔۔ وہ سیلف فارمیشن کیا کرتے تھے۔۔۔ ہمارے بھی اب پڑھایا جاتا ہے، صیدلہ ایک ڈپارٹمینٹ ہے، جس میں ہمیں میڈسن کی فارمیشن سکھائی جاتی ہے۔۔۔ میں بھی کوشش کرتا ہوں کہ کچھ دوائیاں، پیشنٹ اگر چاہتا ہے، تو ہم لوگ اپنے آپ بنوا کے دیتے ہیں انہیں۔۔۔ وہ کاسٹلی تو پڑتی ہیں مارکٹ سے، کیونکہ ایک کمرشل پرپس سے بنائی ہوئی اور ایک جسٹ ٹریٹمینٹ پرپس سے بنائی ہوئی۔۔۔ پھر کئی بار ایسا ہوتا ہے، بوٹی لینے کے لئے ہمیں دہرادون کی پہاڑیوں تک جانا پڑتا ہے۔۔۔ نجیب آبات میرا بیسک رہا ہے تو نجیب آبات سے ہمیں کافی کچھ بوٹیاں مل جاتی ہیں۔۔۔ کھیت ہیں ہمارے، ان سے مل جاتی ہیں۔۔۔ تو ہمارے ماموں وہ علاج کیا کرتے تھے۔۔۔ اور کینسر کے بہت سارے مریض میں نے اپنے آپ ٹھیک ہوتے دیکھے ہیں۔۔۔ ایسی کئی مسالیں ہیں، لیکن جب میں ان سے پوچھتا تھا، مامو آپ علاج کیا دیتے ہو، مجھے بتا دو، تو وہ کہتے تھے، ارے ابھی کونسا میں مرا جا رہا ہوں۔۔۔ دے جاؤنگا۔۔۔ میں تجھے بتا کے جاؤنگا۔۔۔ اور اتّفاق سے میں دلّی میں تھا، انہیں ہارٹ اٹیک آیا، وہ چلے گئے۔۔۔ نہ تو انہوں نے اپنے فارمولے قلمبند کئے، نہ اس صیدلہ کو، جو میڈسن وہ بنایا کرتے تھے، اسے پیپر فارم میں لائے، نہ وہ اسے، کسی بھی طرح سے، کچھ بھی نہیں چھوڑ کے گئے یونانی سسٹم کا۔۔۔ اور جہاں تک میں سمجھتا ہوں یہ دیش کو ایک بہت بڑا لاس ہے، ان کی جو نالج تھی، جسے آج یہ انڈیا یوز نہیں کر رہا ہے یا یونانی سسٹم کو یوز کرنے والے ہم لوگ اسے یوز نہیں کر رہے ہیں۔۔۔ یہ ہمارے لئے لاس ہے۔۔۔ ایسی خاندانی جو تمام دوائیاں جو ریر ہوتی چلی گئی ہیں۔۔۔ پہلے پھوڑے پھنسیوں کا مرہم بنایا کرتے تھے لوگ، آج بھی تھانے کے پاس وہ دو تین جگہ بیٹھے ہیں، بناتے ہیں، لیکن مرہم کی، بیسکلی، میں خود یونانی فزشن ہوں، مجھے مرہم بنانا نیہں آتا۔۔۔ کیوں؟ کیونکہ میں پھوڑے پھنسی کا علاج نہیں کرتا۔۔۔ جب کہ یہ خاندانی پیشہ والے بڑا اچّھا مرہم بناتے ہیں۔۔۔ لیپ بناتے ہیں، دردوں کے لیپ بناتے ہیں۔۔۔ میرے کو جتنی، کتابی جانکاری ہے مجھے بہت اچّھی ہے، لیکن کتاب کے علاوہ ہٹ کے بھی کچھ ہے۔۔۔ جو آج کی ڈیٹ میں صرف ریر ہی بنایا ہوا ہے۔۔۔ اور پوری کمپلیٹ یونانی کے لئے ہمیں ان سب چیزوں تک بھی جانا ہی ہوگا۔۔ میری اپنی سوچ ہے یہ۔۔۔ ہمیں ان سے بھی کچھ چاہئیے، ان میں جاگروکتا ایسی پیدا کرنی چاہئیے کہ جو فارمولے ان لوگوں کے پاس ہیں، انہیں سائنٹفکلی پروو کریں، تھوڑا سا ان پہ ریسرچ کریں، انہیں دیکھیں، کیونکہ مریض ان سے زیادہ اچّھے ٹھیک ہوتے ہیں۔۔۔ آپ یہیں چلے جائیے گھوڑے والی گلی میں۔۔۔

 

کٹ، کٹ، کٹ، کٹ۔۔۔ ڈاکٹر صاحب آپ وہیں سے، تھوڑا سا۔۔۔ جہاں ختم کیا تھا آپ نے۔۔۔ صفہ سا آ گیا، تو لائٹ چلی گئی تھی۔۔۔

 

تو ہمارے مامو نے وہ چیزیں ہم لوگوں تک نہیں پرووائڈ کرائی۔۔۔ نتیجہ یہ ہوا کہ جو ایک بہت بروڈ جو ان کی ریسرچ، 1918 میں انہوں نے بی۔ یو۔ ایم۔ ایس۔ میں ایڈمشن لیا تھا، 24-23 میں پاس ہوئے تھے۔۔۔ سن 1 کی پیدائش تھی ان کی، 1901 کی، اور 1994 میں 94 کی ایج میں ان کی ڈیتھ ہوئی۔۔۔ تو اس لمبے پیرئیڈ کی، 74-73 سال کی پریکٹس میں جو انہوں نے ریسرچ کی تھی، جو جانکاریاں حاصل کی تھیں، کاش وہ قلمبند کر گئے ہوتے، وہ تو ایک کوالفائڈ حکیم تھے، نا تو وہ کسی کو بتا کے گئے، اولاد ان کے کوئی تھی نہیں، تو یہ اتنی بڑی چیز یہیں کی یہیں ختم ہو گئی۔۔۔ میں، جب کہ ایک یونانی فزشن ہوں، میں بھی ان سے بہت کچھ گین نہیں کر پایا۔۔۔ اسی طرح ہماری سسٹم جو ہے، جو، آج بھی بہت سے گاؤں میں ایسے لوگ پڑے ہیں جن کے خاندان میں کبھی حکیم ہوئے ہیں اور وہ حکمت چلا رہے ہیں۔۔۔ لیکن آپ ان سے پوچھنے جاؤ کہ آپ فارملہ کیا یوز کرتے ہو، نہ تو وہ قلمبند کرتے ہیں، نہ وہ بتاتے ہیں، نتیجہ یہ ہوتا ہے کہ ڈے بائی ڈے، ڈے بائی ڈے، یہ ریر ٹریٹمینٹ کا جو ایک بہت اچّھی چیزیں ہیں، وہ ختم ہوتی چلی جا رہی ہیں، دنیا سے۔۔۔ ابھی آپ یہیں گلی گھوڑے والی میں جائیے، ایک حکیم بیٹھتے ہیں، وہ ہڈّیوں کا علاج کرتے ہیں، پہلوان حکیم کے نام سے۔۔۔

 

ترکمان گیٹ کے پاس جو ہیں؟

 

ہاں جی، ہاں جی، یہ۔۔۔ تو آپ ان کے پاس جائیے۔۔۔ میں نے وہاں ایم۔ ایس۔ اورتھوپیڈکس سرجری کے لوگوں کو ٹریٹمینٹ کراتے دیکھا ہے اپنا۔۔۔ ایک ایم۔ ایس۔ کا ایکسیڈینٹ ہوا، اورتھوپیڈکس سرجری میں ایم۔ ایس، ان کا ہاتھ یہاں سے فریکچر ہو گیا، فریکچر ہونے کو بعد انہوں نے آپریشن کرایا اور وہ آپریشن بھی غلت ہو گیا۔۔۔ ہاتھ یوں ہو گیا ان کا۔۔۔ تو۔۔۔ تو میرے پاس آئے وہ۔۔۔ بولے یار، ڈاکٹر مقیم، پریشان ہوں، رائٹ ہینڈ ہے، اور یہ ہی میری زندگی کی روزی روٹی تھی۔۔۔ یہ خراب ہو گیا۔۔۔ میں نے کہا  ڈاکٹر صاحب، آپ تو سرجن ہیں، دوبارہ آپریشن کرا دو۔۔۔ گنگارام جا کے کرا دو، کہیں بڑیا۔۔۔ انہوں نے کہا، یار ایک اس کا نام سنا ہے، آپ مجھے ہواں لے چلیں۔۔۔ میں نے کہا، آپ کو یقین ہے، کہ یقین نہیں ہوتا تو میں آتا نہیں۔۔۔ میرا ایک پیشنٹ ایسے ہی کبھی گیا تھا، وہ ٹھیک ہوا ہے۔۔۔ میں انہیں لے کے چلا گیا وہاں۔۔۔ انہوں نے کہا، دیکھا ہاتھ، بولے کہ بھئی تم کون ہو، تو بولے کہ بھئی میں ڈاکٹر ہوں، اور ہڈّیوں کا ڈاکٹر ہوں۔۔۔ پہلے تو وہ ہنسے۔۔۔ بولے کہ موسل، ایک اتنا بڑا مسگل اٹھا کے بولے، اسے جھیل لیگا؟۔۔۔ عہ ہنسنے لگے، کہ کیا مطلب؟ کہ اسے جھیل لے تو بتا میں تیرا علاج کرونگا۔۔۔ اور مرتا کیا نہیں کرتا، انہوں نے کہا، کہ یار برباد تو ہے ہی، زیادہ خراب ہوگا تو دوبارہ آپریشن پہ چلا جاؤنگا۔۔۔ مجھے کہا انہوں نے، کہ خراب ہوگا تو دوبارہ آپریشن پہ چلا جاؤنگا۔۔۔ اور ٹھیک ہو گیا تو دیکھتے ہیں بھئی انہیں۔۔۔ انہوں نے کہا کہ ہاں جی، میں تیّار ہو کر آیا ہوں، جھیل لونگا۔۔۔ میں نے کہا اچّھا۔۔۔ تھوڑی دیر باتیں کی، انہوں نے چائے پلوائی، چائے پلوانے کے بعد دو مسٹنڈے پہلوان بلوائے اور بولے، ارے پکڑئیے اس ڈاکٹر کا ہاتھ۔۔۔ (ہنستے ہوئے) اسی لینگویج میں۔۔۔ اور انہوں نے ہاتھ پکڑا اور نیچے فرش پر رکھ دیا۔۔۔ اور وہ اپنا، جیسے، کیا بولتے ہیں، بیلن ہوتا ہے نا کھانا بنانے کا، اتنا موٹا وہ ہے ان کے پاس۔۔۔ یوں لیا، اور یوں ہاتھ کو سیدھے رول کر دیا۔۔۔ ڈاکٹر صاحب تو چیخ مار پڑے۔۔۔ کہ ہائے مرا۔۔۔ اور دونوں نے چھوڑا نہیں۔۔۔ اسے انہوں نے بائی فورس ان کی ساری ہڈّیاں توڑ کے سیدھی کر دیں۔۔۔ توڑ دیں ہڈّیاں، فریکچر کر دیا ہاتھ ان کا۔۔۔ ڈاکٹر کہنے لگے، میں مر گیا۔۔۔ میں غلت جگہ آ گیا۔۔۔ میں نے کہاِ، ارے جھیل لے۔۔۔ پھر انہوں نے اس پہ کوئی دیسی لیپ لگایا، جس کے بارے میں وہ بھی نہیں بتاتے کسی کو، دیسی لیپ لگایا، یہاں پہ بانس کی لکڑیاں لیں، تھوڑے تھوڑے ٹکڑے۔۔۔ انہوں نے یہاں انہیں لگایا۔۔۔ اور اس طرح سے ہاتھ کو ایسا فکس کر دیا، کے پوری طرح سے، پلاسٹر کی طرح سے انہوں نے اسے پٹّی باندھ کے فکس کر دیا، لیپ لگا کے۔۔۔ اور بولے کہ اب تو تین ہفتے بعد آ میرے پاس، تب دیکھونگا۔۔۔ میں ڈاکٹر صاحب کو تین ہفتے بعد لے کر گیا، جب ہاتھ کھولا ان کا، ویری اسٹرینگ، ان کا ہاتھ پورا سیدھا تھا، جو یوں ہو چکا تھا۔۔۔ جو یوں ہو چکا تھا ایکسڈینٹ میں، پورا سیدھا تھا ایک دم۔۔۔ انہوں نے ایک بار اور اسی طرح سے پٹّی کی اور یوں بولے، اب تو تین مہینے میں آنا۔۔۔ بولے دوائی کیا کھاؤں۔۔۔ انہوں نے کہا، کچھ مت کھا، ایک گلاس دودھ صبح پی، ایک گلاس دودھ شام کو پی، ملائی ہٹا دے، تجھے موٹا ہونے کا ڈار ہے تو۔۔۔ کیلشیم اس سے مل جائیگا، باقی کچھ مت کھا۔۔۔ ہاں، پان کھا لے، کھانا ہے تو، چونا لگا کے۔۔۔ وہ کیلشیم کو باڈی میں ڈلوانا چاہتے تھے۔۔۔ دودھ کی اور اس کی شکل میں وہ چلی گئی۔۔۔ اور ناؤ ہی از اے ویری گڈ سرجن، ان اورتھوپیڈکس سرجری۔۔۔ آج وہ دلّی میں ہی ہیں، میں نام ان کی اجازت کے بغیر ابھی بتانا نہیں چاہونگا کیمرے کے سامنے، ادروائز، کہیں ایسا، اگر انہوں نے اجازت دی، ایک بار پوچھ کے، تو دوبارہ کبھی آپ سے گفتگو کرنے کا موقع ملا، تو میں انہیں اس کیمرے کے سامنے پھر سے پیش کر دونگا، اگر انہوں نے اجازت دی، کیونکہ یہ ان کی پریکٹس کو بھی افیکٹ کرتا ہے۔۔۔ وہ اورتھوپیڈک سرجن ہیں بیسکلی۔۔۔

 

 

exercise (urdu): 

आज के मुकाबले में पहले की पद्धतियाँ क्यों ज़्यादा विकसित थी?

1 مصر میں سرجری ہوتی تھی

2 کینسر بھی کئی بار ٹھیک ہو جاتا ہے

3 سب

4 پہلے زیادہ انٹیلگینٹ لوگ تھے، خود ہی دوا بناتے تھے

آجکل جڑی بوٹیاں کہاں سے ملتی ہیں؟

1 دیہرادون کی پہاڑیوں سے

2 نجیب آباد سے

3 سب

4 نجیب آباد کے کھیتوں سے

آج کل کونسی ایسے دوائیاں ہیں جو ریر ہوتی جارہی ہیں؟

1 پھوڑے پھنسی کا مرحم

2 دردوں کا لیپ

3 سب

4 کچھ دوائیں جو خود بناتے تھے

History of Unani

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Unani

यूनानी

Unan

यूनान

India

हिन्दुस्तान

Heritage, tradition

परंपरा

Traditional treatment

परंपरागत ट्रीटमेंट

Alive

जिंदा

In foreign countries

विदेशों में

Precedent

मिसाल

During the time of the Mughals

मुगलों के ज़माने में

Moghul emperor

मुगल बादशाह

Nose

नाक

Sword, sabre

तलवार

War

युद्ध

Jungle, forest

जंगल

Was cut

कट गई

Unani doctor

हकीम

Thigh meat

जांघ के गोश्त

Created a nose

नाक बनाई

Use

इस्तेमाल

Arabian

अरबी

Ancient

प्राचीन

Urdu

उर्दू

Pakistan

पाकिस्तान

Born

पैदा

Finish

खत्म

Currency

प्रचलन

In a country village

गांव देहातों में

Hereditary

खानदानी

Resourcefulness

हिकमत

transcription (hindi): 

डॉक्टर साहब, इससे एक बात ज़हन में आती है कि यूनानी शब्द हम इस्तेमाल करते हैं, यूनानी ट्रीटमेंट या यूनानी फार्म, यूनानी प्रैक्टिस में... यूनान, ग्रीस को कहा गया है, कहा जाता था... तो ये, ये कहां से उपज हुई इसकी? किधर आया? इसका नाम यूनानी कैसे पड़ा? ऐसा है बेसिकली तो ग्रीक से ही यूनानी लैंग्वेज आई है... यूनान से ही यूनानी उत्पन्न हुई है... लेकिन जो यूनानी हम हिन्दुस्तान में यूज़ कर रहे हैं, जिसे हम यूनानी पढ़ रहे हैं, आज, ग्रीस में जो कभी यूनानी डवलप हुई थी, वो मॉडर्न सिस्टम, वो यूनानी के नाम से आज हम लोगों के सामने मौजूद है, लेकिन उसका सिर्फ एन्शियंट पार्ट, क्योंकि हिन्दुस्तान की परंपरा रही है, कि परंपरागत ट्रीटमेंट चलते रहे हैं... तो ये माउथ टू माउथ, ये इंडिया में जिंदा रहीं, जबकि विदेशों में, ईवन ग्रीक में भी, जहां यूनान है, जहां आज की डेट में आप जाईये, अ, ईजिप्ट में जाईये, जहां मम्मीज़ फॉरमेशन है, उन लोगों के पास आज से तीन, तेतीस सौ, चौंतीस सौ साल पहले ऐसी मैडिसन डवलप थी कि वो ब्रेन को ऑपरेट करते थे... ब्रेन सर्जरी होती थी... वो ही सर्जरी आज भी चली आ रही है... हम लोगों में आज भी, मुगलों के जमाने में यूनानी को काफी प्रमोशन मिला... आज प्लास्टिक सर्जरी को मार्डन सिस्टम अपनी बताता है, लेकिन प्लास्टिक सर्जरी की सबसे पहली मिसाल मुगलों के ज़माने में मिलती है... एक मुगल बादशाह की नाक तलवार की प्रैक्टिस करते हुये युद्ध, या जंगल, कट गई थी, जिसे उनके यहां काम करने वाले एक हकीम ने जांघ का गोश्त ले के, उनकी नाक बनाई थी... ये रिकार्डिड है, ये बात मैं वैसे नहीं कह रहा हूं... तो आज से चार सौ साल पहले भी यूनानी में प्लास्टिक सर्जरी होती चली आई है... हां, इस चीज को मार्डनाईज़ जरूर कर दिया गया है... आज जितना सिस्टम ऑफ मैडिसन सिस्टम हम पढ़ रह हैं वो ग्रीक से ही आया हुआ है... आज भी जितनी लैंग्वेज है वो सारी की सारी ग्रीक ही इस्तेमाल होती है, जिसे आज हम मार्डन सिस्टम ऑफ मैडिसन कहते हैं... यूनानी में भी जो मेन, बेसिक लैंग्वेज है, वो एरेबिक है... पहले क्योंकि, ग्रीक में पहले भी अरबी बोली जाती थी, तो आज भी यूनानी की जो प्राचीन एन्शिएंट बुक्स मिलती हैं वो अरबी में ही मिलती हैं... यूनानी पढ़ने के लिये एक अरेबिक सब्जैक्ट भी होता है... जब यूनानी ग्रैजूएशन कराया जाता है तो फर्स्ट ईयर में अरबी एज़ ए सब्जैक्ट पेपर जरूर क्लियर करना होता है... यूनानी में, बाकी चलते-चलते उर्दू में सारा सिस्टम है, कि उर्दू लैंग्वेज में ही हमारी बुक्स और हमारी जो स्टेशनरी और वो अवेलेबल है, वो सब उर्दू में ही है... एक मिनट बंद करना, इसे बंद करा दो... ग्रीक से ही यूनानी आई है... और उसे आज की डेट में वर्ल्ड वाईड, जितने भी, पाकिस्तान और इंडिया में ही यूनानी की क्वालिफिकेशन पढ़ाई जाती है, डिग्री दी जाती है, बाकी ग्रीक, जहां से ये पैदा हुई है वहां तो खत्म हो चुकी है... आज की तारीख में हिन्दुस्तान को अगर हम देख रहे हैं तो यहां यूनानी दवाईयों का, यूनानी प्रैक्टिस का प्रचलन कितना है यहां पर, आपके हिसाब से? देखिये, जहां तक प्रचलन की बात है, ये एक रूरल मैडिसन के तौर पर ही आज रह गई है, गांव देहातों में, जबकि ये क्वैकरी है, लेकिन खानदानी लोग चले आ रहे हैं जो हिकमत के नाम से प्रैक्टिस करते हैं यूनानी... और कोई भी शहर, कोई भी कस्बा, आप चले जाईये पूरे हिन्दुस्तान में, कहीं इंटीरियर में भी आप जाईये, ईवन गांव में भी जाईये, तो एक ना एक यूनानी की प्रैक्टिस करने वाला जरूर मिल जायेगा... बाद में जो ग्रैजुएट्स, जो क्वालिफिकेशन या पी.जी., पोस्ट ग्रैजुएट क्वालिफिकेशन ले के जो लोग गये हैं, वो भी, 80% लोग तो मार्डन सिस्टम को एडॉप्ट कर लेते हैं, यूनानी क्वालिफाईड आदमी... लेकिन बीस परसैंट आज भी यूनानी में ही प्रैक्टिस करते हैं और बहुत कामयाब प्रैक्टिस करते हैं...

translation (hindi): 

   

exercise (hindi): 

प्लास्टिक सर्जरी की इतिहास में कहाँ मिसाल मिलती है?

1 अंग्रेज़ों के राज में

2

3 मुगल ज़माने में

4 गुप्ता शासन में

युनानी की पुरानी किताबें किस भाषा में मिलती हैं?

1 ग्रीक में

2 चीनी में

3 अरबी में

4 उर्दू में

आजकल युनानी ज़्यादातर कहाँ मिलती हैं?

1 शहरों में

2 विलायत में

3 गाँव और देहातों में

4 पहाड़ों पर

vocabulary (urdu): 

Unani

یونانی

Unan

یونان

India

ہندوستان

Heritage, tradition

پرمپرا

Traditional treatment

پرمپراگت ٹریٹمنٹ

Alive

زندہ

In foreign countries

ودیشوں میں

Precedent

مثال

During the time of the Mughals

مغلوں کے زمانے میں

Moghul emperor

مغل بادشاہ

Nose

ناک

Sword, sabre

تلوار

War

یدھ

War

جنگ

Was cut

کٹ گئی

Unani doctor

حکیم

Thigh meat

جاندھ کے گوشت

Created a nose

ناک بنائی

Use

استعمال

Arabian

عربی

Ancient

پراچین

Urdu

اردو

Pakistan

پاکستان

Born

پیدا

Finish

ختم

Currency

پرچلن

In a country village

گاؤں دیہاتوں میں

Hereditary

خاندانی

Resourcefulness

حکمت

transcription (urdu): 

ڈاکٹر صاحب، اس سے ایک بات ذہن میں آتی ہے کہ یونانی شبد ہم استعمال کرتے ہیں، یونانی ٹریٹمنٹ یا یونانی فارم، یونانی پریکٹس میں، یونان، گریس کو کہا گیا  تھا، کہا جاتا تھا۔۔۔ تو یہ، یہ کہاں سے اوپج ہوئی اس کی؟ کدھر آیا؟ اس کا نام یونانی کوسے پڑا؟

 

ایسا ہے بیسکلی تو گریک سے ہی یونانی لینگویج آئی ہے۔۔۔ یونان سے ہی یونانی اتپنن ہوئی ہے۔۔۔ لیکن جو یونانی ہم ہندوستان میں یوز کر رہے ہیں، جسے ہم یونانی پڑھ رہے ہیں، آج، گریس میں جو کبھی یونانی ڈویلپ ہوئی تھی، وہ ماڈرن سسٹم، وہ یونانی کے نام سے آج ہم لوگوں کے سامنے موجود ہے، لیکن اس کا صرف انشینٹ پارٹ، کیونکہ ہندوستا کی پرمپرا رہی ہے، کہ پرمپراگت ٹریٹمنٹ چلتے رہے ہیں۔۔۔ تو یہ ماؤتھ ٹو ماؤتھ، یہ انڈیا میں زندہ رہیں، جب کہ ودیشوں میں، ایون گریک میں بھی، جہاں یونان ہے، جہاں آج کی ڈیٹ میں آپ جائیے، ایجپٹ میں جائیے، جہاں ممیز فارمیشن ہے، ان لوگوں کے پاس آج سے تین، تینتیس سو، چونتیس سو سال پہلے ایسی میڈسن تھی کہ وہ برین کو آپریٹ کرتے تھے۔۔۔ برین سرجری ہوتی تھی۔۔۔ وہ ہی سرجری آج بھی چلی آ رہی ہے۔۔۔ ہم لوگوں میں آج بھی، مغلوں کے زمانے میں یونانی کو کافی پرسژن ملی۔۔۔ آج پلاسٹک سرجری کو ماڈرن سسٹم اپنی بتاتا ہے، لیکن پلاسٹک سرجری کی سب سے پہلی مثال مغلوں کے زمانے میں ملتی ہے۔۔۔ ایک مغل بادشاہ کی ناک تلوار کی پریکٹس کرتے ہوئے جنگ۔۔۔ یدھ میں کٹ گئی تھی، جسے ان کے یہاں کام کرنے والکے ایک حکیم نے جانگھ کا گوشت لے کے، ان کی ناک بنائی تھی۔۔۔ یہ رکارڈد ہے، یہ بات میں ویسے نہیں کہ رہا ہوں۔۔۔ تو آج سے چار سو سال پہلے بھی یونانی میں پلاسٹک سرجری ہوتی چلی آئی ہے۔۔۔ ہاں، اس چیز کو ماڈرنائیز ضرور کر دیا گیا ہے۔۔۔ آج جتنا سسٹم آف میڈسن سسٹم ہم پڑھ رہے ہیں وہ گریک سے ہی آیا ہوا ہے۔۔۔ آج بھی جتنی لینگویج ہے وہ ساری کی ساری گریک ہی استعمال ہوتی ہے، جسے آج ہم ماڈرن مسٹم آف میڈسن کہتے ہیں۔۔۔یونانی میں بھی جو مین، بیسک لینگویج ہے، وہ عیربک ہے۔۔۔ پہلے کیونکہ، گریک میں پہلے بھی عربی ہی بولی جاتی تھی، تو آج بھی یونانی کی جو پراچین، انشنٹ بکس ملتی ہیں وہ عربی میں ہی ملتی ہیں۔۔۔ یونانی پڑھنے کےلئے ایک عیربک سبجکٹ بھی ہوتا ہے۔۔۔ جب یونانی گریجویشن کرایا جاتا ہے تو فرسٹ میں عربی ایز اے سبجیکٹ ایک پیپر ضرور کلیر کرنا ہوتا ہے۔۔۔ یونانی میں، باقی چلتے چلتے اردو میں سارا سسٹم ہے، کہ اردو لینگویج میں ہی ہماری بک اور ہماری جو اسٹیشنری اور وہ اویلبل ہے، وہ سب اردو میں ہی ہے۔۔۔ ایک منٹ بند کرنا، اسے بند کرا دو۔۔۔

 

گریک سے ہی یونانی آئی ہے۔۔۔ اور اسے آج کی ڈیٹ میں ورلڈ وائڈ، جتنے بھی پاکستان اور انڈیا میں ہی یونانی کی کوالفکیشن پڑھائی جاتی ہے، ڈگری دی جاتی ہے، باقی گریک، جہاں سے یہ پیدا ہوئی ہے وہاں تو ختم ہو چکی ہے۔۔۔

 

آج کی تاریخ میں ہندوستان کو اگر ہم دیکھ رہے ہیں تو یہاں یونانی دوائیوں کا، یونانی پریکٹس کا پرچلن کتنا ہے یہاں پر، آپ کے حساب سے؟

 

دیکھئیے، جہاں تک پریچلن کی بات ہے، یہ ایک رورل میڈسن کے طور پہ ہی آج رہ گئی ہے، گاؤں دیہاتوں میں، جب کہ یہ کویکری ہے، لیکن خاندانی لوگ چلے آ رہے ہیں جو حکمت کے نام سے پریکٹس کرتے ہیں یونانی۔۔۔ اور کوئی بھی شہر، کوئی بھی قصبہ، آپ چلے جائیے پورے ہندوستان میں، کہیں انٹیریر میں بھی آپ جائیے، ایون گاؤں میں بھی جائیے، تو ایک نہ ایک یونانی کی پریکٹس کرنے والا ضرور مل جائیگا۔۔۔ بعد میں جو گریجویٹس، جو کوالفکیشن یا پی۔ جی۔، پوسٹ گریجویٹ کوالفکیشن لے کے جو لوگ گئے ہیں، وہ بھی، اسّی پرسینٹ لوگ تو مائن سسٹم کو اڈاپٹ کر لیتے ہیں، یونانی کوالفائڈ آدمی۔۔۔ لیکن بیس پرسینٹ آج بھی یونانی میں ہی پریکٹس کرتے ہیں اور بہت کامیاب پریکٹس کرتے ہیں۔۔۔

exercise (urdu): 

پلاسٹک سرجری کی اتہاس میں کہاں مثال ملتی ہے؟

1 انگریزوں کے راج میں

2 محمود غزنوی کے راج میں

3 مغل زمانے میں

4 گپتا شاسن میں

یونانی کی پرانی کتابیں کس زبان میں ملتی ہیں؟

1 گریک میں

2 چینی میں

3 عربی میں

4 اردو میں

آج کل یونانی زیادہتر کہاں ملتی ہیں؟

1 شہروں میں

2 ولایت میں

3 گاؤں اور دیہاتوں میں

4 پہاڑوں پر

Ethics

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

 

तिब्बिया कॉलेज

Ayurveda

आयुर्वेद

 

जनानी बिमारियों

Harmony, consistency, congruence, unison, concordance

सामंजस्य

Unani and ayurveda

यूनानी अौर आयुर्वेद

 

पेड़-पौधे

Two sides of the same coin

एक ही सिक्के के दो पहलू

Difference

फर्क

Cure, remedy, treatment

ईलाज

 

एक हद तक ईलाज

Sure treatment

पूरा पक्का ईलाज

Cannot say

नहीं कह सकते

Claim

दावा

Treatment for the illness

बीमारी का ईलाज

With Ayurvedic medicines

आयुर्वेदिक दवाईयों से

With Unani medicines

यूनानी दवाईयों से

Will work

काम करेगा

Will not work

काम नहीं करेगा

Ayurveda and Unani medicines

आयुर्वेद अौर यूनानी की दवाईयां

 

एंटी अॉक्सीडेंट की तरह से

Works

काम करती हैं

Serve

सेवा करो

 

लाईफ को सिर्फ बढ़ा रहे हैं

Alive

जिंदा

transcription (hindi): 

मेरा नाम डॉक्टर सीमा मुकीम है... मैंने तिब्बिया कॉलेज, करौल बाग, दिल्ली यूनिवर्सिटी से 1993 में पास आउट किया है... और मैं आयुर्वेद में ही प्रैक्टिस करती हूं... जहां तक बात है फील्ड की, मैं बेसिकली इन्फर्टेलिटी पे, मतलब कि जनानी बीमारियों पे ज्यादा एम्फैसाईज़ करती हूं... साथ में हम लोग कैंसर के लिये भी ट्रीटमेंट देते हैं... सैकिंडली, जो आपने पूछा कि जो सामंजस्य वाली बात, यूनानी और आयुर्वेद की, बेसिकली जब हम लोग पढ़ते थे तो हम लोग ये देखते थे कि आमतौर पर हम लोग जो यूज़ कर रहे हैं, जो भी पेड़-पौधे हैं, वो तो सिमिलर हैं, उनकी फॉरमेशन, जो फाइनल प्रोडक्ट है, उसका नाम अगर आप ए या बी दे दीजिये, उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा... तो जहां तक सामंजस्य की बात है वो तो दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं... आप नाम कुछ दे दीजिये, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता... अ... जो आप कहती हैं कि आप कैंसर रिसर्च पर, या कैंसर ट्रीटमेंट पर आप काम कर रही हैं, तो क्या ये ईलाज, क्योंकि कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका ज्यादातर लोग कहते हैं कि एक हद तक ईलाज हो सकता है, उसके बाद आप कुछ नहीं कर सकते... क्या आपको लगता है कि आयुर्वेद में इसका पूरा पक्का ईलाज है? पूरा पक्का ईलाज, तो आप किसी चीज को 100% नहीं कह सकते कि इसका 100% ये ट्रीटमेंट है... अगर कोई ऐसा दावा करता है कि ये 100% हम ट्रीटमेंट कर देंगे, तो वो, मेरे हिसाब से वो सही नहीं है... कोई भी ईलाज करने के लिये अगर हम, सपोज़ कर लीजिये ऐलोपैथिक साईड पर भी जाते हैं, तो सर्जरी कर देते हैं... रेडियो थैरेपी या कीमियो थैरेपी और डिफरैंट टाईप ऑफ ट्रीटमेंट एडाप्ट करते हैं... लेकिन वो भी ये नहीं कह सकते कि हमने सर्जरी कर दी है तो हमने ये कैंसर को ट्रीट कर दिया है... ठीक है ना... उसी तरह से हम लोग 100% दावा कोई भी नहीं कर सकता कि हम इस बीमारी का ईलाज 100% कर देंगे... जहां तक बात है एक्सटैंशन ऑफ लाईफ की, क्योंकि सर्जरी में भी या कीमोथैरेपी से या रेडियो थैरेपी से भी हम एक तरह से लाईफ को एक्सटैंड ही तो कर रहे हैं और हम कुछ नहीं कर रहे... किसी भी ट्रीटमेंट को हम उठायें तो वो सिर्फ एक्सटैंशन ऑफ लाईफ है... हम जब आयुर्वेदिक दवाईयों से या यूनानी दवाईयों से किसी पेशैंट को ट्रीट करते हैं, स्पेशली फॉर कैंसर, तो एक चीज आप, हम उसको बिल्कुल क्लियर करके चलते हैं कि दिस इज़ जस्ट एक्सटैंशन ऑफ लाईफ... ठीक है ना... दूसरी चीज ये है, अगर हमारे पास पेशैंट बिना किसी इन्वैस्टीगेशन के आता है, तो हम लोग पहले कोशिश ये ही करते हैं कि हम लोग कोई उसका एफ.एल.ए.सी. ना करायें... और हम सिर्फ एम.आर.आई., बेसिकली एम.आर.आई. से या सी.टी. या जो भी हों, मतलब नॉन इन्वेसिव प्रोसीज़र से हम लोग उसको डाईग्नोज़ करके उसे ट्रीटमेंट दें... तो मेरे खयाल से अगर किसी पेशैंट की हम पेनलैस लाईफ को एक्सटैंड करते हैं तो वो काफी बड़ा एचीवमेंट हो जाता है... जैसे कैंसर ट्रीटमेंट की बात आती है, उसमें ये कहा जाता है कि जो ट्रीटमेंट होता है, ये पैलियेटिड है, ये क्यूलियेटिव नहीं है... तो क्या आयुर्वेद में भी वो पैलियेटिड है क्यूलियेटिव नहीं? एग्जैक्टली आप किसी चीज को आप टर्मियोनोलॉजी में बांध नहीं सकते, कि ये पर्टिकुलरली ये ट्रीटमेंट है या वो ट्रीटमेंट है... ऐसा भी हमने देखा है कई पेशैंट्स में कि कैंसर ग्रोथ स्टार्ट हुई है, सपोज़ कर लीजिये फर्स्ट स्टेज में है पेशैंट आया, तो वो ग्रोथ रिग्रैस भी हो गई है... तो आप एग्जैक्टली किसी टर्मियोनोलॉजी में आप बांध के नहीं चल सकते कि ये यही काम करेगा और ये काम नहीं करेगा या ये नहीं कर सकता और ये कर सकता है... आप किसी टर्म पे उसको नहीं बांध सकते... एक मिनट, पैन कर लीजिये आप... इसमें थोड़ा सा... एक मिनट... कैसर वाली, उसी प्वाइंट पे, थोड़ा सा ये है कि बेसीकली आयुर्वेद और यूनानी की दवाईयां एंटी ऑक्सीडेंट की तरह से भी काम करती हैं और लाईफ को थोड़ा सा बढ़ाती हैं... हमारी दवाईयों से, जो भी हम दवाईयां यूज़ करते हैं, कैंसर के पेशैंट्स पे, उन दवाईयों से ये देखा गया है कि जो होपलैस पेशैंट्स हैं, जिन्हें ये कह दिया जाता है, मार्डन ट्रीटमेंट लेने के बाद भी, ये हमारे पास बहुत पेशैंट आते हैं... जिन्हें ये कह दिया जाता है कि ये तो बस गया, घर जा के सेवा करो, खिदमत करो, हमने कई बार देखा है, एक पेशैंट तो मेरी अभी, अनर्फाच्यूनेटली, ड्यू टू ओल्ड ऐज, अभी पैंसठ साल की ऐज में डैत्थ हुई है, शास्त्री नगर में रहती थी, चंदा देवी नाम था... मेरे पास उसकी एम.आर.आई. और सी.टी. वगैरह आज भी पड़े हैं, उन्हें एब्डॉमिनल कैंसर था... एब्डॉमिनल कैंसर, उन्हें स्टमक पर काफी बड़ा ग्रोथ था... हमने यूनानी ईलाज उन्हें यही बता के चलाया कि हम आपकी लाईफ को सिर्फ बढ़ा रहे हैं... और वो दस साल तक जिंदा रहीं, जबकि ऑल इंडिया इन्स्ट्रीट्यूट ने उन्हें कह दिया था कि होपलैस है, ले जाओ, कुछ दिन सेवा करो, और चली जायेगी... और उनकी डैत्थ कैंसर की वजह से नहीं हुई, अब वो नैचुरल डैत्थ मरी हैं... और लास्ट में उनके बिल्कुल, ट्रीटमेंट के बार, छः-सात महीने के ट्रीटमेंट के बाद मैंने उन्हें देखा है कि, जब मैंने उनके दुबारा से रीइन्वैस्टीगेट कराया तो टोटल, जितना भी ट्यूमर था, सब डिज़ाल्व हो चुका था... वो 100% क्योर थी... हमारे पास क्योंकि रिसर्च के फैसिलीटीज़ कम हैं, हम पूरी तरह से ये पता नहीं लगा पाते कि हमारी मैडिसन का जो रूट ऑफ वर्क है वो क्या है... क्योंकि यूनानी ट्रीटमेंट को अभी गौरमैंट की तरफ से भी इतनी फैसीलिटी नहीं मिल पाई कि हम लोग अपनी रिसर्चों को कंप्लीट कर सकें... लेकिन ये पता ना होते हुये भी ट्रीटमेंट का जो पार्ट रहा है हमारा ज्यादा सक्सैस्फुल रहा है और हम लोगों के पेशैंट अच्छी तरह से ठीक होते हैं, कैंसर में भी... हम ये नहीं कहते कि 100% क्योर कर दिया है, हमने लाईफ सेव कर दी, लेकिन उनका लाईफ थोड़ी सी बढ़ जरूर जाती है...

translation (hindi): 


 

exercise (hindi): 

डॉक्टर सीमा मुकीम के अनुसार आयुर्वेद और यूनानी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, क्यों?

1 दवाओं के नाम अलग अलग हैं और पेड़ पौधे दवाई बनाने के लिये भी अलग हैं

2 दवाओं के नाम एक हैं और पॆड़, पौधे दवा बनाने के लिये अलग हैं

3 दवाओं के नाम कुछ भी हों पर पेड़, पौधे दवा बनाने के लिये एक ही हैं

4 कुछ कुछ मिलता जुलता है

सीमा जी के अनुसार क्या किसी पैथी में ईलाज पूरा हो सकता है?

1 आयुर्वेद में इलाज पूरा हो सकता है, बाकी पैथियों में नहीं

2 युनानी में इलाज पूरा हो सकता है, बाकी पैथियों में नहीं

3 किसी मॆं भी मरीज़ पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता है पर उसकी ज़िन्दगी और बढ़ सकती है

4 एलोपैथी में सर्जरी से इलाज पूरा ठीक हो जाता है

आयुर्वेद में दवाएँ काम करती हैं, सीमा जी के अनुसार ये क्यों नहीं साबित हो सकता है?

1 दवाएँ मिलती नहीं है

2 दवाएँ दूर दूर से आती हैं

3 रिसर्च फ़ैसिलीतीज़ कम हैं

4 दवाएँ रिसर्च के लायक नहीं है

vocabulary (urdu): 

Tibiya College

طبیہ کالج

Ayurveda

آیوروید

Womens' illnesses

زنانی بیماریاں

Harmony, consistency, congruence, unison, concordance

سامنجسیہ

Unani and ayurveda

یونانی اور آیوروید

Trees and plants

پیڑ پودے

Two sides of the same coin

ایک ہی سکّے کے دو پہلو

Difference

فرق

Cure, remedy, treatment

علاج

Treat to a certain extent

ایک حدّ تک علاج

Sure treatment

پورا پکّا علاج

Cannot say

نہیں کہ سکتے

Claim

دعوی

Treatment for the illness

بیماری کا علاج

With Ayurvedic medicines

آیورویدک دوائیوں سے

With Unani medicines

یونانی دوائیوں سے

Will work

کام کریگا

Will not work

کام نہیں کریگا

Ayurveda and Unani medicines

آیوروید اور یونانی کی دوائیاں

Like an antioxidant

اینٹی۔آکسڈینٹ کی طرح سے

Works

کام کرتی ہیں

Serve

سیوا کرو

Will only extend life

لائف کو صرف بڑھا رہے ہیں

Alive

زندہ

transcription (urdu): 
  • میرا نام ڈاکٹر سیما مقیم ہے۔۔۔ میں نے طبّیہ کالج، کریل باغ، دلّی یونیورسٹی سے بی۔یو۔ایم۔ایس 1993 میں پاس آؤٹ کیا ہے۔۔۔ اور میں آیوروید میں ہی پریکٹس کرتی ہوں۔۔۔ جہاں تک بات ہے فیلڈ کی، میں بیسکلی انفرٹلٹی پہ، مطلب جو۔۔ زنانی بیماریوں کے اوپر زیادہ ایمفسائز کرتی ہوں۔۔۔ ساتھ میں ہم لوگ کینسر کے لئے بھی ٹریٹمینٹ دیتے ہیں۔۔۔ سیکنڈلی، جو آپ نے پوچھا کہ جو سامنجسیہ والی بات، یونانی اور آیروید کی، بیسکلی جب ہم لوگ پڑھتے تھے تو ہم لوگ یہ دیکھتے تھے کہ عام طور پہ جو ہم لوگ یوز کر رہے یہں، جو بھی پیڑ پودے ہیں، وہ تو سملر ہیں، ان کی فارمیشن، جو فائنل پروڈکٹ ہے، اس کا نام اگر آپ اے یا بی دے دیجئیے، اس سے کوئی فرق نہیں پڑیگا۔۔۔ تو جہاں تک سامنجسیہ کی بات ہے وہ تو دونوں ایک ہی سکّے کے دو پہلو ہیں۔۔۔ آپ نام کچھ دے دیجئیے، اس سے کوئی فرق نہیں پڑتا۔۔۔
  •  
  •  جو آپ کہتی ہیں کہ آپ کینسر ریسرچ پر، یا کینسر ٹریٹمینٹ پر آپ کام کر رہی ہیں، تو کیا یہ علاج، کیونکہ کینسر ایک ایسی بیماری ہے جس کا زیادہ تر لوگ کہتے ہیں کہ ایک حد تک علاج ہو سکتا ہے، اس کے بعد آپ کچھ نہیں کر سکتے۔۔۔ کیا آپ کو لگتا ہے کہ آیوروید میں اس کا پورا پکّا علاج ہے؟
  •  
  • پورا پکّا علاج، تو آپ کسی چیز کو آپ ہنڈریڈ پرسینٹ نہیں کہ سکتے کہ اس کا ہنڈریڈ پرسینٹ یہ ٹریٹمینٹ ہے۔۔۔ اگر کوئی ایسا دعوی کرتا ہے کہ یہ ہنڈریڈ پرسینٹ ہم ٹریٹ کردینگے، تو وہ، میرے حساب سے وہ صحیح نہیں ہے۔۔۔ کوئی بھی علاج کرنے کے لئے اگر ہم، سپوز کر لیجئیے ایلوپیتھک سائڈ پر بھی جاتے ہیں، تو وہ سرجری کر دیتے ہیں۔۔۔ ریڈیو تھیرپی یا کیمیو تھوریپی اور ڈفرینٹ ٹائم آف ٹریٹمینٹ اڈاپٹ کرتے ہیں۔۔۔ لیکن وہ بھی یہ نہیں کہ سکتے کہ ہم نے سرجری کر دی ہے تو ہم نے یہ کینسر کو ٹریٹ کر دیا ہے۔۔۔ ٹھیک ہے نا۔۔۔ اسی طرح سے ہم لوگ ہنڈریڈ پرسینٹ دعوی کوئی بھی نہیں کر سکتا کہ ہم اس بیماری کا علاج ہنڈریڈ پرسینٹ کر دینگے۔۔۔ جہاں تک بات ہے اکسٹینشن آف لائف کی، کیونکہ سرجری میں بھی یا کیمیوتھیرپی سے یا ریڈیو تھیرپی سے بھی ہم ایک طرح سے لائف کو اکسٹینڈ ہی تو کر رہے ہیں اور ہم کچھ نہیں کر رہے۔۔۔ کسی بھی ٹریٹمینٹ کو ہم اٹھائیں تو وہ صرف اکسٹینشن آف لائف ہے۔۔۔ہم جب آیورویدک دوائیوں سے یا یونانی دوائیوں سے کسی پیشنٹ کو ٹریٹ کرتے ہیں، اسپیشلی فار کینسر، تو ایک چیز آپ، ہم اس کو بالکل کلیر کر کے چلتے ہیں کہ دس از جسٹ اکسٹینشن آف لائف۔۔۔ ٹھیک ہے نا۔۔۔ دوسری چیز یہ ہے، اگر ہمارے پاس پیشنٹ بنا کسی انویسٹگیشن کے آتا ہے، تو ہم لوگ پہلے کوشش یہ ہی کرتے ہیں کہ ہم لوگ کوئی اس کا ایف۔ ایل۔ اے۔ سی۔ نا کرائیں۔۔۔ اور ہم صرف ایم۔ آر۔ آئی۔، بیسکلی ایم۔ آر۔ آئی۔ سے یا سی۔ ٹی۔ یا جو بھی ہیں، مطلب نان انویسو پروسیجر سے ہم لوگ اس کو ڈائگنوز کر کے اسے ٹریٹمینٹ دیں۔۔۔ تو میرے خیال سے اگر کسی پیشنٹ کی ہم پینلیس لائف کو اکسٹینڈ کرتے ہیں تو وہ کافی بڑا اچیومینٹ ہو جاتا ہے۔۔۔
  •  
  • جیسے کینسر ٹریٹمینٹ کی بات آتی ہے۔۔۔ اس میں یہ کہا جاتا ہے کہ جو ٹریٹمینٹ ہوتا ہے، یہ پیلیٹو ہے، یہ کیوریٹو نہیں ہے۔۔۔ تو کیا آیوروید میں بھی وہ پیلییٹو ہے کیوریٹو نہیں؟
  •  
  • اگزیکٹلی آپ کسی چیز کو آپ ٹرمنولوجی میں باندھ نہیں سکتے، کہ یہ پرٹکیولرلی یہ ٹریٹمینٹ ہے یا وہ ٹریٹمینٹ ہے۔۔۔ ایسا بھی ہم نے دیکھا ہے کئی پیشنٹس میں کہ کینسر گروتھ اسٹارٹ ہوئی ہے، سپوز کر لیجئیے فرسٹ اسٹیج میں پیشنٹ آیا ہے، تو وہ گروتھ ریگریس بھی ہو گئی ہے۔۔۔ تو آپ اگزیکٹلی کسی ٹرمنولوجی میں آپ باندھ کے نہیں چل سکتے کہ یہ یہی کام کریگا اور یہ کام نیہں کریگا یا یہ نہیں کر سکتا اور یہ کر سکتا ہے۔۔۔ آپ کسی ٹرمس پہ اس کو نہیں باندھ سکتے۔۔۔
  •  
  • ایک منٹ، پین کر لیجئیے آپ۔۔۔ اس میں تھوڑا سا۔۔۔ ایک منٹ۔۔۔
  •  
  • اس میں۔۔۔ تھوڑا سا، کینسر والے اسی پوائنٹ پہ تھوڑا سا یہ ہے کہ بیسکلی آیوروید اور یونانی کی دوائیاں اینٹی آکسیڈینٹ کی طرح سے بھی کام کرتی ہیں اور لائف کو تھوڑا سا بڑھاتی ہیں۔۔۔ ہماری دوائیوں سے، جو بھی ہم دوائیاں اپنی یوز کرتے ہیں، کینسر کے پیشینٹس پہ، ان دوائیوں سے یہ دیکھا کیا ہے کہ جو ہوپلیس پیشینٹ ہیں، جنہیں یہ کر دیا جاتا ہے، ماڈرن ٹریٹمینٹ لینے کے بعد بھی، یہ ہمارے پاس بہت پیشینٹ آتے ہیں۔۔۔ جنہیں یہ کہ دیا جاتا ہے کہ یہ تو بس گیا، گھر جا کے سیوا کرو، خدمت کرو، ہم نے یہ کئی بار دیکھا ہے، ایک پیشینٹ تو میری ابھی، انفورچونیٹلی، ان کی۔۔۔ ڈیو ٹو اولڈ ایج، ابھی پینسٹھ سال کی ایج میں ڈیپتھ ہوئی ہے، شاستری نگر میں رہتی تھی، چندا دیوی نام تھا۔۔۔ اور میرے پاس اس کی ایم۔ آر۔ آئی۔ اور سی۔ ٹی۔ وغیرہ آج بھی بھی پڑے ہیں، انہیں ایبڈامنل کینسر تھا۔۔۔ ایبڈامنلی کینسر،  اسٹمک پہ کافی بڑا گروتھ تھا۔۔۔ ہم نے یونانی علاج انہیں یہی بتا کے چلایا کہ ہم آپ کی لائف کو صرف بڑھا رہے ہیں۔۔۔ اور وہ دس سال تک زندہ رہی، جب کہ آل انڈیا انسٹٹوٹ نے انہیں کہ دیا تھا کہ ہوپلیس ہے، لے جاؤِ، کچھ دن سیوا کرو، اور چلی جائیگی۔۔۔ اور ان کی ڈیتھ کینسر کی وجہ سے نہیں ہوئی، اب وہ نیچرل ڈیتھ مری ہیں۔۔۔ اور لاسٹ میں ان کے بالکل، ٹریٹمینٹ کے بعد، چھ سات مہینے کے ٹریٹمینٹ کے بعد میں نے انہیں دیکھا ہے کہ، جب میں نے ان کے دوبارہ سے ری۔انویسٹیگیٹ کرایا تو ٹوٹل، جتنا بھی ٹیومر تھا، سب ڈزالو ہو چکا تھا۔۔۔ وہ ہنڈریڈ پرسینٹ کیور تھی۔۔۔ ہمارے پاس کیونکہ ریسرچ کے فسلٹیز کم ہیں، ہم پوری طرح سے یہ پتہ نہیں لگا پاتے کہ ہماری میڈسن کا جو روٹ آف ورک ہے وہ کیا ہے۔۔۔ کیونکہ یونانی ٹریٹمینٹ کو ابھی گورمینٹ کی طرف سے بھی اتنی فسلٹی نہیں مل پائی کہ ہم لوگ اپنی ریسرچوں کو کمپلیٹ کر سکیں۔۔۔ لیکن یہ پتہ نا ہوتے ہوئے بھی ٹریٹمینٹ کا جو پارٹ رہا ہے ہمارا زیادہ سکسیسفل رہا ہے اور ہم لوگوں کے پیشنٹ اچّھی طرح سے ٹھیک ہوتے ہیں، کینسر میں بھی۔۔۔ ہم یہ نہیں کہتے کہ ہنڈریڈ پرسینٹ کیور کر دیا ہے یا ہم نے لائف سیو کر دی، لیکن ان کی لائف تھوڑی سی بڑھ ضرور جاتی ہے۔۔۔
exercise (urdu): 

ڈاکٹر سیما مقیم کس چیز میں اسپیشلائز کرتی ہیں؟

1 دماغی بیماریوں میں

2 پیٹ کی بیماریوں میں

3 مردانی بیماریوں میں

4 زنانی بیماریوں میں

ڈاکٹر سیما کے مطابق آیوروید اور یونانی ایک ہی سکّے کے دو پہلو ہیں، کیوں؟

1 دواؤں کے نام الگ الگ ہیں اور پیڑ، پودے دوا بنانے کے لئے بھی الگ ہے

2 دواؤں کے نام ایک ہیں اور پیڑ، پودے دوا بنانے کے لئے الگ ہیں

3 دواؤں کے نام کچھ بھی ہوں لیکن پیڑ، پودے دوا بنانے کے لئے ایک ہی ہیں

4 کچھ کچھ ملتے جلتے ہیں

سیما جی کے مطابق کیا کسی پیتھی میں پورا علاج ہو سکتا ہے؟

1 آیوروید میں علاج پورا ہو سکتا ہے، باقی پیتھیوں میں نہیں

2 یونانی میں علاج پورا ہو سکتا ہے، باقی پیتھیوں میں نہیں

3 کسی میں بھی مریض پوری طرح ٹھیک نہیں ہو سکتا، لین اس کی زندگی بڑھ سکتی ہے

4 ایلوپیتھی میں سرجری سے علاج پورا ٹھیک ہوجاتا ہے

آیوروید میں دوائیں کام کرتی ہیں، ڈاکٹر صاحب کے مطابق یہ کیوں نہیں ثابت ہو سکتا ہے؟

1 دوائیں ملتی نہیں ہیں

2 دوائیں دور دور سے آتی ہیں

3 ریسرچ فیسلٹیز کم ہیں

4 دوائیں ریسرچ کے لائق نہیں

Faith in Unani (2)

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

For what reason

किस वजह से

 

Cure, remedy, treatment

ईलाज

इलाज

Chest pain

सीने में तकलीफ

 

Trouble, bother

तकलीफ

 

Poor health

तबियत खराब

 

Dizziness

चक्कर

 

In the liver

कलेजे के अंदर

 

Pain gets stronger

दरद उठने लगता है

 

English medicine, western medicine

अंग्रेजी दवा

 

Unani

यूनानी

 

Unani treatment

हकीमी ईलाज

हकीमी इलाज

Faith, belief

यकीन

 

Unani treatment

यूनानी ईलाज

यूनानी इलाज

Medicine

दवा

 

root cause is finished, ends

जड़ खत्म हो जाती है

 

transcription (hindi): 

अ, जनाब अपना नाम बतायें, ये बतायें कि आप कहां से आये हैं? जैसे आये तो यहीं चितली कबर से हैं, हवेली आजम खां, गली अशाम... और नाम क्या है आपका? मुहम्मद शरीफ... ये बतायें कि किस वजह से आप आये हैं हकीम साहब के पास? ईलाज के लिये आये हैं... सीने में तकलीफ होती है, बहुत ज्यादा तकलीफ, जरा एकदम तबियत खराब हो जाती है, चक्कर आने लगते हैं, कलेजे के अंदर एकदम दर्द उठने लगता है... इस ईलाज के लिये आये हैं... ये बतायें कि कभी ऐसा हुआ है कि आपने अंग्रेजी दवा का ईलाज किया हो या सिर्फ आप यूनानी ही करते आये हैं? हकीमी ईलाज करते हैं, यूनानी... कभी अंग्रेजी दवा का आपने... नहीं, अंग्रेजी दवा की जब जरूरत पड़ती है जब ज्यादा तकलीफ हो जाती है, तब अपने अरवन हॉस्पीटल का ईलाज, पंत का ईलाज... चले जाते हैं? जी हां... (टेलीफोन की घंटी बजने की आवाज ) यकीन कितना है आपको यूनानी ईलाज पर? यकीन काफी है कि ये जो है, इस दवा से जो है, ये जड़ खत्म हो जाती है और अंग्रेजी दवाई से और जो है तकलीफ बढ़ जाती है... शुक्रिया...

translation (hindi): 

 

exercise (hindi): 

मौहम्मद शरीफ़ जी को क्या तकलीफ़ है?

1 कलेजे में दर्द है

2 सीने में दर्द है

3 सब

4 चक्कर आते हैं

मोहम्मद शरीफ़ हकीम के पास क्यों आते हैं?

1 यूनानी दवा सस्ती होती है

2 इलाज जल्दी हो जाता है

3 बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है

4 अस्पताल नहीं जाना पड़ता है

vocabulary (urdu): 

For what reason

کس وجہ سے

 

Cure, remedy, treatment

علاج

 

Chest pain

سینے میں تکلیف

 

Trouble, bother

تکلیف

 

Poor health

طبیعت خراب

 

Dizziness

چکّر

 

In the liver

کلیجے کے اندر

 

Pain gets stronger

درد اٹھنے لگتا ہے

 

English medicine, western medicine

انگریزی دوا

 

Unani

یونانی

 

Unani treatment

حکیمی علاج

 

Faith, belief

یقین

 

Unani treatment

یونانی علاج

 

Medicine

دوا

 

root cause is finished, ends

جڑ ختم ہو جاتی ہے

 

transcription (urdu): 

جناب اپنا نام بتائیں، یہ بتائیں کہ آپ کہاں سے آئے ہیں؟

 

جیسے آئے تو یہیں چتلی خبر سے ہیں، ہویلی عاظم خاں، گلی احمد شاہ۔۔۔

 

اور نام کیا ہے آپ کا؟

 

محمّد شریف۔۔۔ یہ بتائیں کہ کس وجہ سے آپ حکیم صاحب کے پاس آئے ہیں؟ علاج کے لئے آئے ہیں۔۔۔ سینے میں تکلیف ہوتی ہے، بہت زیادہ تکلیف، ذرا ایک دم طبیعت خراب ہو جاتی ہے، چکّر آنے لگتے ہیں، کلیجے کے اندر ایک دم درد اٹھنے لگتا ہے۔۔۔ اس علاج کے لئے آئے ہیں۔۔۔

 

یہ بتائیں کہ کبھی ایسا ہوا ہے کہ آپ نے انگریزی دوا کا علاج کیا ہو یا صرف آپ یونانی ہی کرتے آئے ہیں؟

 

حکیمی علاج کرتے ہیں، یونانی۔۔۔

 

کبھی انگریزی دوا کا آپ نے۔۔۔

 

نہیں، انگریزی دوا کی جب ضرورت پڑتی ہے جب زیادہ تکلیف ہو جاتی ہے، تو ہاسپٹل، ہاسپٹل جو ہے، وہاں علاج، پنت کا علاج۔۔۔

 

چلے جاتے ہیں؟

 

جی ہاں۔۔۔

 

(ٹیلفون کی گھنٹی بجنے کی آواز)

 

یقین کتنا ہے آپ کو یونانی پر؟

 

یقین کافی ہے کہ یہ جو ہے، اس دوا سے جو ہے، جڑ ختم ہو جاتی ہے اور انگریزی دوائی سے جو ہے اور  تکلیف بڑھ جاتی ہے۔۔۔

 

شکریہ۔۔۔

exercise (urdu): 

محمّد شریف جی کو کیا تکلیف ہے؟

1 کلیجی میں درد ہے

2 سینے میں درد ہے

3 سب

4 چکّر آتے ہیں

محمّد شریف حکیم کے پاس کیوں آتے ہیں؟

1 یونانی دوا سستی ہوتی ہے

2 علاج جلدی ہو جاتا ہے

3 بیماری جڑ سے ختم ہو جاتی ہے

4 ہسپتا نہیں جانا پڑتا ہے

Comparing Unani and Allopathy

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Pulse

नब्ज़

Preference, choice

तरजीह

Medicines

दवाइयां

 

देसी

Herbs, plants

जड़ी-बूटियां

 

कुचला

 

जोहर

 

अहज राकी

 

ऐलोवेरी कुचला

Ayurvedic

आयुर्वेदिक

Use

इस्तेमाल

 

मर्ज

Cure, remedy, treatment

इलाज

 

हल्की मकदार में

 

तजुर्बा

 

यूनानी अपने फन के ऊपर जिंदा रही

Advantage, benefit, gain, profit, use

फायदा

 

कुछ ठंडे होते हैं

 

कुछ गरम होते हैं

 

ठंडे की उसमें गरम दवायें

 

इसरौल

Unani

यूनानी

 

ईजाद

Elephant became crazy

हाथी जो पागल हो जाते थे

 

भिगो के

Juice

रस

 

हब्बे दवा शिफा

 

हमवजन

 

मिर्सिया

Black pepper

काली मिर्च

 

असरौल

 

बराबर की मिरदार में

Use

इस्तेमाल

 

निसिया

 

तायदात

 

जुनून

 

यूनानी मान्यता

 

तुर्जमा

 

हत्ता

Series of English medications

अंग्रेजी दवाअों का जो सिलसिला है

Little, slightly

थोड़ा-थोड़ा

Slow

आहिस्ता

Becomes right

सही हो जाता है

 

फौरी तौर पर

Loss

नुकसान

 

अंजुबार

 

कब्ज

 

अांतों पे

 

मैदे पे

 

दिमाग़ पे

 

गुर्दे पे

Expertise

महारथ

 

मद्देनज़र

Root

जड़ से

Patient

मरीज

 

पथरी

Kidney

गुर्दे की

With herbs

जड़ी-बूटियों से

 

यूनान मुफत्तरे एहसास

 

कुलथी

 

याहूदी

 

संगे सहीमारी

 

एक रत्ती नहीं

Quite clean, clear

बिल्कुल साफ

 

तोड़ने की दवा

 

पेशाब लाने वाली दवा

 

रेज़ा-रेज़ा हो के

Hard work

मेहनत

One hundred percent

सौ फीसद

 

अर्से से तज़ुर्बात

transcription (hindi): 

तो ऐलौपैथी के कुछ चीजें आप इस्तेमाल करते हैं, जैसे बी.पी.हो गया, या स्टेटसस्कोप हो गया, इस तरह की चीजें करते हैं या सिर्फ नब्ज़ देख कर ही पता करते हैं?

नहीं, स्टेटसस्कोप लेते हैं तरजीह में, लेकिन दवाइयां यही देते हैं देसी... और अगर देखा जाये तो ये नाम अलग-अलग लोगों ने रख छोड़े हैं और दवाइयां ये ही सब जड़ी-बूटियां हैं... मसलन नक्सवोमिका है, कुचला, उसका जोहर निकला लिया, और जो है ऐलौपैथिक में... और हमारी अहज राकी नाम है जिसका, ऐलोवेरी कुचला, आयुर्वेदक वाले इस्तेमाल करते हैं... अच्छा, होम्योपैथी में जो है, उसमें भी जो है वो यही मर्ज से इलाज करते हैं, ये ही जड़ी-बूटियां जो हैं, इसका एक्सट्रैक्ट वगैरह लेते हैं, बहुत हल्की मकदार में उसे इस्तेमाल करते हैं... और अंदर अगर जो है रजिस्टैंट सिस्टम जो है, तो वो काम करता है... उसे जो है, परसूऐट जो है, उसे जो है एक्सलरेट करते हैं... और इस तरीके से जो है उसमें शिफा होती है... और ऐलौपैथिक में जो है एंटी उसका है, जैसे यूनानी में भी एंटी उसका जो है असर... और जो ये है, यूनानी जो है यूनान से आई अरबों में, अरबों ने जो है उसको, वहमिया जो वो थे, वो सब अलग किया, उसके बाद ये जो होते-होते जो है, ये जहां उनकी हुकूमतें थी वहां पे इसका ईलाज हुआ... और वो सब होके, वो लोग जब यहां हिन्दुस्तान में आये, तो यहां से इसका ईलाज आया है... और जहां असल थी, वहां, उनमें भी असल खत्म हो गई ईलाज... और यहां पर जो है तजुर्बा, अंग्रेज जो लोग आये, उन्होंने अपनी ऐलौपैथी चलाई, कोशिश की... तो यहां, नहीं, लेकिन ये यूनानी अपने फन के ऊपर जिंदा रही... जिसे फायदा हुआ वो आया, और जो है, तो इस तरीके से... तो ऐसे ही यूनानी में भी जो है एंटी उसके, ईलाज है, उसमें भी...

जी...

जैसे उसमें कुछ ठंडे होते हैं, कुछ गरम होते हैं, ठंडे की उसमें गरम दवायें, गरम की ठंडी दवायें... ऐसी बहुत सारी हैं हमारी, इसरौल है, ये, हमारी यूनानी उसमें, हकीम अजमल खां ने जो है इसका, इसकी ईजाद की थी... वो जब वहां पे गये, नार्थ में, वहां पर देखा हाथी जो पागल हो जाते थे, वो भिगो के इसका, रस पिलाते थे और वो फिर सही हो जाते थे... तो उन्होंने उससे जो है, ये निकाला, उसे हब्बे दवा शिफा बनाई इसमें... जिसमें ये है हमवजन, मिर्सिया, काली मिर्च जिसे कहते हैं, और अंग्रेजी में पीपर, और असरौल बराबर की मिरदार में ले के इसे इस्तेमाल किया... और ये जो है इस, इसका जो है निसिया, उसमें जो ज्यादा ब्लड प्रैशर हो जाता है उसके लिये किया... और जो ज्यादा तायदात में जुनून, मैनिया जिसे अंग्रेजी में कहते हैं, हमारी यूनानी मान्यता है, तो ये हुआ... असल जो है यूनानी ही थी, यूनानी का तुर्जमा जो है, उन्होंने, अंग्रेजों ने भी उसमें किया और हत्ता के बहुत से नाम तो उन्होंने, वो ही नाम हैं जो उस, उनके थे... फिर वहां से उन्होंने जो है अपनी ज़बान के अंदर किया और फिर तर्जुमा करके फिर उसमें तरक्की की... अब यहां पे तो आदमी पहले दूसरी ज़बान में सीखता है फिर सोचता है इतनी उम्र का हिस्सा जाहिल हो जाता है...

जी...

इस तरीके से जो है, लेकिन जो उनकी अपनी ज़बान है, जब उसमें हो गया, आगे बढ़ते रहे और जो पीछे आने वाले थे वो पीछे ही रहे...

तरक्की की अगर हम बात करें... आप, आप जो कह रहे हैं कि ऐलौपैथी जो है यूनानी...

ऐलौपैथी...

जो अंग्रेजी दवाओं का जो सिलसिला है...

तो उसमें जो है...

कितना रहा है, रिसर्च हो रही है?

उसमें जो है, उसकी वजह ये है कि हर चीज का जो है, ये जो है उन्होंने स्पेशलाईज़ेशन हरेक चीज में कर दिया है... इस वजह से... लेकिन उसमें जो है वो, क्या कहते हैं, उसका एक्सट्रैक्ट ले लेते हैं, जो ज्यादा काम करने वाला है एक्सट्रैक्ट, उसका वो ले लेते हैं, बाकी उसमें छोड़ देते हैं... उस एक्सट्रैक्ट के अंदर सब चीज शामिल होती है... उसमें एल्कलाईट जो होते हैं सारे, तो, लेकिन उसी के अंदर जो हम कोल्ड ड्रग्स करते हैं, तो उसमें जो उसके एल्कलाईड, जो पूरी ड्रग है, उसके अंदर, नैशनल ड्रग में उसका साईड इफैक्ट जो है, उसकी दवा छुपी होती है... थोड़ा-थोड़ा, आहिस्ता करता है लेकिन वो सही हो जाता है लेकिन उसमें जो है, वो फौरी तौर पर तो करता है लेकिन बाद में जो है, वो दूसरी चीजों में नुकसान करता है... मतलब एक दवा है, अंजुबार है, अंजुबार होती है, हम जो है फौरी उसको मद्देनज़र रखते हुये, जिसको कहते हैं, जिसका काम है कव्ज करना, तो आंतों पे ये असर करेगी, मैदे पे, दिमाग़ पे इसका क्या असर होगा, गुर्दे पे क्या, पूरी चीज वो नहीं है... अब यहां, लेकिन स्पेशलिस्ट में क्या होता है, वो ही चीज में वो कहते हैं, वैसे तो सब सीखते हैं, लेकिन एक ही चीज में महारथ हासिल कर लेते हैं, वो दूसरी चीज को वो मद्देनज़र नहीं रखते... फौरी फायदा देखते हैं, यहां पूरा जो है, जनरल बॉडी का रहता है, यूनानी के अंदर काम किया जाता है...

तो ये फर्क एक, एक बहुत बड़ा फर्क है कि आपकी दवाईयां जो हैं वो जड़ से ही चीजों को निकाल रही हैं...

जो नैचुरल है, इसमें आर्टिफिशियल का मुकाबला कर ही नहीं सकती वो... जो नेचर ने हमें दिया हुआ है वो...

अ, ये बतायें कि आपकी इतने सालों की प्रैक्टिस है, आप, किस्म-किस्म के मरीज आपके पास आते होंगे, कोई ऐसा दिलचस्प वाक्या, या वाक्या कोई...

हूं...

जो आपके जहन में हो, कि बहुत ही बुरी हालत में कोई आया हो और आपने उसे ठीक किया हो...

हूं...

और अब आपका वो शुक्रिया हर मौके पर अदा करता हो... ऐसा कुछ याद है?

हां...

कुछ याद पड़ता है?

एक ऐसा मरीज यहां पे था, मतलब उसको पथरी थी गुर्दे की थी, अच्छा सफदरजंग हॉस्पीटल में था... उन्होंने, उनमें बैड खाली नहीं थे, उन्होंने दो महीने का टाईम दिया था उसे... किडनी की पथरी थी, गुर्दे की... तो हमारे पास आया, चलो हम यहां देख लें उसको... हमने जो है जड़ी-बूटियों से उसका ईलाज किया... उसमें जो है पथरी तो होता है यूनान मुफत्तरे एहसास और उसके अंदर पुराने में कुलथी है और इस, ये जो याहूदी है, संगे सहीमारी है, इस किस्म की, इसका ईलाज किया... उसके बाद पंद्रह दिन में, पंद्रह-बीस दिन के अंदर, जब वो वहां पे दुबारा उन्होंने एक्सरे कराया तो डॉक्टरों ने मुझसे कहा कि बिल्कुल साफ हो चुकी थी पथरी...

एक रत्ती नहीं...

हैं... एक रत्ती नहीं, बिल्कुल साफ, उन्होंने तोड़ के निकाल के, पूरा ऑपरेशन, एक तरफ तोड़ने की दवा देते हैं, एक तरफ डायबटीक, पेशाब लाने वाली दवा... तो उससे जो है रेज़ा-रेज़ा हो के निकल जाती है... तो इसमें जितनी मेहनत ऐलौपैथी से ज्यादा यूनानी में की जायेगी, तो इसका रिजल्ट सौ फीसद होगा... और ये बहुत अर्से से तज़ुर्बात होती आई है...

translation (hindi): 

 

 

 

 

 

exercise (hindi): 

एलोपैथी और यूनानी दवाओं के नाम अलग होते हैं पर हकीमों का मानना है कि वो एक ही जड़ी बूटियों से बनाई जाती हैं। नीचे दी गई दवायें कौन सी ऐसी हैं?

1 नक्सवोमिका

2 अहज राकी

3 सभी

4 इसरौल

अंग्रेज़ी दवाओं में हर चीज़ों में स्पेशलाईज़ेशन करने से क्या हो गया है?

1 मर्ज़ जड़ से ठीक हो जाता है

2 दवाओं के साइडइफ़ैक्ट नहीं होते।

3 दूसरी चीज़ों को वो मद्देनज़र नहीं रखते।

4 सब बीमारियों को पहचान लेते हैं|

पथरी के इलाज में “एक रत्ती नहीं” का इस्तेमाल किया गया है। इसका क्या मतलब है?

1 थोड़ा सा रह जाना

2 बहुत रह जाना

3 बिल्कुल साफ़ हो जाना

4 पूरा रह जाना

vocabulary (urdu): 

Pulse

نبض

Preference, choice

ترجیح

Medicines

دوائیاں

Native

دیسی

Herbs, plants

جڑی بوٹیاں

 

کچلا

 

جوہر

Dog's bane

ازراقی

   

Ayurvedic

آیرویدک

Use

استعمال

Ailment

مرض

Cure, remedy, treatment

علاج

In a low dosage

ہلکی مقدار میں

Experience

تجربہ

Unani thrived on its own art

یونانی اپنے فن کے اوپر زندہ رہی

Advantage, benefit, gain, profit, use

فائدہ

Some are cold

کچھ ٹھنڈے ہوتے ہیں

Some are hot

کچھ گرم ہوتے ہیں

 

ٹھنڈے کی اس میں گرم دوائیاں

 

اسرول

Unani

یونانی

Invent

ایجاد

The elephant that became crazy

ہاتھی جو پاگل ہو جاتے تھے

After wetting it

بھگو کے

Juice

رس

 

حبّ دوا شفی

 

ہموزن

 

مرسیا

Black pepper

کالی مرچ

 

اسرول

In equal quantities

برابر کی مقدار میں

Use

استعمال

 

نسیا

Quantity

تعداد

Madness, insanity

جنون

 

یونانی مانیتا

Translation

ترجمہ

Until

حتّی

Series of English medications

انگریزی دواؤں کا جو سلسلہ ہے

Little, slightly

تھوڑا تھوڑا

Slow

آہستہ

Becomes right/better

صحیح ہو جاتا ہے

Immediately

فوری طور پر

Loss

نقصان

 

انجبار

Constipation

قبض

 

آنتوں پہ

 

میدے پہ

On the mind

دماغ پہ

 

گردے پہ

Expertise

مہارت

 

مدّ نظر

Root

جڑ سے

Patient

مریض

 

پتھری

Kidney

گردے کی

With herbs

جڑی بوٹیوں سے

 

یونان مفتر احساس

 

کلتھی

 

ہاہودی

 

سنگِ سرِ  ماری

 

ایک رتّی نہیں

Quite clean, clear

بالکل صاف

 

توڑنے کی دوا

Medicine that facilitates urination

پیشاب لانے والی دوا

 

ریزہ ریزہ ہو کے

Hard work

محنت

One hundred percent

سو فیصد

Experience [that comes] with age

عمر سے تجربات

transcription (urdu): 

تو ایلوپیتھی کے کچھ چیزیں آپ استعمال کرتے ہیں، جیسے بی۔ پی۔ ہو گیا، یا اسٹیتھوسکوپ ہو گیا، اس طرح کی چیزیں کرتے ہیں یا صرف نبض دیکھ کر ہی پتہ کرتے ہیں؟

 

نہیں، اسٹیتھوسکوپ لیتے ہیں ترجیح میں، لیکن دوائیاں یہی دیتے ہیں دیسی۔۔۔ اور اگر دیکھا جائے تو یہ سب نام الگ الگ لوگوں نے رکھ چھوڑےے ہیں اور دوائیاں یہ ہی سب جڑی بوٹی ہے۔۔۔ مثلاً نکسوامکا ہے، کچلا، اس کا جوہر نکال لیا، اور جو ہے ایلوپیتھک میں۔۔۔ اور ہمارے یہاں ازراقی نام ہے اس کا، ایورویدہ میں کچلا، آیرویدک والے استعمال کرتے ہیں۔۔۔ اچّھا، ہم ہومیوپیتھی کے علم میں جو ہے، اس میں بھی یہ وہ اس مرض سے علاج کرتے ہیں، یہ ہی دوائیاں، جڑی بوٹیاں ہوتی ہیں، اس کا اکسٹریکٹ جو ۔۔۔۔۔ وغیرہ میں لیتے ہیں، بہت ہلکی مقدار میں اسے استعمال کرتے ہیں۔۔۔ اور اندر اگر جو ہے رزسٹینس سسٹم جو ہے، تو وہ کام کرتا ہے۔۔۔ اسے جو ہے، پرسوئیڈ اسے جو ہے، اسے جو ہے اکسیلریٹ کرتے ہیں۔۔۔ اور اس طریقے سے جو ہے اس میں شفی ہوتی ہے۔۔۔ اور ایلوپیتھک میں جو ہے اینٹی اس کا ہے، ایسے یونانی میں بھی اینٹی اس کا ہے علاج۔۔۔ اور جو اصل جو ہے، یہ یونانی جو ہے یونان سے آئی عربوں میں، عربوں نے اسے جو ہے ان کے جو، اہمیا  تو وہ جو تھے، وہ سب الگ کیا، اس کے بعد یہ ہوتے ہوتے جو ہے، یہ جہاں ان کی حکومتیں تھیں وہاں پہ اس کا علاج ہوا۔۔۔ اور وہ سب ہو کے، یہاں پہ جب ہندوستان میں وہ لوگ آئے، تو یہاں سے اس کا علاج رائج ہو گیا۔۔۔ اور جہاں وہ جو اصل تھی، ان میں بھی اصل ختم ہو گیا علاج۔۔۔ اور یہاں پہ جو تجربہ، انگریز جو لوگ آئے، انہوں نے اپنی ایلوپیتھی چلائی، کوشش کی۔۔۔ تو یہاں، نہیں، جو ہے، لیکن یہ یونانی اپنے فن کے اوپر زندہ رہی۔۔۔ جسے فائدہ ہوا وہ آیا، اور جو ہے، اس طریقے سے۔۔۔ تو ایسے یونانی میں بھی جو ہے انٹی اس کے، ضدّ علاج ہیں، بھئی، ضدّ ہے اس میں بھی۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

جیسے جو مرض کچھ ٹھنڈے ہوتے ہیں، کچھ گرم ہوتے ہیں، ٹھنڈے کی اس میں گرم دوائیں ہیں، گرم کی ٹھنڈی دوائیں۔۔۔ ایسی ہی بہت ساری ہیں ہماری، اسرول ہے، یہ، ہماری یونانی اس میں، حکیم اجل خان نے جو ہے اس کا، اس کی ایجاد کی تھی۔۔۔ وہ جب وہاں ہپ گئے، نارتھ میں، وہاں پر دیکھا ہاتھی جو پاگل ہو جاتے تھے تو انہیں اس میں بھگو کے اس کا، رس پلاتے تھے اور وہ پھر صحیح ہو جاتے تھے۔۔۔ تو انہوں نے اس سے جو ہے، یہ نکالا، اسے حبّ دوا شفی بنائی اس میں۔۔۔ جس میں یہ ہے بہموزن، مرسیا، کالی مرچ جسے کہتے ہیں اور انگریزی میں پیپر، اور اسرول برابر کی مقدار میں لے کے اسے استعمال کیا۔۔۔ اور یہ جو ہے اس، اس کا جو ہے نسیا، اس میں جو زیادہ بلڈ پریشر ہو جاتا ہے اس کے لئے کیا۔۔۔ اور جو زیادہ تعداد میں جنون، مینیا جسے انگریزی میں کہتے ہیں، ہماری یونانی مانییا ہے، تو یہ ہوا۔۔۔ اصل جو ہے یونانی ہی تھی، یونانی ہی کا ترجمہ جو ہے، انہوں نے، انگریزوں نے بھی اس میں کیا اور حتّی کہ بہت سے نام تو انہوں نے، وہ ہی نام ہیں جو اس، ان کے تھے۔۔۔ پھر وہاں سے انہوں نے جو ہے اپنی زبان کے اندر کیا اور پھر ترجمہ کر کے پھر اس میں، جو ہے، ترقّّی کی۔۔۔ اب یہاں پہ تو آدمی دوسری زبان میں جو آدمی پہلے سیکھتا ہے پھر ہوتا ہے اتنی عمر کا حصّہ غائب ہو جاتا ہے۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

اس طریقے سے جو ہے، لیکن جو ان کی اپنی زبان ہے، جب اس میں ہو گیا، آگے بڑھتے رہے اور جو پیچھے آنے والے تھے وہ پیچھے ہی رہے۔۔۔

 

ترقّی کی اگر ہم بات کریں۔۔۔ تو آپ، آپ جو کہ رہے ہیں کہ ایلوپیتھی جو ہی یونانی۔۔۔

 

ایلوپیتھی۔۔۔

 

جو انگریزی دواؤں کا جو سلسلہ ہے۔۔۔

 

تو اس میں جو ہے۔۔۔

 

کتنا رہا ہے، ریسرچ ہو رہی ہے؟

 

اس میں جو ہے، اس کی وجہ یہ ہے کہ ہر چیز کا جو ہے، یہ جو ہے انہوں نے اسپیشلائزیشن ہر ایک میں کر دیا ہے۔۔۔ اس وجہ سے۔۔۔ لیکن اس میں جو ہے وہ، کیا کہتے ہیں، اس کا اکسٹریکٹ لے لیتے ہیں، جو زیادہ کام کرنے والا ہے اکسٹریکٹ، اس کا وہ لے لیتے ہیں، باقی اس میں چھوڑ دیتے ہیں۔۔۔ کروڈ ڈرگز کے اندر سب چیز شامل ہوتی ہے۔۔۔ اس میں ایلکلائٹ جو ہوتے ہیں سارے، تو لیکن اسی کے اندر جو ہم کروڈ ڈرگز کرتے ہیں، تو اس میں جو اس کے الکلائٹ، جو پوری ڈرگ ہے، اس کے اند، نیچرل ڈرگ میں اس کا سائڈ افیکٹ جو ہے، اس کی دوا چھپی ہوتی ہے۔۔۔ تھوڑا تھوڑا، آہستہ کرتا ہے لیکن وہ صحیح ہو جاتا ہے لیکن اس میں جو ہے، وہ فوری طور پہ تو کرتا ہے لیکن بعد میں جو دوسری چیزوں میں وہ نقصان کرتا ہے۔۔۔ مثلاً ایک دوا ہے، انجبار ہے، انجبار ہوتی ہے، ہم جو ہے تو پوری اس کو مد نطر رکھتے ہوئے، جس کو کہتے ہیں، جس کا کام ہے قبض کرنا، تو آنتوں پہ یہ اثر کریگی، میدے پہ، دماغ پہ اس کیا اثر ہوگا، گردے پہ کیا، پوری چیز وہ نہیں ہے۔۔۔ اب یہاں، لیکن اسپیشلسٹ میں کیا ہوتا ہے، وہ ہی چیز میں وہ کہتے ہیں، ویسے تو سب سیکھتے ہیں، لیکن ایک ہی چیز میں مہارت حاصل کر لیتے ہیں، وہ دوسری چیز کو وہ مدّ نظر ہی رکھتے ہیں۔۔۔ فوری فائدہ دیکھتے ہیں، یہاں پورا جو ہے، جنرل باڈی کا رہتا ہے، یونانی کے اندر کام کیا جاتا ہے۔۔۔

 

تو یہ۔۔ یہ فرق ایک، ایک بہت بڑا فرق ہے کہ آپ کی دوائیاں جو ہیں وہ جڑ سے ہی چیزوں کو نکال رہی ہیں۔۔۔ 

 

ہاں، ہاں، ہاں، جو نیچرل ہے، اس میں آرٹفشیل کا مقابلہ کر ہی نہیں سکتے ہیں وہ۔۔۔ جو نیچر نے ہمیں دیا ہوا ہے وہ۔۔۔

 

یہ بتائیں کہ آپ کی اتنے سالوں کی پریکٹس ہے، آپ، قسم قسم کے مریض آپ کے پاس آتے ہونگے، کوئی ایسا دلچسپ واقعہ، یا واقعہ کوئی۔۔۔

 

ہوں۔۔۔

 

جو آپ کے ذہن میں ہو، کہ بہت ہی بری حالت میں کوئی آیا ہو اور آپ نے اسے ٹھیک کیا ہو۔۔۔

 

ہوں۔۔۔

 

اور اب آپ کا وہ شکریہ ہر موقعے پر ادا کرتا ہو۔۔۔ ایسا کچھ یاد پڑتا ہے؟ ہے؟

 

ہاں۔۔۔

 

کچھ یاد پڑتا ہے؟

 

ایک ایسا مریض یہاں پہ تھا، مطلب اس کو پتھری تھی گرد کی تھی، اچّھا سفدرجنگ ہاسپٹل میں تھا۔۔۔ انہوں نے ان میں بیڈ خالی نہیں تھے، انہوں نے دو مہینے کا ٹائم دیا تھا اسے۔۔۔ کڈنی کی پتھری تھی، گرد کی۔۔۔ تو ہمارے پاس آیا، چلو ہم یہاں دیکھ لیں اس کو۔۔۔ ہم نے جو ہے جڑی بوٹیوں سے اس کا علاج کیا۔۔۔ اس میں جو ہے پتھری تو ہوتا ہے یونان مپھترے احساس اور اس کے اندر پرانے میں کلتھی ہے اور اس، یہ جو یاہودی ہے، سنگِ سرِ ماہی ہے، اس قسم کی، اس کا علاج کیا۔۔۔ اس کے بعد پندرہ دن میں، پندرہ بیس دن کے اندر، جب وہ وہاں پہ دوبارہ انہوں نے ایکس۔ رے کرایا تو ڈاکٹروں نے مجھ  سے کہا کہ بالکل صاف ہو چکی تھی پتھری۔۔۔

 

ایک رتّی نہیں؟۔۔۔

 

ہاں؟

 

ایک۔۔

 

ایک، بالکل نہیں،  بالکل صاف ہو گئی تھی، انہوں نے توڑ کے نکال کے، پورا آپریشن، ایک طرف توڑنے کی دوا دیتے ہیں، ایک طرف ڈائبیٹک، پیشاب لانے والی دوا۔۔۔ تو اس سے جو ہے ریزہ ریزہ ہو کے نکل جاتی ہے۔۔۔ تو اصل میں جتنی محنت اس پہ ایلوپیتھی سے زیادہ یوانانی میں کی جائیگی، تو اس کا رزلٹ سو فیصد ہوگا۔۔۔ اور یہ بہت عرصے سے تجربات ہوتی آئی ہیں۔۔۔

 

 

exercise (urdu): 

حکیم صاحب آخر میں کس قسم کے مریض کا ذکر کرتے ہیں؟

1 قبض کے مریض

2 شوگر کے مریض

3 پتھری کے مریض

4 پیلیا کے مریض

Faith and Diseases

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Long time, a while

अर्सा

Disease

मर्ज

Difference

फर्क

Almost, approximately

तकरीबन

AIDS

एड्स

 

जाफी

 

बर्स

Leucoderma

ल्यूकोडर्मा

 

नफीसा

By local herbs

देसी जड़ी-बूटियों से

Nasal congestion

नज़ला

Cough

खांसी

Cold

ज़ुखाम

Stomach

पेट के

Treatment

शिफा

God's grace

अल्लाह की करम

 

बरकत

By God's agency

अललाह के हाथ

Effective to an extent

किस हद तक कारगार

transcription (hindi): 

हकीम साहब, ये बतायें कि किस-किस किस्म के मरीज आपके पास आते हैं, अभी... हां... और जो पहले, अब तो आपको अर्सा हां... हो गया है इसको करते हुये, तो पहले जिस किस्म के मर्ज थे, क्या वो मर्ज बढ़ गये हैं? कुछ फर्क नज़र आता है आपको इसमें? मर्ज तो तकरीबन वो ही हैं, कोई जो है एड्स वगैरह, ये जो है, ये जाफी हुये हैं मर्ज, बाकी हमारे बर्स के आते हैं ल्यूकोडर्मा के भी आते हैं और नफीसा भी वो ही है इसे, और वो शूगर के भी आते हैं... शूगर का भी जो हमारा काम हुआ है, रिसर्च वर्क, तो उसमें जो है दो-तीन हफ़्ते में, वो, दो-तीन महीने में जो है कंट्रोल में आ जाती है शूगर, ये देसी जड़ी बूटियों से... और नज़ला, खांसी, ज़ुखाम, पेट के जो स्पेशल, जो नहीं हो पाता, वो भी यहां पर आकर शिफा हो जाती है अल्लाह की करम से... ये, इसी से, एक सवाल ये है कि, हाथ आपका है, बरकत... बरकत उसकी, शिफा अल्लाह के हाथ है... वो, वो, किस हद तक कारगर है... कितना मानते हैं आप उसको? हो जाते हैं, अस्सी-नब्बे परसेंट तो सही लगती है... पांच-दस परसैंट है, और जिसका वक्त आ गया, वो तो, उसका तो हम कुछ कर ही नहीं सकते... वैसे भी हम, जब ऐसा होता है तो हम फिर हॉस्पीटल में भी रैफर कर देते हैं...

translation (hindi): 

 

exercise (hindi): 

हकीम जी के पास कौन से मर्ज़ के मरीज़ आते हैं

1 एड्स

2 ल्यूकोडर्मा

3 सभी

4 शूगर

"हाथ आपका, बरकत उसकी" से हकीम जी को ये कहाँ तक सही लगती है?

1 ५०%

2 ७०%

3 ८०-९०%

4 १००%

vocabulary (urdu): 

Long time, a while

اثر

Disease

مرض

Difference

فرق

Almost, approximately

تقریباً

AIDS

ایڈز

 

جافی

 

ورس

Leucoderma

لیوکوڈرمہ

 

نفیسا

By local herbs

دیسیی جڑی بوٹیوں سے

Nasal congestion

نزلہ

Cough

کھانسی

Cold

زکام

Stomach

پیٹ کے

Treatment

شفی

God's grace

اللّہ کا کرم

 

برکت

By God's agency

اللّہ کے ہاتھ

Effective to an extent

کس حد تک کارگار

transcription (urdu): 

حکیم صاحب، یہ بتائیں کہ کس کس قسم کے مریض آپ کے پاس آتے ہیں، ابھی۔۔۔ ہاں۔۔۔ اور جو پہلے، اب تو آپ کو اثر ہاں۔۔۔ ہو گیا ہے اس کو کرتے ہوئے، تو پہلے جس قسم کے مرض تھے، کیا وہ کمض بڑھ گئے ہیں؟ کچھ فرق نذر آتا ہے آپ کو اس میں؟ فرض تو تقریباً وہ ہی ہیں، کوئی جو ہے ایڈز وغیرہ، یہ جو ہے، یہ جافی ہوئے ہیں مرض، باقی ہمارے برس کے آتے ہیں لیوکوڈرمہ کے بھی ہیں اور نفیزا بھی وہ ہی ہے اسے، اور وہ شوگر کے بھی آتے ہیں۔۔۔ شوگر کا بھی جو ہمارا کام ہوا ہے، ریسرچ ورک، تو اس میں جو ہے دو تین ہفتے میں، وہ دو تین مہینے میں جو ہے کنٹرول میں آ جاتی ہے شوگر، یہ دیسی جڑی بوٹئیؤن سے۔۔۔ اور نزلہ، کھانسی، زکام، پیٹ کے جو اسپیشل، جو نہیں ہو پاتا، وہ بھی یہاں پر آ کر شفی ہو جاتی ہے اللّہ کی کرم سے۔۔۔ یہ، اسی سے، ایک سوال یہ ہے کہ ہاتھ آپ کا ہے، برکت۔۔۔ برکت اس کی، شفی اللّہ  کے ہاتھ ہے۔۔۔ وہ، وہ، کس حد تک کارگر ہے۔۔۔ کتنا مانتے ہیں آپ اس کو؟ ہو جاتے ہیں، اسّی نوّے پرسینٹ تو صحیح لگتی ہے۔۔۔ پانچ دس پرسینٹ ہے، اور جس کا وقت آ گیا، وہ تو، اس کا تو ہم کچھ کر ہی نہیں سکتے۔۔۔ ویسے بھی ہم، جب ایسا ہوتا ہے تو ہم پھر ہاسپٹل میں بھی رفر کر دیتے ہیں۔۔۔

exercise (urdu): 

حکیم جی کے پاس کونسے مرض کے مریض آتے ہیں؟

1 ایڈز

2 لیوکوڈرما

3 سب ہی

4 شوگر

ہاتھ آپکا، برکت آپکی والی بات حکیم جی کو کہاں تک صحیح لگتی ہے؟

1 پچاس فیصد

2 ستر فیصد

3 اسی سے نوے فیصد

4 سو فیصد

Faith and Special Unani Medicine

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Patient

मरीज

Medicine

दवा

Disease, illness

बीमारी

Advantage, benefit, gain, profit, use

फायदा

 

नबे दम

Circumstances

हालत

Bad, poor

खराब

Are writhing in pain

तड़प रहे हैं

One dose only

एक ही खुराक

Religious tax

जज़िया

 

तरीका सुन्नत

Special medications

खास दवायें

Effective medicines

मारक दवायें

 

जवाहर मुरा

Dying patient

मरने वाला मरीज

In the condition of death

मौत के हाल में

Breath comes

सांस आ जाती है

Talks, speaks

बात कर लेता है

Gold ashes

सोने की भस्म

Gems

जवाहरात

 

याकूद

 

जबरूद

Real pearl

सच्चे मोती

Amber

अंबर

 

अंबर ग्रेसिया

Tongue

ज़बान

Become red instantly

फौरन जर्द

Immediately affects

फौरन असर करता है

transcription (hindi): 

अ... ये बतायें कि कई हकीम ये मानते हैं... जी... हाथ हमारा है, रहम ऊपर वाले का है... जी... जी... तो ये किस हद तक आप मानते हैं कि ये सही है... बहुत, 100% ही, असल यही है... असल सही ये ही है... क्योंकि मान लो मरीज आता है और एक ही दवा उस मरीज को दे रहे हैं... लेकिन ऐसा है उसी बीमारी का दूसरा मरीज, जब वही दवा उसको दी, और एक को फायदा कर गई एक को नहीं करी... यह है, इसमें भी देखते हैं... कि ये उसी का ही काम है... बाज मरीज ऐसे आते हैं कि कोई नबे दम, कि उनकी हालत इतनी खराब है, तड़प रहे हैं, उनको ऐसे, एक ही खुराक उनको एकदम खड़े हो जाते हैं, शिफा हो गई, रिलीफ मिली तो कहते हैं, वाह... तो उनके हाथ में है... हमारा तो काम जो है अल्लाह के ऊपर ये जो जरिया है कि ये जो है जज़िया है करने वाली जात, अल्लाह के ऊपर में ही है सब... ये ईलाज भी एक तरीका सुन्नत है... ये भी करना है, ये बहाना है... ईलाज बहाना है तो... ये आपने बड़ी खूबसूरत बात कही कि ईलाज एक बहाना है... बाकी तो उनका ही है... कोई खास दवायें हैं... जी... यूनानी में, यूनानी दवाओं की जो... जी... जो औरों में नहीं है, और जो खास दवायें जो कहते हैं बिल्कुल मारक दवायें हैं, जो बिल्कुल लगती हैं... क्या खासियत है, कुछ खास दवायें हैं जिनका नाम आप बता सकते हैं... हां, हां, हां... एक दवा यूनानी में बनती है जवाहर मुरा... जवाहर मुरा पाउडर... उसके लिये तो ये है, अगर वो सही बन जाये, तो उसका ये है, कि अगर मरने वाला मरीज जो है, जो एकदम मौत के हाल में पड़ा है, उसको अगर खिला दिया जाये तो थोड़ी देर के लिये भी उसको सांस आ जाती है और वो बात कर लेता है... आई समझ बेटा... इनमें क्या, वो करता क्या है वो? पाउडर जो आप बता रहे हैं... पाउडर जो होता है, उसके अंदर ये सोने का, सोने की भस्म होती है और उसमें जवाहरात होते हैं... जवाहरात होते हैं, याकूद है, जबरूद है, जवहरात है और सच्चे मोती होते हैं... और उसमें अंबर भी होता है... अंबर ग्रेसिया, ये... तो सब चीज की ये दवायें होती हैं और वो ज़बान पे रखते ही फौरन जर्द हो जाता है, फौरन असर करता है...

translation (hindi): 

 

exercise (hindi): 

"इलाज तो बहाना है, बाकी तो अल्लाह का है" हकीम जी क्या कहना चाह रहे हैं?

1 दवाई नहीं भी मिले तो भी मरीज़ ठीक हो जाता है

2 दवा कोई भी मिले पर मरीज़ ठीक हो जाता है

3 इलाज हकीम जी करते हैं पर ठीक करना अल्लाह की मर्ज़ी है

4 मरीज़ केवल दुआओं से ठीक हो जाता है

एक खास दवा यूनानी में बनती है, उसका नाम जवाहर मुरा है। उसमें क्या इस्तेमाल होता है?

1 सोने की भस्म

2 सच्चे मोती

3 सब

4 याकूद

vocabulary (urdu): 

Patient

مریض

Medicine

دوا

Disease, illness

بیماری

Advantage, benefit, gain, profit, use

فائدہ

 

 

Circumstances

حالات

Bad, poor

خراب

Are writhing in pain

تڑپ رہے ہیں

One dose only

ایک ہی خوراک

Religious tax

جزیہ

 

طریقہ سنّت

Special medications

خاص دوائیں

Effective medicines

مارک دوائیں

 

جواہر مہرہ

Dying patient

مرنے والا مریض

In the condition of death

موت کے حال میں

Breath comes

سانس آ جاتی ہے

Talks, speaks

بات کر لیتا ہے

Gold ashes

سونے کی بھسم

Gems

جواہرات

 

یاقوت

 

جبروت

Real pearl

سچّے موتی

Amber

عنبر

 

عنبر گریسیہ

Tongue

زبان

Become red instantly

فوراً زرد

Immediately affects

فوراً اثر کرتا ہے

transcription (urdu): 

یہ بتائیں کہ کئی حکیم یہ مانتے ہیں۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

ہاتھ ہمارا ہے، رحم اوپر والے کا ہے۔۔۔

 

جی۔۔۔ جی۔۔۔

 

تو یہ کس حد تک آپ مانتے ہیں کہ یہ صحیح ہے۔۔۔

 

بہت، ہنڈریڈ پرسینٹ ہی، اصل صحیح یہ ہی ہے۔۔۔ کیونکہ مان لو مریض آتا ہے اور ایک ہی دوا اس مریض کو دے رہے ہیں۔۔۔ لیکن ایسا ہے اسی بیماری کا دوسرا مریض ہے، وہ ہی دوا اس کو دی، اور ایک کو فائدہ کر گئی ایک کو نہیں کری۔۔۔ یہ ہے، اس میں بھی دیکھتے ہیں۔۔۔ کہ یہ اسی کا ہی کام ہے۔۔۔ بعض مریض ایسے آتے ہیں کہ کوئی نبے دم، کہ ان کی حالت اتنی خراب ہے، تڑپ رہے ہیں، ان کو ایسے، ایک ہی خوراک ان کو ایک دم کھڑے ہو جاتے ہیں، شفا ہو گئی، رلیف مللی تو کہتے ہیں، واہ۔۔۔ تو ان کے ہاتھ میں ہے۔۔۔ ہمارا تو کام جو ہے وہ اللّہ کے اوپر یہ جو ذریعہ ہے کہ یہ جو ہے جزیہ ہے کرنے والی چیز، اللّہ کے اوپر میں ہی ہے سب۔۔۔ یہ علاج بھی ایک طریقہ سنّت ہے۔۔۔ یہ بھی کرنا ہے، یہ بہانہ ہے۔۔۔ علاج بہانہ ہے تو۔۔۔

 

یہ آپ نے بڑی خوبصورت بات کہی کہ علاج ایک بہانہ ہے۔۔۔ باقی تو ان کا ہی ہے۔۔۔

 

کوئی خاص دوائیں ہیں۔۔۔

 

جی۔۔۔ یونانی میں، یونانی دواؤں کی جو۔۔۔

 

جی۔۔۔ جو اوروں میں نہیں ہے، اور جو خاص دوائیں جو کہتے ہیں بالکل مارک دوائیں ہیں، جو بالکل لگتی ہیں۔۔۔ کہا خاض کر ہے، کچھ خاض دوائیں ہیں جن کا نام آپ بتا سکتے ہیں۔۔۔ ہاں، ہاں، ہاں۔۔۔ ایک دوا یونانی میں بنتی ہے جواہر مہرہ۔۔۔ جواہر مہرہ پاؤڈر۔۔۔ اس کے لئے تو یہ ہے، اگر وہ صحیح بن جائے، تو اس کا یہ ہے، کہ اگر مرنے والا مریض جو ہے، جو ایک دم موت کے حال میں پڑا ہے، اس کو اگر گھلا دیا جائے تو تھوڑی دیر ک لئے بھی اس کو سانس آ جاتی ہے اور وہ بات کر لیتا ہے۔۔۔ آئی سمجھ بیٹا۔۔۔

 

ان میں کیا، وہ کرتا کیا ہے وہ؟ پاؤڈر جو آپ بتا رہے ہیں۔۔۔

 

پاؤڈر جو ہوتا ہے، اس کے اندر یہ سونے کا، سونے کی بھسم ہوتی ہے اور اس میں جواہرات ہوتے ہیں۔۔۔ جواہرات ہوتے ہیںِ یاقوت ہے، جبرود ہے، جوہرات ہے اور سچّے موتی ہوتے ہیں۔۔۔ اور اس میں عنبر بھی ہوتا ہے۔۔۔ عنبر گریسیہ، تو سب چیز کی یہ دوائیں ہوتی ہیں اور وہ زبان پہ رکھتے ہی فوراً زرد ہو جاتا ہے، فوراً اثر کرتا ہے۔۔۔

exercise (urdu): 

حکیم جی کی اس بات سے کیا مراد ہے: علاج تو بہانہ ہے، باقی تو اللّہ کا ہے

1 دوائی نہیں بھی ملے تو بھی مریض ٹھیک ہو جاتا ہے

2 دوا کوئی بھی ملے پر مریض ٹھیک ہو جاتا ہے

3 علاج حکیم جی کرتے ہیں، لیکن ٹھیک کرنا اللّہ کی مرضی ہے

4 مریض صرف دعاؤں سے ٹھیک ہو جاتا ہے

ایک خاص دوا یونانی میں بنتی ہے، اس کا نام جواہر مہرہ ہے۔ اس میں کیا استعمال ہوتا ہے؟

1 سونے کی بھسم

2 سچّے موتی

3 یہ سب

4 یاقوت

Unani Treatment (3)

mediaURI: 
vocabulary (hindi): 

Most patients

ज्यादातर मरीज

Stomach

पेट के

 

हमराज के

Gas

गैस

 

अफारा

Indigestion

बदहज़मी

Acidity

पेट में तेजाबी या पेचिश

Irritation

जलन

Spasm, twitch

मरोड़

Heat increases

गर्मी बढ़ जाती है

Hot chili spices

तेज मिर्च मसाले

Upset stomach

पेट खराब

Teatment

शफा

Applied externally the one that should be taken orally

खाने वाली लगा ली

Took orally that which was to be applied externally

लगाने वाली खा ली

Effect

असर

Became alright

ठीक हो गया

Disease

मरज

Signs

निशानियां

Root

जड़

Foundation

बुनियाद

transcription (hindi): 

हमारे पास जो ज्यादातर मरीज आते हैं, वो आते हैं पेट के हमराज के... खासतौर पे गैस, अफारा, बदहज़मी और खाने की वजह से पेट में तेजाबी या पेचिश, जलन, लूज़ मोशन हो गये, क्योंकि इसका ऐलोपैथिक में कोई ईलाज नहीं है, करते हैं... और खासतौर पे पेचिश, मरोड़ जिसमें हो जाती है, और उसमें खून आने लगता है, ब्लीडिंग भी आ जाती है, गर्मी बढ़ जाती है... क्यों, खाने-पीने का अब इतना हो गया है, लोग तेज मिर्च-मसाले और फास्ट फूड वगैरह जो खाते हैं, तली हुई, उसकी वजह से पेट खराब होते हैं... जी... तो ज्यादातर पेट का जब ईलाज है, वो देसी में बहुत अच्छा है... वो आते हैं कराने... और दूसरा जो है वो नजले और खांसी वगैरह के आते हैं... उसका जो है देसी में ही अच्छा ईलाज है... तो जड़ से, बीमारियां जो हैं टाईम तो लेती हैं, खत्म कर देती हैं... जड़ से... आहिस्ता-आहिस्ता... ये बतायें कि आप, हरेक की जब प्रैक्टिस आप करते हैं... जी-जी... यूनानी ईलाज जब करते हैं... जी... एक अर्से से आप... जी... आप खुद... जी... आप खुद इसे कर रहे हैं... तो कोई दिलचस्प वाक्या हुआ हो, आप, आपके ज़हन में आता हो, सीखते हुये या काम करते हुये... जो ज़हन में बैठा हो, वो हमें बतायें, उसके बारे में... वाक्यात तो कई हैं, बल्कि वालिद साहब के वक्त का ही वाक्या है... (टेलीफोन की घंटी बजती है) एक मिनट... सवाल मैं कर चुका हूं, जवाब आप दीजिये... जी... वाक्ये की बात आप कर रहे थे... वाक्या तो बहुत हैं, मतलब ये है कि भई असल तो शफा है ही हाथ में... बाज दफ़ा ऐसा होता है के हमने मरीज को दवा लिखी और दवा उसने जो दी, वो खाने वाली लगा ली और लगाने वाली खा ली... खाने वाली दवा लगा ली और लगाने वाली दवा खा ली... अब वो आन के कहता है जी ये... तो इसी में... और ऐसा भी होता है कि वालिद साहब ने दवा लिखी के भई, मरीज को था नज़ला-खांसी, और दवा लिखी उसको पेट की, हाजमे की लिखी... कह रहा है, मुझे तो नज़ला-खांसी है, दवा पेट की लिखी... लेकिन कहा कि भई तुम्हारा तो असर है, कि भई अब खाओ... अब जो खाई तो वो सही, ठीक हो गया... के भई क्या बात है... के भई असर जो, मरज जो था वो पेट की वजह से था... पेट का... तो मरज, इसके अलावा निशानियां कई होती हैं और उसकी जड़ कहीं होती हैं... तो ये मरीज, हकीम का काम है देखने का के कहां जड़ है कहां नहीं... बाज दफा दिखाई कुछ देता है और अंदर उसकी जो है बुनियाद कहीं और होती है जा के...

translation (hindi): 

 

exercise (hindi): 

कौन सा ऐसा रोग है जिसका इलाज एलोपैथी में नहीं मिलता

1 सर दर्द का

2 फ़्लू का

3 पेचिश का

4 नजला, जुकाम का

अक्सर हकीम जी के पेशे में क्या होता है?

1 दवा गलत मरीज़ को दे देते हैं

2 मरीज़ फ़ी देना भूल जाते हैं

3 मरीज़ खाने की दवा लागा लेते हैं और लगाने की दवा खा लेते हैं

4 मरीज़ के दर्द कहीं होता है और बताते कहीं और हैं

vocabulary (urdu): 

Most patients

زیادہ تر مریض

Stomach

پیٹ کے

Of the diseases

امراض کے

Gas

گیس

 

افارا

Indigestion

بدہضمی

Acidity

پیٹ میں تیجابی یا پیچش

Irritation

جلن

Spasm, twitch

مروڑ

Heat increases

گرمی بڑھ جاتی ہے

Hot chili spices

تیز مرچ مسالے

Upset stomach

پیٹ خراب

Teatment

شفا

Applied externally the one that should be taken orally

کھانے والی لگا لی

Took orally that which was to be applied externally

لگانے والی کھا لی

Effect

اثر

Became alright

ٹھیک ہو گیا

Disease

مرض

Signs

نشانیاں

Root

جڑ

Foundation

بنیاد

transcription (urdu): 

ہمارے پاس جو زیادہ تر مریض آتے ہیں، وہ آتے ہیں پیٹ کے امراض کے۔۔۔ خاص طور پہ گیس، افارا، بدہضمی اور کھانے کی وجہ سے پیٹ میں تعجابی یا پیچش، جلن، لوز موشن ہو گئے، کیونکہ اس کا ایلوپیتھک میں کوئی علاج نہیں ہے، کرتے ہیں۔۔۔ اور خاص طور پہ پیچش، مروڑ جس میں ہو جاتی ہے، اور اس میں خون آنے لگتا ہے، بلیڈنگ بھی آ جاتی ہے، گرمی بڑھ جاتی ہے۔۔۔ کیوں، کھانے پینے کا اب انتا ہو گیا ہے، لوگ تیز مرچ مسالے اور فاسٹ فوڈ وغیرہ جو کھاتے ہیں، تلی ہوئی، اس کی وجہ سے پیٹ خراب ہوتے ہیں۔۔۔ جی۔۔۔ تو زیادہ تر پیٹ کا جب علاج ہے، وہ دیسی میں بہت اچّھا ہے۔۔۔ وہ آتے ہیں کرانے۔۔۔ اور دوسرا جو ہے وہ نزلے اور کھانسی وغیرہ کے آتے ہیں۔۔۔ اس کا جو ہے دیسی میں ہی اچّھا علاج ہے۔۔۔ تو جڑ سے، بیماریاں جو ہیں ٹائم تو لیتی ہیں، ختم کر دیتی ہیں۔۔۔ جڑ سے۔۔۔ آہستہ آہستہ۔۔۔

 

یہ بتائیں کہ آپ، ہر ایک کی جب پریکٹس آپ کرتے ہیں۔۔۔

 

جی، جی۔۔۔

 

یونانی علاج جب کرتے ہیں۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

ایک عرصے سے آپ۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

آپ خود۔۔۔

 

جی۔۔۔

 

آپ خود اسے کر رہے ہیں۔۔۔ تو کعئی دلچسپ واقعہ ہوا ہو، آپ آپ کے ذہن میں آتا ہو، سیکھتے ہوئے یا کام کرتے ہوئے۔۔۔ جو ذہن میں بیٹھا ہو، وہ ہمیں بتائیں، اس کے بارے میں۔۔۔

 

واقعات تو کئی ہیں، بلکہ والد صاحب کے ہی وقت کا ہی واقعہ ہے۔۔۔

 

(ٹیلیفون کی گھنٹی بجتی ہے)

 

ایک منٹ۔۔۔ سوال میں کر چکا ہوں، جواب آپ دیجئیے۔۔۔

جی۔۔۔

 

واقعے کی بات آپ کر رہے تھے۔۔۔

 

واقعے تو بہت ہیں، بطلب یہ ہے کہ بھئی اصل تو شفا ہے ہی ہاتھ میں۔۔۔ بعض دفہ ایسا ہوتا ہے کہ ہم نے مریض کو دوا لکھی اور دوا اس نے جو دی، وہ کھانے والی لگا لی اور لگانے والی کھا لی۔۔۔ کھانے والی دودا لگا لی اور لگانے والی دوا کھالی۔۔۔ اب وہ آن کے کہتا ہے جی یہ۔۔۔ تو اسی میں۔۔۔ اور ایسا بھی ہوتا ہے کہ والد صاحب نے دوا لکھی کہ بھئی، مریض کو تھا نزلہ کھانسی، اور دوا لکھی اس کو پیٹ کی، ہاضمے کی لکھی۔۔۔ کہ رہا ہے، مجھے تو نزلہ کھانسی ہے، دوا پیٹکی لکھی۔۔۔ لیکن کہا کہ بھئی تمھارا تو اثر ہے، کہ بھئی اب کھاؤ۔۔۔ اب جو کھائی تو وہ صحیح، ٹھیک ہو گیا۔۔۔ کہ بھئی کیا بات ہے۔۔۔ کہ بھئی اصر جو مرض جو تھا وہ پیٹ کی وجہ سے تھا۔۔۔ پیٹ کا۔۔۔ تو مرض، اس کے علامات، نشانیاں کہیں ہوتی ہیں اور اس کی جڑ کیہں ہوتی ہیں۔۔۔ تو یہ مریض، حکیم کا کام ہو دیکھنے کا کہ کہاں جڑ ہے کہاں نہیں۔۔۔ بعض دفعہ دکھائی کچھ دیتا ہے اور اندر اس کی جو ہے بنیاد کہیں اور ہوتی ہے جا کے۔۔۔

translation (urdu): 

کون سا ایسا روگ ہے جس کا علاج ایلوپیتھی میں نہیں ملتا؟

1 سر درد کا

2 فلو کا

3 پیچش کا

4 نزلے، زکام کا

اکثر حکیم جی کے پیشے میں کیا ہوتا ہے؟

1 دوا غلت مریض کو دے دیتے ہیں

2 مریض فی دینا بھول جاتے ہیں

3 مریض کھانے کی دوا لگا لیتے ہیں اور لگانے کی دوا کھا لیتے ہیں

4 مریض کو درد کہیں ہوتا ہے اور بتاتے کہیں اور ہیں

Syndicate content